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Bilaspur News: किरतपुर-नेरचौक फोरलेन पर किए गए 91 अवैध कब्जों पर होगी कार्रवाई
Mon, 28 Apr 2025 11:11 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Mon, 28 Apr 2025 11:11 PM IST
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एक्सक्सूलिव
-फोरलेन पर किए गए अवैध निर्माण यातायात में डाल रहे हैं बाधा
-कोर्ट के आदेशों के बाद एनएचएआई ने शुरू की है कार्रवाई
-टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग ने पंचायत सचिवों को पत्र लिखकर कहा
-एनएचएआई की बिना पूर्व अनुमति के किसी भी निर्माण को नहीं दें बिजली-पानी की एनओसी
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। किरतपुर-नेरचौक फोरलेन पर में बड़े पैमाने पर अवैध अतिक्रमण किए गए हैं। इस क्षेत्र में अभी तक कुल 91 अवैध कब्जों की पुष्टि हुई है, जिसमें अस्थायी 50 और स्थायी 41 कब्जे शामिल हैं। इन अवैध कब्जों में दुकानें, ढाबे, होटल, रेहड़ियां, खोखे, कार वाशिंग स्टेशन, शेड्स, नए प्लॉट और घरों का निर्माण किया गया है। यह निर्माण बिना किसी स्वीकृति के राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे किया गया है, जिससे सड़क उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो रहा है।
कोर्ट के आदेशों के बाद एनएचएआई ने कार्रवाई शुरू की है। प्राधिकरण ने टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग को जनवरी में पत्र लिखकर उन सभी स्ट्रक्चरों पर कार्रवाई करने का आग्रह किया था जो बिना पूर्व अनुमति के हाईवे के किनारे बनाए गए हैं। हैरानी का विषय यह है कि इन निर्माणों में करोडों की लागत से तैयार किए गए होटल, मकान, दुकानें भी शामिल हैं। इनके मालिकों ने पूर्व अनुमति के बिना इनका निर्माण कर दिया और अब इनपर कार्रवाई की तलवार लटक रही है। एनएचएआई के आग्रह के बाद टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग ने भी 18 फरवरी 2025 को बिलासपुर जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों को एक पत्र भेजा, जिसमें एनएचएआई द्वारा भेजे गए पत्र के संदर्भ में सभी संबंधित ग्राम पंचायतों को अवगत कराया गया। लिखा कि इन सभी निर्माणों के लिए बिजली और पानी के कनेक्शन की एनओसी जारी न करें। हालांकि अभी तय नहीं हुआ है कि इन निर्माणों को फोरलेन किनारे से हटाया जाएगा या नहीं। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग ने निर्देशित किया कि पंचायतें यह सुनिश्चित करें कि भविष्य में कोई भी निर्माण कार्य बिना एनएचआई की स्वीकृति के न हो।
टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग ने इस पत्र में बिलासपुर जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों बकरोआ, औहर, फटोह, पनोह, बल्ह चुराणी, मल्यावर, रोहिण, ननावां, री, स्वाहण, टाली, मंजेहड़, डमली, बैहना जट्टां, नौणी, कल्लर, और कोठीपुरा के पंचायती सचिवों से अनुरोध किया है कि वे इस मामले में उचित कार्रवाई करें। विभाग ने यह भी कहा कि सभी अवैध कब्जों को हटाने के लिए तत्काल कदम उठाए जाएं और यह सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में इस तरह के अतिक्रमणों को रोका जा सके। इन अवैध कब्जों में दुकानें, ढाबे, होटल, रेहड़ियां, खोखे, कार वाशिंग स्टेशन, शेड्स, और नए प्लॉट व घर शामिल हैं। इनमें से कुछ कब्जे अस्थायी रूप से किए गए हैं, जबकि अन्य स्थायी रूप से निर्मित हैं। यह अतिक्रमण सड़क सुरक्षा मानकों का उल्लंघन कर रहे हैं और यातायात के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं।
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इस मामले में उचित कार्रवाई करते हुए, एनएचएआई और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग दोनों मिलकर यह सुनिश्चित करेंगे कि भविष्य में इस तरह के अवैध कब्जों को रोकने के लिए कड़े नियम लागू किए जाएं। इसके साथ ही, राष्ट्रीय राजमार्ग के पास कोई भी नया निर्माण कार्य शुरू करने से पहले एनएचएआई से स्वीकृति प्राप्त करना अनिवार्य होगा, ताकि इस तरह की समस्या फिर से उत्पन्न न हो।
इनसेट
बिना राइट ऑफ वे के कैसे की अवैध कब्जों की पहचान
मामले को हाईकोर्ट लेकर जाने वाले फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति के महासचिव मदन लाल शर्मा ने कहा कि पहले तो एनएचएआई यह बताए कि जब उनके पास परियोजना का राइट ऑफ वे प्लान ही नहीं है तो उन्होंने 91 अवैध कब्जों की पहचान कैसे की। इन कब्जों को अवैध ठहराने का आधार क्या है। कहा कि सही राइट ऑफ वे प्लान के बिना यह संभव नहीं है। लोगों को गुमराह करने की बजाए एनएचएआई पहले राइट ऑफ वे प्लान पर काम करें। उसके बाद ही आगे की कार्रवाई संभव हो सकेगी।
