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बिलासपुर में पहली बार हुई सतलुज आरती, गवाह बने सैकड़ों लोग
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river beas kullu
अमर उजाला ब्यूरो
बिलासपुर। कहलूर रियासत के समय होने वाली सतलुज आरती अब एक बार फिर से विधिवत रूप से शुरू हो गई। यह आरती लगभग कई दशकों के बाद शुरू हुई है। इस आरती को अंतिम रूप देने के लिए प्रशासनिक अधिकारी समेत कहलूर रियासत के अंतिम राजा स्व. आनंद चंद की पुत्री सुनंदा चंद विशेष रूप से उपस्थित रहीं।
सतलुज आरती शनिवार को रंगनाथ मंदिर के समीप नाले के नौण में आयोजित की गई। आरती शुरू होने से पहले प्रशासनिक अधिकारी एडीएम श्रवण मांटा सहित एसडीएम प्रियंका वर्मा ने पूजा अर्चना की। पूजा-अर्चना में पहले सतलुज नदी से पानी भर के गणेश पूजा की गई। इसी के साथ गुरु गोबिंद सिंह जी के नाम से प्रचलित यह गोबिंदसागर झील के लिए हवन भी किया गया जिसमें बिलासपुर शहर के लोगों सहित अधिकारियों ने अपनी आहुतियां डालीं। वही, इस सतलुज आरती को देखने के लिए बिलासपुर के सैकड़ों लोग गवाह भी बनें।
गौरतलब है कि यह आरती रेनबो स्टार क्लब के प्रधान ईशान अख्तर सहित कहलूर सेवा विकास संस्थान के प्रधान सन्नी कुमार के प्रयासों से की गई है। यह आरती शुरू करने के लिए इन समाजसेवी संस्थाओं ने बीड़ा उठाया था जिसे आज पूर्ण रूप से पूरा करके जिला प्रशासन के हवाले भी कर दिया। अंत में सूरज ढलने के उपरांत सतलुज आरती की गई जिसमें लोगों सहित अधिकारियों ने सतलुज आरती की और यहां पौराणिक मंदिरों और बिलासपुर के रियासत के राजाओं को याद करके एक नई शुरूआत को सफल बनाया। इस मौके पर सैकड़ों लोगों ने भाग लिया।
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इनसेट...
राजकुमारी सुनंदा चंद ने किया अपना बचपन याद
कहलूर रियासत के अंतिम राजा आनंद चंद की पुत्री सुनंदा चंद ने ‘अमर उजाला’ से विशेष बातचीत में बताया कि आज सतलुज आरती के उपलक्ष्य में उन्हें अपना बचपन भी याद आ गया। कई दशकों पहले जब उनके पिता राजा स्व. आनंद चंद जीवित हुआ करते थे तो तब यह आयोजन हुआ करता है लेकिन उनके पिता द्वारा शुरू की गई इस रस्म को एक बार फिर से शुरू करना उनके लिए बहुत खुशी की बात है। उन्होंने बिलासपुर की समस्त जनता से इस अवसर को फिर से शुरू करने के लिए धन्यवाद भी किया है।
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बिलासपुर। कहलूर रियासत के समय होने वाली सतलुज आरती अब एक बार फिर से विधिवत रूप से शुरू हो गई। यह आरती लगभग कई दशकों के बाद शुरू हुई है। इस आरती को अंतिम रूप देने के लिए प्रशासनिक अधिकारी समेत कहलूर रियासत के अंतिम राजा स्व. आनंद चंद की पुत्री सुनंदा चंद विशेष रूप से उपस्थित रहीं।
सतलुज आरती शनिवार को रंगनाथ मंदिर के समीप नाले के नौण में आयोजित की गई। आरती शुरू होने से पहले प्रशासनिक अधिकारी एडीएम श्रवण मांटा सहित एसडीएम प्रियंका वर्मा ने पूजा अर्चना की। पूजा-अर्चना में पहले सतलुज नदी से पानी भर के गणेश पूजा की गई। इसी के साथ गुरु गोबिंद सिंह जी के नाम से प्रचलित यह गोबिंदसागर झील के लिए हवन भी किया गया जिसमें बिलासपुर शहर के लोगों सहित अधिकारियों ने अपनी आहुतियां डालीं। वही, इस सतलुज आरती को देखने के लिए बिलासपुर के सैकड़ों लोग गवाह भी बनें।
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गौरतलब है कि यह आरती रेनबो स्टार क्लब के प्रधान ईशान अख्तर सहित कहलूर सेवा विकास संस्थान के प्रधान सन्नी कुमार के प्रयासों से की गई है। यह आरती शुरू करने के लिए इन समाजसेवी संस्थाओं ने बीड़ा उठाया था जिसे आज पूर्ण रूप से पूरा करके जिला प्रशासन के हवाले भी कर दिया। अंत में सूरज ढलने के उपरांत सतलुज आरती की गई जिसमें लोगों सहित अधिकारियों ने सतलुज आरती की और यहां पौराणिक मंदिरों और बिलासपुर के रियासत के राजाओं को याद करके एक नई शुरूआत को सफल बनाया। इस मौके पर सैकड़ों लोगों ने भाग लिया।
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राजकुमारी सुनंदा चंद ने किया अपना बचपन याद
कहलूर रियासत के अंतिम राजा आनंद चंद की पुत्री सुनंदा चंद ने ‘अमर उजाला’ से विशेष बातचीत में बताया कि आज सतलुज आरती के उपलक्ष्य में उन्हें अपना बचपन भी याद आ गया। कई दशकों पहले जब उनके पिता राजा स्व. आनंद चंद जीवित हुआ करते थे तो तब यह आयोजन हुआ करता है लेकिन उनके पिता द्वारा शुरू की गई इस रस्म को एक बार फिर से शुरू करना उनके लिए बहुत खुशी की बात है। उन्होंने बिलासपुर की समस्त जनता से इस अवसर को फिर से शुरू करने के लिए धन्यवाद भी किया है।
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