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जमीन अधिग्रहण के नाम पर फोरलेन विस्थापितों से धोखा

Thu, 24 May 2018 10:36 PM IST
Updated Thu, 24 May 2018 10:36 PM IST
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जमीन अधिग्रहण के नाम पर फोरलेन विस्थापितों से धोखा
Tension - फोटो : demo pics

अमर उजाला ब्यूरो

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बिलासपुर। फोरलेन निर्माण के लिए हुए जमीन अधिग्रहण के नाम पर प्रभावितों के साथ बड़ा धोखा हुआ है। इसका खुलासा हाल ही है एनजीटी में कंपनी के दायर शपथपत्र से हुआ है। इसमें कंपनी ने कहा था कि उन्होंने रोड अलाइनमेंट के तहत जमीन का अधिग्रहण किया है जबकि प्रशासन ने भूमि अधिग्रहण प्लान के तहत जमीन का अधिग्रहण किया और इसके तहत ही प्रभावितों मुआवजा भी दिया गया है। इससे साफ है कि प्रभावितों की अधिक जमीन का अधिग्रहण हुआ है जबकि मुआवजा कम जमीन का मिला है। इस तरह से किरपुर-नैरचौक फोरलेन के तहत 62 गांव के लोगों से भूमि अधिग्रहण के नाम पर अधिक जमीन लेकर कम मुआवजा दिया गया है।

इससे हजारों लोग प्रभावित हुए हैं। इसके साथ ही आरटीआई से ली गई जानकारी में कंपनी और भू-अर्जन अधिकारी की जानकारियां आपस में मेल नहीं खा रही है। फोरलेन विस्थापित समिति ने इस संबंध में यह खुलासा होने के बाद डीसी को शिकायत कर संबंधित अधिकारियों के कार्रवाई की मांग की है। फोरलेन निर्माण को लेकर भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया मामले में चार विभागों की अलग अलग तर्क हैं। सभी विभाग अपने-अपने स्तर पर जानकारियां विस्थापितों को मुहैया करवा रहे हैं। इसमें एनएचएआई परियोजना निदेशक का कहना है कि उनके पास जानकारी नहीं है, वहीं भूमि अधिग्रहण की विशेष इकाई मुख्यालय बिलासपुर ने भूमि अधिग्रहण प्लान के आधार पर भूमि अधिग्रहण की पुष्टि की है। जबकि भूमि अधिग्रहण रोड अलाइनमेंट के आधार पर किया गया है।
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इसका खुलासा सड़क निर्माण कर रही कंपनी केएनसीईएल (आईटीएनएल) के परियोजना निदेशक ने एनजीटी में दिए गए शपथ पत्र से हुआ है। इससे पता चला है कि विभागों में चल रहे घालमेल के कारण लोगों की अधिक जमीन का अधिग्रहण करने के बाद कम जमीन का मुआवजा मिला है। वहीं फोरलेन विस्थापितों एवं प्रभावित समिति ने उपायुक्त बिलासपुर से विभागों के अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है। समिति ने कहा कि अगर उनके लगाए आरोप में कोई शक प्रशासन को है तो रोड अलाइनमेंट को भूमि अधिग्रहण प्लान के ऊपर ओवर लैप कर जानकारी मुहैया करवाई जाए इससे पूरी स्थिति साफ हो जाएगी।
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जानकारी के अनुसार एनएचएआई के परियोजना निदेशक के कार्यालय से 13 अप्रैल को जारी पत्र के माध्यम से 2018 भू-अर्जन अधिकारी कविता ठाकुर के कार्यालय को इस संबंध में सूचना मुहैया करवाने को कहा। जबकि एनएचआई आरओ शिमला ने कार्यालय के पत्र दिनांक 9.5.2018 में कहा कि सूचना वेबसाइट से प्राप्त करें। इसके बाद भू-अर्जन अधिकारी कविता ठाकुर ने कार्यालय के पत्र के माध्यम से बताया कि भूमि अधिग्रहण भूमि अधिग्रहण प्लान के अनुसार किया जा रहा है।


समिति के उपप्रधान राकेश, चिंता देवी, कोषाध्यक्ष श्रवण कुमार, महासचिव मदन लाल शर्मा, सदस्य जगदीश राम, सीताराम और सुभाष चंद ने इस संबंध में उपायुक्त की शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की है। इस संबंध में भू-अर्जन अधिकारी एवं एसी टू डीसी कविता ठाकुर का कहना है कि अगर इस प्रकार की कोई बात है कि व्यक्ति का अधिकार है कि वह न्याय की मांग कर सकता है। इस बारे में अलग एजेंसी से भी जांच करवाई जा सकती है।

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