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Bilaspur News: गबन के आठ साल बाद तलाई सभा के पैसे की रिकवरी शुरू
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संपत्ति नीलाम होने से पहले तीन ऋण दोषियों ने किया पैसे का भुगतान
एक दोषी ने आंशिक भुगतान कर कुर्क होने से बचाई जमीन
विभाग कर रहा सभा के 135 डिफाल्टरों पर कार्रवाई की तैयारी
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। सहकारी सभा तलाई में वर्ष 2018 में उजागर हुए करोड़ों रुपये के गबन मामले में सहकारिता विभाग ने अब निर्णायक कदम उठाना शुरू कर दिया है। खाताधारकों और संघर्ष समिति के लगातार दबाव के बाद विभाग ने दोषियों की संपत्ति अटैच और नीलामी कर वसूली की प्रक्रिया तेज कर दी है।
सोसायटी में करीब 135 डिफाल्टर हैं, जिनसे लगभग 20 करोड़ रुपये की वसूली की जानी है। चार डिफाल्टरों की जमीन नीलामी के लिए तय की गई है। पिछली बार नीलामी में कोई खरीदार सामने नहीं आया था, जिसके कारण संपत्तियां नहीं बिक सकी थीं। लेकिन अब निर्धारित नीलामी से पहले ही तीन मामलों में केस क्लोज हो गया है और एक से आंशिक रिकवरी हुई है। तीन लोगों का केस क्लोज कर दिया गया और एक ने लगभग 4 लाख रुपये जमा किए हैं। बाकी राशि अगले सात दिनों में देने का आश्वासन दिया है। इससे खाताधारकों को थोड़ी राहत मिली है। वहीं अन्य दोषियों की चल-अचल संपत्ति भूमि राजस्व अधिनियम 1954 के तहत नीलाम कर खाताधारकों को न्याय दिलाने की प्रक्रिया शुरू की गई है। सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद दोषियों की संपत्ति नीलाम करने की प्रक्रिया शुरू हो पाएगी।
बताते चलें कि तलाई सहकारी सभा में वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा वर्ष 2018 में हुआ था। उस समय सभा में शेयरधारकों और खाताधारकों की जमापूंजी 78 करोड़ रुपये से अधिक थी। इसके बावजूद लगभग 84 करोड़ रुपये ऋण के रूप में जारी किए गए, जिनकी रिकवरी अब तक नहीं हुई है। मुख्य मामलों में पूर्व सचिव और पिछली प्रबंध समिति के खिलाफ लगभग 34 करोड़ रुपये का अवार्ड पारित किया जा चुका है। हालांकि, यह मामला फिलहाल शिमला स्थित अपीलीय प्राधिकरण के समक्ष विचाराधीन है और अपील लंबित होने के कारण अवार्ड पर अंतिम कार्रवाई और वास्तविक वसूली अभी तक शुरू नहीं हो पाई है।
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सहकारी सभा में जमा राशि पर खाताधारकों का लगभग 20–25 करोड़ रुपये का पैसा फंसा हुआ है। आरोप हैं कि सभा ने नियमों की अनदेखी करते हुए अमीर व्यक्तियों को बैंक से दोगुने ब्याज पर लाभ पहुंचाया, जबकि किसानों को महंगे ब्याज पर ऋण देकर उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर की। जमापूंजी पर 9-12 प्रतिशत ब्याज और एजेंटों को 2 प्रतिशत अतिरिक्त कमीशन देने के कारण सहकारी अधिनियम और बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट 1949 दोनों का उल्लंघन हुआ। खाताधारकों और संघर्ष समिति ने लगातार यह सवाल उठाया है कि जब तलाई सहकारी सभा का हर वर्ष विभागीय ऑडिट होता रहा, तो इतने बड़े पैमाने पर गबन कैसे हो गया। समिति का कहना है कि विभागीय निगरानी में गंभीर खामियां रहीं।
इनसेट
जांच और एफआईआर
साल 2018 में करीब 34 करोड़ रुपये के गबन का मामला सामने आया था, जो बाद में लगभग 40 करोड़ रुपये तक बढ़ गया। इसके बाद सहकारिता विभाग ने 16 मार्च 2019 को तलाई थाना में एफआईआर दर्ज करवाई। बाद में मामला प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) शिमला को सौंपा गया, लेकिन खाताधारकों का आरोप है कि जांच की गति बेहद धीमी रही और अब तक कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया। आठ साल के इंतजार के बाद यह लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है। सहकारी विभाग की लगातार समीक्षा के बाद अब खाताधारकों को उम्मीद जगी है कि उनका पैसा वापस मिलेगा और दोषियों को न्याय के दायरे में लाया जाएगा।
कोट
विभाग ने सभा के चार ऋण दोषियों की संपत्ति की नीलामी रखी थी ताकि हितधारकों का पैसा वापस किया जा सके। लेकिन नीलामी से पहले ही तीन ने पैसा चुका दिया। वहीं एक ने आंशिक भुगतान कर दिया है और बाकी का एक सप्ताह में भुगतान करने का आश्वासन दिया है। वहीं 135 ऋण दोषियों पर कार्रवाई जारी है।
