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Bilaspur News: चिट्टे के साथ पकड़े युवक को संदेह का लाभ, किया बरी
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15.48 ग्राम हेरोइन की बरामदगी का था आरोप
स्वतंत्र गवाहों के मुकरने, पुलिस साक्ष्यों में विरोधाभास के चलते मिली राहत
विशेष न्यायाधीश बिलासपुर की अदालत ने सुनाया निर्णय
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। जिला एवं सत्र न्यायालय बिलासपुर की विशेष अदालत ने मादक द्रव्य अधिनियम के तहत चल रहे एक मामले में फैसला सुनाते हुए आरोपी मनीष कुमार को बरी कर दिया है। अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ संदेह से परे दोष सिद्ध करने में विफल रहा है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 4 सितंबर 2019 की रात करीब 11:35 बजे पुलिस की एसआईयू टीम छड़ोल के पास गश्त पर थी। इस दौरान दिल्ली-मनाली रूट की एक एचआरटीसी बस टायर की मरम्मत के लिए रुकी हुई थी। पुलिस का दावा था कि जब उन्होंने बस की चेकिंग शुरू की, तो सीट नंबर 30 पर बैठा युवक घबरा गया और उसने अपने पैर के पास एक लिफाफा फेंका, जिसमें 15.48 ग्राम चिट्टा बरामद हुआ। अदालत में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की कहानी कई मोर्चों पर कमजोर साबित हुई। मामले के मुख्य स्वतंत्र गवाह, बस के चालक जयपाल और परिचालक अजय कुमार ने पुलिस की कहानी का समर्थन नहीं किया। उन्होंने अदालत में कहा कि उनके सामने कोई बरामदगी नहीं हुई। पुलिस यह साबित करने के लिए कोई दस्तावेजी प्रमाण (बस टिकट) पेश नहीं कर सकी कि आरोपी उस समय उसी बस में सफर कर रहा था। पुलिस गवाहों के बयानों में बरामदगी के समय और प्रक्रिया को लेकर भारी विसंगतियां पाई गईं। अदालत ने टिप्पणी की कि न्याय का सिद्धांत कहता है कि आरोपी का दोष संदेह से परे सिद्ध होना चाहिए। इस मामले में स्वतंत्र गवाहों के मुकरने और पुलिस साक्ष्यों में विरोधाभास के कारण आरोपी को संदेह का लाभ दिया जाता है। अदालत ने आरोपी को एनडीपीएस एक्ट के तहत आरोपों से बरी का दिया। साथ ही बरामद चिट्टे को नियमानुसार नष्ट करने के आदेश जारी किए गए हैं।
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स्वतंत्र गवाहों के मुकरने, पुलिस साक्ष्यों में विरोधाभास के चलते मिली राहत
विशेष न्यायाधीश बिलासपुर की अदालत ने सुनाया निर्णय
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। जिला एवं सत्र न्यायालय बिलासपुर की विशेष अदालत ने मादक द्रव्य अधिनियम के तहत चल रहे एक मामले में फैसला सुनाते हुए आरोपी मनीष कुमार को बरी कर दिया है। अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ संदेह से परे दोष सिद्ध करने में विफल रहा है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 4 सितंबर 2019 की रात करीब 11:35 बजे पुलिस की एसआईयू टीम छड़ोल के पास गश्त पर थी। इस दौरान दिल्ली-मनाली रूट की एक एचआरटीसी बस टायर की मरम्मत के लिए रुकी हुई थी। पुलिस का दावा था कि जब उन्होंने बस की चेकिंग शुरू की, तो सीट नंबर 30 पर बैठा युवक घबरा गया और उसने अपने पैर के पास एक लिफाफा फेंका, जिसमें 15.48 ग्राम चिट्टा बरामद हुआ। अदालत में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की कहानी कई मोर्चों पर कमजोर साबित हुई। मामले के मुख्य स्वतंत्र गवाह, बस के चालक जयपाल और परिचालक अजय कुमार ने पुलिस की कहानी का समर्थन नहीं किया। उन्होंने अदालत में कहा कि उनके सामने कोई बरामदगी नहीं हुई। पुलिस यह साबित करने के लिए कोई दस्तावेजी प्रमाण (बस टिकट) पेश नहीं कर सकी कि आरोपी उस समय उसी बस में सफर कर रहा था। पुलिस गवाहों के बयानों में बरामदगी के समय और प्रक्रिया को लेकर भारी विसंगतियां पाई गईं। अदालत ने टिप्पणी की कि न्याय का सिद्धांत कहता है कि आरोपी का दोष संदेह से परे सिद्ध होना चाहिए। इस मामले में स्वतंत्र गवाहों के मुकरने और पुलिस साक्ष्यों में विरोधाभास के कारण आरोपी को संदेह का लाभ दिया जाता है। अदालत ने आरोपी को एनडीपीएस एक्ट के तहत आरोपों से बरी का दिया। साथ ही बरामद चिट्टे को नियमानुसार नष्ट करने के आदेश जारी किए गए हैं।
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