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-फोरलेन पर किए गए अवैध निर्माण यातायात में डाल रहे हैं बाधा
-कोर्ट के आदेशों के बाद एनएचएआई ने शुरू की है कार्रवाई
-टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग ने पंचायत सचिवों को पत्र लिखकर कहा
-एनएचएआई की बिना पूर्व अनुमति के किसी भी निर्माण को नहीं दें बिजली-पानी की एनओसी
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। किरतपुर-नेरचौक फोरलेन पर में बड़े पैमाने पर अवैध अतिक्रमण किए गए हैं। इस क्षेत्र में अभी तक कुल 91 अवैध कब्जों की पुष्टि हुई है, जिसमें अस्थायी 50 और स्थायी 41 कब्जे शामिल हैं। इन अवैध कब्जों में दुकानें, ढाबे, होटल, रेहड़ियां, खोखे, कार वाशिंग स्टेशन, शेड्स, नए प्लॉट और घरों का निर्माण किया गया है। यह निर्माण बिना किसी स्वीकृति के राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे किया गया है, जिससे सड़क उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो रहा है।
कोर्ट के आदेशों के बाद एनएचएआई ने कार्रवाई शुरू की है। प्राधिकरण ने टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग को जनवरी में पत्र लिखकर उन सभी स्ट्रक्चरों पर कार्रवाई करने का आग्रह किया था जो बिना पूर्व अनुमति के हाईवे के किनारे बनाए गए हैं। हैरानी का विषय यह है कि इन निर्माणों में करोडों की लागत से तैयार किए गए होटल, मकान, दुकानें भी शामिल हैं। इनके मालिकों ने पूर्व अनुमति के बिना इनका निर्माण कर दिया और अब इनपर कार्रवाई की तलवार लटक रही है। एनएचएआई के आग्रह के बाद टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग ने भी 18 फरवरी 2025 को बिलासपुर जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों को एक पत्र भेजा, जिसमें एनएचएआई द्वारा भेजे गए पत्र के संदर्भ में सभी संबंधित ग्राम पंचायतों को अवगत कराया गया। लिखा कि इन सभी निर्माणों के लिए बिजली और पानी के कनेक्शन की एनओसी जारी न करें। हालांकि अभी तय नहीं हुआ है कि इन निर्माणों को फोरलेन किनारे से हटाया जाएगा या नहीं। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग ने निर्देशित किया कि पंचायतें यह सुनिश्चित करें कि भविष्य में कोई भी निर्माण कार्य बिना एनएचआई की स्वीकृति के न हो।
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टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग ने इस पत्र में बिलासपुर जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों बकरोआ, औहर, फटोह, पनोह, बल्ह चुराणी, मल्यावर, रोहिण, ननावां, री, स्वाहण, टाली, मंजेहड़, डमली, बैहना जट्टां, नौणी, कल्लर, और कोठीपुरा के पंचायती सचिवों से अनुरोध किया है कि वे इस मामले में उचित कार्रवाई करें। विभाग ने यह भी कहा कि सभी अवैध कब्जों को हटाने के लिए तत्काल कदम उठाए जाएं और यह सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में इस तरह के अतिक्रमणों को रोका जा सके। इन अवैध कब्जों में दुकानें, ढाबे, होटल, रेहड़ियां, खोखे, कार वाशिंग स्टेशन, शेड्स, और नए प्लॉट व घर शामिल हैं। इनमें से कुछ कब्जे अस्थायी रूप से किए गए हैं, जबकि अन्य स्थायी रूप से निर्मित हैं। यह अतिक्रमण सड़क सुरक्षा मानकों का उल्लंघन कर रहे हैं और यातायात के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं।
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इस मामले में उचित कार्रवाई करते हुए, एनएचएआई और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग दोनों मिलकर यह सुनिश्चित करेंगे कि भविष्य में इस तरह के अवैध कब्जों को रोकने के लिए कड़े नियम लागू किए जाएं। इसके साथ ही, राष्ट्रीय राजमार्ग के पास कोई भी नया निर्माण कार्य शुरू करने से पहले एनएचएआई से स्वीकृति प्राप्त करना अनिवार्य होगा, ताकि इस तरह की समस्या फिर से उत्पन्न न हो।
इनसेट
बिना राइट ऑफ वे के कैसे की अवैध कब्जों की पहचान
मामले को हाईकोर्ट लेकर जाने वाले फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति के महासचिव मदन लाल शर्मा ने कहा कि पहले तो एनएचएआई यह बताए कि जब उनके पास परियोजना का राइट ऑफ वे प्लान ही नहीं है तो उन्होंने 91 अवैध कब्जों की पहचान कैसे की। इन कब्जों को अवैध ठहराने का आधार क्या है। कहा कि सही राइट ऑफ वे प्लान के बिना यह संभव नहीं है। लोगों को गुमराह करने की बजाए एनएचएआई पहले राइट ऑफ वे प्लान पर काम करें। उसके बाद ही आगे की कार्रवाई संभव हो सकेगी।