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अधिकारियों के पास नहीं बाहर से आने वाले प्रवासी श्रमिकों का ब्योरा
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अमर उजाला ब्यूरो
बिलासपुर। बिलासपुर में बाहरी राज्यों से आकर कार्य कर रहे प्रवासी श्रमिकों का कोई भी ब्योरा न तो श्रम अधिकारी मंडी, न राज्य प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड बिलासपुर और न ही चंडीगढ़ स्थित असिस्टेंट लेेबर कमिश्नर सेंट्रल केंद्रीय सदन के पास है, जिससे यहां पर कार्य करने वाले प्रवासी श्रमिकों का सही आंकड़ा पता चल सके। ऐसे में इन प्रवासी श्रमिकों के कारण जिला के लोगों को तरह-तरह की भयंकर बीमारियों के होने का खतरा पहले से काफी ज्यादा बढ़ गया है।
गौरतलब है कि फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति के महासचिव मदन लाल शर्मा ने इस संदर्भ में विभिन्न अधिकारियों से जानकारी मांगी थी, लेकिन कहीं से भी उन्हें इसका जवाब नहीं मिल पाया।
सोचनीय पहलू यह है कि इस बारे में चंडीगढ़ स्थित लेबर कमिश्नर सेंट्रल के पास भी यह ब्योरा नहीं है जिसके बारे में अब फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति प्रथम अपीलीय अधिकारी चंडीगढ़ के समक्ष नियमानुसार अपील दायर करेंगे।
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उल्लेखनीय है कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की ओर से चार सदस्यीय गठित कमेटी ने अवैध मक डंपिंग के दौरे के दौरान पर्यावरण को हो रहे नुकसान का जायजा लिया था, उस समय यह वाक्या सामने आया था कि बाहरी राज्यों से आए श्रमिकों को शिविरों में किन नियमों के आधार पर रखा गया है, क्या इन प्रवासी श्रमिकों का नियमानुसार मेडिकल हुआ या नहीं, टीम की अगुवाई कर रहे डायरेक्टर ने इसे नियमों के विरुद्ध बताया था और गांव मैहला के बीच में स्थापित किए इस शिविर को तुरंत उठाने के आदेश भी जारी किये थे।
वहीं दूसरी ओर जिला में बाहरी राज्यों से आए श्रमिकों की ओर से होटलों, ढाबों में बड़ी तादाद में बिना मेडिकल के कार्य करवाया जा रहा है जिससे महामारी जैसी बीमारियों के फैलने का खतरा भी हो सकता है। समिति ने मांग की है कि प्रशासन को ऐसे मामलों में कड़ा संज्ञान लेना चाहिए ताकि लोगों की जान को बचाया जा सके।
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बिलासपुर। बिलासपुर में बाहरी राज्यों से आकर कार्य कर रहे प्रवासी श्रमिकों का कोई भी ब्योरा न तो श्रम अधिकारी मंडी, न राज्य प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड बिलासपुर और न ही चंडीगढ़ स्थित असिस्टेंट लेेबर कमिश्नर सेंट्रल केंद्रीय सदन के पास है, जिससे यहां पर कार्य करने वाले प्रवासी श्रमिकों का सही आंकड़ा पता चल सके। ऐसे में इन प्रवासी श्रमिकों के कारण जिला के लोगों को तरह-तरह की भयंकर बीमारियों के होने का खतरा पहले से काफी ज्यादा बढ़ गया है।
गौरतलब है कि फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति के महासचिव मदन लाल शर्मा ने इस संदर्भ में विभिन्न अधिकारियों से जानकारी मांगी थी, लेकिन कहीं से भी उन्हें इसका जवाब नहीं मिल पाया।
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सोचनीय पहलू यह है कि इस बारे में चंडीगढ़ स्थित लेबर कमिश्नर सेंट्रल के पास भी यह ब्योरा नहीं है जिसके बारे में अब फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति प्रथम अपीलीय अधिकारी चंडीगढ़ के समक्ष नियमानुसार अपील दायर करेंगे।
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उल्लेखनीय है कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की ओर से चार सदस्यीय गठित कमेटी ने अवैध मक डंपिंग के दौरे के दौरान पर्यावरण को हो रहे नुकसान का जायजा लिया था, उस समय यह वाक्या सामने आया था कि बाहरी राज्यों से आए श्रमिकों को शिविरों में किन नियमों के आधार पर रखा गया है, क्या इन प्रवासी श्रमिकों का नियमानुसार मेडिकल हुआ या नहीं, टीम की अगुवाई कर रहे डायरेक्टर ने इसे नियमों के विरुद्ध बताया था और गांव मैहला के बीच में स्थापित किए इस शिविर को तुरंत उठाने के आदेश भी जारी किये थे।
वहीं दूसरी ओर जिला में बाहरी राज्यों से आए श्रमिकों की ओर से होटलों, ढाबों में बड़ी तादाद में बिना मेडिकल के कार्य करवाया जा रहा है जिससे महामारी जैसी बीमारियों के फैलने का खतरा भी हो सकता है। समिति ने मांग की है कि प्रशासन को ऐसे मामलों में कड़ा संज्ञान लेना चाहिए ताकि लोगों की जान को बचाया जा सके।
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