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पुरानी पेंशन बहाली के लिए दिल्ली रवाना हुए कर्मचारी
Updated Sun, 25 Nov 2018 11:03 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
बरमाणा (बिलासपुर)। नई पेंशन नीति कर्मचारी महासंघ हिमाचल प्रदेश के बैनर तले जिला बिलासपुर के कर्मचारी 25 नवंबर को दिल्ली के लिए रवाना हो गए जिसमें हिमाचल के लगभग सभी विभागों के 10 हजार कर्मचारी हिस्सा लेंगे।
कर्मचारी केंद्र सरकार की ओर से लागू राष्ट्रीय पेंशन नीति का विरोध कर रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि नई पेंशन नीति में कर्मचारियों के लिए कुछ भी नहीं है, यह पेंशन नीति शेयर बाजार को फायदा देने के लिए बनाई गई है जिसमें कर्मचारियों के वेतन से मूल वेतन व महंगाई भत्ते का 10 प्रतिशत हिस्सा काटा जाता है। इतना ही हिस्सा प्रदेश सरकार द्वारा भी जोड़कर एनएसडीएल कंपनी के खाते में ट्रांसफर कर दिया जाता है जोकि हिमाचल प्रदेश के करदाताओं का कमाया हुआ धन है जिसे प्राइवेट कंपनी में डालने का प्रदेश सरकार के पास कोई हक नहीं है। कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें यह राष्ट्रीय पेंशन नीति स्वीकार नहीं है।
जब भी एक कर्मचारी 58 वर्ष की आयु में रिटायर होता है तो उसे रिटायरमेंट के बाद कुछ भी नहीं मिलता। कर्मचारी को इस पैसे का मात्र 60 प्रतिशत उसकी आयु 60 वर्ष होने पर प्राप्त हो पाता है। उसे इस पैसे पर भी कर देना पड़ता है जोकि न्याय संगत नहीं है। राष्ट्रीय पेंशन नीति में कर्मचारी की पेंशन पूर्ण रूप से बाजार पर निर्भर करती है। इसके अंतर्गत लगभग 50 हजार पर सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारी को लगभग 1 हजार ही पेंशन लग पाती है।
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कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने इससे पहले 28 अक्तूबर को प्रत्येक सांसद के आवास या कार्यालय पर एक दिन का सांकेतिक उपवास रखा था, जिस पर विभिन्न सांसदों ने उनकी मांग को सरकारों तक पहुंचाने का वादा किया था। यदि केंद्र सरकार शीघ्र पुरानी पेंशन बहाली पर कोई निर्णय नहीं लेती तो 26 नवंबर को नई दिल्ली में जंतर-मंतर से संसद भवन तक रोषपूर्ण मार्च किया जाएगा। इसी कारण कर्मचारी दिल्ली में जंतर मंतर पर धरने के लिए जा रहे हैं।
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बरमाणा (बिलासपुर)। नई पेंशन नीति कर्मचारी महासंघ हिमाचल प्रदेश के बैनर तले जिला बिलासपुर के कर्मचारी 25 नवंबर को दिल्ली के लिए रवाना हो गए जिसमें हिमाचल के लगभग सभी विभागों के 10 हजार कर्मचारी हिस्सा लेंगे।
कर्मचारी केंद्र सरकार की ओर से लागू राष्ट्रीय पेंशन नीति का विरोध कर रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि नई पेंशन नीति में कर्मचारियों के लिए कुछ भी नहीं है, यह पेंशन नीति शेयर बाजार को फायदा देने के लिए बनाई गई है जिसमें कर्मचारियों के वेतन से मूल वेतन व महंगाई भत्ते का 10 प्रतिशत हिस्सा काटा जाता है। इतना ही हिस्सा प्रदेश सरकार द्वारा भी जोड़कर एनएसडीएल कंपनी के खाते में ट्रांसफर कर दिया जाता है जोकि हिमाचल प्रदेश के करदाताओं का कमाया हुआ धन है जिसे प्राइवेट कंपनी में डालने का प्रदेश सरकार के पास कोई हक नहीं है। कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें यह राष्ट्रीय पेंशन नीति स्वीकार नहीं है।
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जब भी एक कर्मचारी 58 वर्ष की आयु में रिटायर होता है तो उसे रिटायरमेंट के बाद कुछ भी नहीं मिलता। कर्मचारी को इस पैसे का मात्र 60 प्रतिशत उसकी आयु 60 वर्ष होने पर प्राप्त हो पाता है। उसे इस पैसे पर भी कर देना पड़ता है जोकि न्याय संगत नहीं है। राष्ट्रीय पेंशन नीति में कर्मचारी की पेंशन पूर्ण रूप से बाजार पर निर्भर करती है। इसके अंतर्गत लगभग 50 हजार पर सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारी को लगभग 1 हजार ही पेंशन लग पाती है।
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कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने इससे पहले 28 अक्तूबर को प्रत्येक सांसद के आवास या कार्यालय पर एक दिन का सांकेतिक उपवास रखा था, जिस पर विभिन्न सांसदों ने उनकी मांग को सरकारों तक पहुंचाने का वादा किया था। यदि केंद्र सरकार शीघ्र पुरानी पेंशन बहाली पर कोई निर्णय नहीं लेती तो 26 नवंबर को नई दिल्ली में जंतर-मंतर से संसद भवन तक रोषपूर्ण मार्च किया जाएगा। इसी कारण कर्मचारी दिल्ली में जंतर मंतर पर धरने के लिए जा रहे हैं।