-भास्कर कालिया, सहायक पंजीयक, सहकारी सभाएं बिलासपुर
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एक दोषी ने आंशिक भुगतान कर कुर्क होने से बचाई जमीन
विभाग कर रहा सभा के 135 डिफाल्टरों पर कार्रवाई की तैयारी
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। सहकारी सभा तलाई में वर्ष 2018 में उजागर हुए करोड़ों रुपये के गबन मामले में सहकारिता विभाग ने अब निर्णायक कदम उठाना शुरू कर दिया है। खाताधारकों और संघर्ष समिति के लगातार दबाव के बाद विभाग ने दोषियों की संपत्ति अटैच और नीलामी कर वसूली की प्रक्रिया तेज कर दी है।
सोसायटी में करीब 135 डिफाल्टर हैं, जिनसे लगभग 20 करोड़ रुपये की वसूली की जानी है। चार डिफाल्टरों की जमीन नीलामी के लिए तय की गई है। पिछली बार नीलामी में कोई खरीदार सामने नहीं आया था, जिसके कारण संपत्तियां नहीं बिक सकी थीं। लेकिन अब निर्धारित नीलामी से पहले ही तीन मामलों में केस क्लोज हो गया है और एक से आंशिक रिकवरी हुई है। तीन लोगों का केस क्लोज कर दिया गया और एक ने लगभग 4 लाख रुपये जमा किए हैं। बाकी राशि अगले सात दिनों में देने का आश्वासन दिया है। इससे खाताधारकों को थोड़ी राहत मिली है। वहीं अन्य दोषियों की चल-अचल संपत्ति भूमि राजस्व अधिनियम 1954 के तहत नीलाम कर खाताधारकों को न्याय दिलाने की प्रक्रिया शुरू की गई है। सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद दोषियों की संपत्ति नीलाम करने की प्रक्रिया शुरू हो पाएगी।
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बताते चलें कि तलाई सहकारी सभा में वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा वर्ष 2018 में हुआ था। उस समय सभा में शेयरधारकों और खाताधारकों की जमापूंजी 78 करोड़ रुपये से अधिक थी। इसके बावजूद लगभग 84 करोड़ रुपये ऋण के रूप में जारी किए गए, जिनकी रिकवरी अब तक नहीं हुई है। मुख्य मामलों में पूर्व सचिव और पिछली प्रबंध समिति के खिलाफ लगभग 34 करोड़ रुपये का अवार्ड पारित किया जा चुका है। हालांकि, यह मामला फिलहाल शिमला स्थित अपीलीय प्राधिकरण के समक्ष विचाराधीन है और अपील लंबित होने के कारण अवार्ड पर अंतिम कार्रवाई और वास्तविक वसूली अभी तक शुरू नहीं हो पाई है।
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सहकारी सभा में जमा राशि पर खाताधारकों का लगभग 20–25 करोड़ रुपये का पैसा फंसा हुआ है। आरोप हैं कि सभा ने नियमों की अनदेखी करते हुए अमीर व्यक्तियों को बैंक से दोगुने ब्याज पर लाभ पहुंचाया, जबकि किसानों को महंगे ब्याज पर ऋण देकर उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर की। जमापूंजी पर 9-12 प्रतिशत ब्याज और एजेंटों को 2 प्रतिशत अतिरिक्त कमीशन देने के कारण सहकारी अधिनियम और बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट 1949 दोनों का उल्लंघन हुआ। खाताधारकों और संघर्ष समिति ने लगातार यह सवाल उठाया है कि जब तलाई सहकारी सभा का हर वर्ष विभागीय ऑडिट होता रहा, तो इतने बड़े पैमाने पर गबन कैसे हो गया। समिति का कहना है कि विभागीय निगरानी में गंभीर खामियां रहीं।
इनसेट
जांच और एफआईआर
साल 2018 में करीब 34 करोड़ रुपये के गबन का मामला सामने आया था, जो बाद में लगभग 40 करोड़ रुपये तक बढ़ गया। इसके बाद सहकारिता विभाग ने 16 मार्च 2019 को तलाई थाना में एफआईआर दर्ज करवाई। बाद में मामला प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) शिमला को सौंपा गया, लेकिन खाताधारकों का आरोप है कि जांच की गति बेहद धीमी रही और अब तक कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया। आठ साल के इंतजार के बाद यह लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है। सहकारी विभाग की लगातार समीक्षा के बाद अब खाताधारकों को उम्मीद जगी है कि उनका पैसा वापस मिलेगा और दोषियों को न्याय के दायरे में लाया जाएगा।
कोट
विभाग ने सभा के चार ऋण दोषियों की संपत्ति की नीलामी रखी थी ताकि हितधारकों का पैसा वापस किया जा सके। लेकिन नीलामी से पहले ही तीन ने पैसा चुका दिया। वहीं एक ने आंशिक भुगतान कर दिया है और बाकी का एक सप्ताह में भुगतान करने का आश्वासन दिया है। वहीं 135 ऋण दोषियों पर कार्रवाई जारी है।
-भास्कर कालिया, सहायक पंजीयक, सहकारी सभाएं बिलासपुर