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Bilaspur News: एक ऐसा मंदिर जहां सोना चांदी,रुपये नहीं, चढ़ावे में चढ़ता है घास
Thu, 18 Jan 2024 02:03 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Thu, 18 Jan 2024 02:03 AM IST
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-लावारिस पशुओं के चारे के प्रबंध के लिए समाजसेवी ने बनाया था मंदिर
-12 साल से आसपास की पंचायतों के लोग हर दिन श्रद्धा से चढ़ाते हैं चारा
संजीव शामा
घुमारवीं। बिलासपुर। देवभूमि हिमाचल में बहुत सारे देवी-देवताओं के कई मंदिर हैं, जहां भक्त पूर्ण श्रद्धा से मंदिरों में दर्शन कर दान देते हैं। लेकिन बिलासपुर में एक मंदिर ऐसा भी है जहां चढ़ावे में सोना चांदी, पैसा व प्रसाद नहीं चढ़ता बल्कि भक्त अपनी श्रद्धा से पशुओं का चारा चढ़ाते हैं। जी हां यह बिलासपुर के भगेड़ में नंदीश्वर महादेव मंदिर है।
प्रतिदिन इस मंदिर में कई लोग इस तरह दान करने के लिए आते हैं। लोगों में मान्यता है कि मंदिर में घास चढ़ाने से व्यक्ति की मनोकामनाएं पूरी होती है। मंदिर में घायल गोवंश की पूजा होती है और इसके साथ ही इलाज भी किया जाता है। बिलासपुर के कोसरियां से संबंध रखने वाले समाजसेवी सुनील शर्मा ने सड़कों में घूम रहे लावारिस पशुओं को आश्रय देने के लिए भगेड़ में एक घायल गोवंश के लिए गोशाला का निर्माण किया। जहां वह सड़क दुर्घटना में घायल पशुओं की सेवा करते हैं। वहीं मंदिरों में प्रसाद व सोना चांदी चढ़ावे की परंपरा को देखते हुए सुनील शर्मा ने स्थानीय ग्रामीणों की मदद से गोशाला के साथ ही नंदेश्वर महादेव मंदिर का निर्माण करवाया। इस मंदिर में सोना, चांदी, पैसा चढ़ाने के बजाय इन लावारिस पशुओं के लिए चारा चढ़ाने की प्रथा शुरू की। ''एक पुल्ला घास का'' मंदिर में चढ़ाने की इस प्रथा को स्थानीय ग्रामीणों ने काफी सराहा।
अब रोजाना आस पास की पंचायत के लोग पशुओं के लिए घास का पुल्ला व चारा लेकर आते हैं। पहले भगवान शिव के समक्ष यह चारा चढ़ाने के बाद ही नंदी स्वरूप गोवंश को यह चारा खाने को देते हैं। प्रगति समाज सेवा समिति के संस्थापक सुनील शर्मा ने कहा कि 12 साल से चली आ रही इस पुरानी प्रथा से जहां भगवान को चढ़ने वाला प्रसाद रूपी चारा सीधे पशुओं को मिलता है, साथ ही काफी संख्या में स्थानीय लोग इस प्रथा से जुड़ते जा रहे हैं। वहीं स्थानीय ग्रामीणों ने इस प्रथा की तारीफ करते हुए बेसहारा पशुओं को चारा देने से उन्हें आत्मिक शांति मिलने की बात कही।
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-12 साल से आसपास की पंचायतों के लोग हर दिन श्रद्धा से चढ़ाते हैं चारा
संजीव शामा
घुमारवीं। बिलासपुर। देवभूमि हिमाचल में बहुत सारे देवी-देवताओं के कई मंदिर हैं, जहां भक्त पूर्ण श्रद्धा से मंदिरों में दर्शन कर दान देते हैं। लेकिन बिलासपुर में एक मंदिर ऐसा भी है जहां चढ़ावे में सोना चांदी, पैसा व प्रसाद नहीं चढ़ता बल्कि भक्त अपनी श्रद्धा से पशुओं का चारा चढ़ाते हैं। जी हां यह बिलासपुर के भगेड़ में नंदीश्वर महादेव मंदिर है।
प्रतिदिन इस मंदिर में कई लोग इस तरह दान करने के लिए आते हैं। लोगों में मान्यता है कि मंदिर में घास चढ़ाने से व्यक्ति की मनोकामनाएं पूरी होती है। मंदिर में घायल गोवंश की पूजा होती है और इसके साथ ही इलाज भी किया जाता है। बिलासपुर के कोसरियां से संबंध रखने वाले समाजसेवी सुनील शर्मा ने सड़कों में घूम रहे लावारिस पशुओं को आश्रय देने के लिए भगेड़ में एक घायल गोवंश के लिए गोशाला का निर्माण किया। जहां वह सड़क दुर्घटना में घायल पशुओं की सेवा करते हैं। वहीं मंदिरों में प्रसाद व सोना चांदी चढ़ावे की परंपरा को देखते हुए सुनील शर्मा ने स्थानीय ग्रामीणों की मदद से गोशाला के साथ ही नंदेश्वर महादेव मंदिर का निर्माण करवाया। इस मंदिर में सोना, चांदी, पैसा चढ़ाने के बजाय इन लावारिस पशुओं के लिए चारा चढ़ाने की प्रथा शुरू की। ''एक पुल्ला घास का'' मंदिर में चढ़ाने की इस प्रथा को स्थानीय ग्रामीणों ने काफी सराहा।
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अब रोजाना आस पास की पंचायत के लोग पशुओं के लिए घास का पुल्ला व चारा लेकर आते हैं। पहले भगवान शिव के समक्ष यह चारा चढ़ाने के बाद ही नंदी स्वरूप गोवंश को यह चारा खाने को देते हैं। प्रगति समाज सेवा समिति के संस्थापक सुनील शर्मा ने कहा कि 12 साल से चली आ रही इस पुरानी प्रथा से जहां भगवान को चढ़ने वाला प्रसाद रूपी चारा सीधे पशुओं को मिलता है, साथ ही काफी संख्या में स्थानीय लोग इस प्रथा से जुड़ते जा रहे हैं। वहीं स्थानीय ग्रामीणों ने इस प्रथा की तारीफ करते हुए बेसहारा पशुओं को चारा देने से उन्हें आत्मिक शांति मिलने की बात कही।
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