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Bilaspur News: 27.60 ग्राम चिट्टा बरामदगी मामले में आरोपी को जमानत
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तविशेष अदालत ने कहा- जांच पूरी, आरोपी का पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। स्वारघाट थाना क्षेत्र में एचआरटीसी बस से 27.60 ग्राम चिट्टा बरामद होने के मामले में विशेष अदालत बिलासपुर ने आरोपी को जमानत दे दी है। विशेष न्यायाधीश ज्योत्सना सुमंत दधवाल की अदालत ने कहा कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है और आरोपी का कोई आपराधिक इतिहास सामने नहीं आया है। अदालत ने आरोपी को एक लाख रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि के दो जमानती देने की शर्त पर रिहा करने के आदेश दिए हैं।
बीती 26 जुलाई की रात पुलिस ने चौधरी ढाबा के पास आरटीओ बैरियर के नजदीक नाका लगाकर दिल्ली से लेह जा रही एचआरटीसी बस को रोका था। इस दौरान एक यात्री के बैग से 27.60 ग्राम चिट्टा मिलने की बात कही गई थी।
अदालत में आरोपी की ओर से दलील दी गई कि बरामद मादक पदार्थ व्यावसायिक मात्रा से कम है और मामले की जांच पूरी हो चुकी है। ऐसे में आरोपी को हिरासत में रखने का कोई उद्देश्य नहीं है। राज्य की ओर से जमानत याचिका का विरोध किया गया।
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अदालत को आरोपी का पूर्व आपराधिक इतिहास नहीं मिला। अदालत ने माना कि बरामदगी की मात्रा और मामले की परिस्थितियों को देखते हुए इस स्तर पर एनडीपीएस एक्ट की धारा 37 की कठोर शर्तें लागू नहीं होतीं। अदालत ने आरोपी को हर माह पुलिस थाने में हाजिरी लगाने, जांच में सहयोग करने और अदालत की प्रत्येक तारीख पर पेश होने के निर्देश देते हुए रिहा कर दिया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। स्वारघाट थाना क्षेत्र में एचआरटीसी बस से 27.60 ग्राम चिट्टा बरामद होने के मामले में विशेष अदालत बिलासपुर ने आरोपी को जमानत दे दी है। विशेष न्यायाधीश ज्योत्सना सुमंत दधवाल की अदालत ने कहा कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है और आरोपी का कोई आपराधिक इतिहास सामने नहीं आया है। अदालत ने आरोपी को एक लाख रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि के दो जमानती देने की शर्त पर रिहा करने के आदेश दिए हैं।
बीती 26 जुलाई की रात पुलिस ने चौधरी ढाबा के पास आरटीओ बैरियर के नजदीक नाका लगाकर दिल्ली से लेह जा रही एचआरटीसी बस को रोका था। इस दौरान एक यात्री के बैग से 27.60 ग्राम चिट्टा मिलने की बात कही गई थी।
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अदालत में आरोपी की ओर से दलील दी गई कि बरामद मादक पदार्थ व्यावसायिक मात्रा से कम है और मामले की जांच पूरी हो चुकी है। ऐसे में आरोपी को हिरासत में रखने का कोई उद्देश्य नहीं है। राज्य की ओर से जमानत याचिका का विरोध किया गया।
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अदालत को आरोपी का पूर्व आपराधिक इतिहास नहीं मिला। अदालत ने माना कि बरामदगी की मात्रा और मामले की परिस्थितियों को देखते हुए इस स्तर पर एनडीपीएस एक्ट की धारा 37 की कठोर शर्तें लागू नहीं होतीं। अदालत ने आरोपी को हर माह पुलिस थाने में हाजिरी लगाने, जांच में सहयोग करने और अदालत की प्रत्येक तारीख पर पेश होने के निर्देश देते हुए रिहा कर दिया।