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बिलासपुर में नहीं बनेगा मिनी सचिवालय
Updated Sun, 24 Dec 2017 10:41 PM IST
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बिलासपुर। बिलासपुर में बनने वाला मिनी सचिवालय प्रदेश की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के चलते रिजेक्ट हो गया है। लोक निर्माण विभाग द्वारा मिनी सचिवालय की फाइल तैयार कर शिमला जीएडीए को भेजी गई थी। लेकिन, वहां से फाइल रिजेक्ट होकर वापस आ गई है। मिनी सचिवालय को बनाने व पुरानी इमारत को गिराने में करीब 62 करोड़ का खर्चा लोनिवि ने बताया था। लेकिन, प्रदेश की वित्तीय स्थिति कमजोर होने के कारण इतना बड़ा बजट जीएडीए की ओर से मंजूर नहीं किया गया। इसके बाद फाइन को वापस भेज दिया गया है। अब यहां पर बनने वाला मिनी सचिवालय अधर में लटक गया है।
प्रदेश में कांग्रेस सरकार बनने के बाद 2013 में बिलासपुर दौरे के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने उपायुक्त कार्यालय के पास मिली सचिवालय बनाने की घोषणा की थी। सीएम ने उपायुक्त बिलासपुर को इस बाबत निर्देश दिए थे कि वह सचिवालय से संबंधित फाइल तैयार कर शिमला भेजे। इसकेे बाद उपायुक्त ने लोनिवि को निर्देश दिए। लोनिवि ने पुरानी बिल्डिंग गिराने से लेकर नया भवन बनाने का पूरा आंकलन तैयार कर शिमला भेजा। इसके साथ ड्राइंग भी भेजी गई। विभाग ने पूरे प्रोजेक्ट के तैयार होने में करीब 62 करोड़ के खर्च का ब्यौरा भेजा था। लेकिन, जीएडीए ने भारी भरकम बजट व प्रदेश की आर्थिक स्थिति खराब होने के चलते मिनी सचिवालय का प्रोजेक्ट रिजेक्ट कर दिया है।
मिनी सचिवालय के बनने से बिलासपुर के लोगों को काफी सुविधाएं मिलनी थीं। यहां पर हर विभाग के सहसचिव लेवल के अधिकारी बैठाए जाने थे। जिस कार्य के लिए लोगों को मंडी या शिमला जाना पड़ता है वह यहीं पर हो जाने थे। बिलासपुर की चोरों विधानसभाओं के हिसाब से यहां पर अलग-अलग अधिकारी बैठने थे। इसके अलावा डिविजनल कमिश्नर को भी कुछ समय के लिए यहां पर बैठना पड़ना था। लेकिन अब फाइल के रिजेक्ट होने से लोगों को यह सुविधा नहीं मिलेगी।
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62 करोड़ का बनाया गया था अस्टिमेट : पराशर
लोक निर्माण विभाग डिविजन एक के एक्सईएन वीएन पराशर का कहना है कि मिनी सचिवालय से संबंधित फाइल को तैयार कर शिमला भेजा गया था। इसमें सचिवालय की ड्राइंग से लेकर बजट का ब्यौरा भी भेजा गया था। करीब 62 करोड़ का अस्टिमेट बनाया गया था। लेकिन बजट ज्यादा होने से जीएडीए ने इसको मंजूरी नहीं दी है।
बजट ज्यादा होने के चलते शिमला से फाइल लौटाई : उपायुक्त
उपायुक्त बिलासपुर ऋग्वेद ठाकुर का कहना है कि तत्कालीन सीएम वीरभद्र सिंह की घोषणा के बाद मिनी सचिवालय से संबंधित फाइल को तैयार कर शिमला भेजा गया था। लेकिन वहां से फाइल वापस आ गई है। बजट ज्यादा होने से इसे वापस भेजा गया है।
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प्रदेश में कांग्रेस सरकार बनने के बाद 2013 में बिलासपुर दौरे के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने उपायुक्त कार्यालय के पास मिली सचिवालय बनाने की घोषणा की थी। सीएम ने उपायुक्त बिलासपुर को इस बाबत निर्देश दिए थे कि वह सचिवालय से संबंधित फाइल तैयार कर शिमला भेजे। इसकेे बाद उपायुक्त ने लोनिवि को निर्देश दिए। लोनिवि ने पुरानी बिल्डिंग गिराने से लेकर नया भवन बनाने का पूरा आंकलन तैयार कर शिमला भेजा। इसके साथ ड्राइंग भी भेजी गई। विभाग ने पूरे प्रोजेक्ट के तैयार होने में करीब 62 करोड़ के खर्च का ब्यौरा भेजा था। लेकिन, जीएडीए ने भारी भरकम बजट व प्रदेश की आर्थिक स्थिति खराब होने के चलते मिनी सचिवालय का प्रोजेक्ट रिजेक्ट कर दिया है।
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मिनी सचिवालय के बनने से बिलासपुर के लोगों को काफी सुविधाएं मिलनी थीं। यहां पर हर विभाग के सहसचिव लेवल के अधिकारी बैठाए जाने थे। जिस कार्य के लिए लोगों को मंडी या शिमला जाना पड़ता है वह यहीं पर हो जाने थे। बिलासपुर की चोरों विधानसभाओं के हिसाब से यहां पर अलग-अलग अधिकारी बैठने थे। इसके अलावा डिविजनल कमिश्नर को भी कुछ समय के लिए यहां पर बैठना पड़ना था। लेकिन अब फाइल के रिजेक्ट होने से लोगों को यह सुविधा नहीं मिलेगी।
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62 करोड़ का बनाया गया था अस्टिमेट : पराशर
लोक निर्माण विभाग डिविजन एक के एक्सईएन वीएन पराशर का कहना है कि मिनी सचिवालय से संबंधित फाइल को तैयार कर शिमला भेजा गया था। इसमें सचिवालय की ड्राइंग से लेकर बजट का ब्यौरा भी भेजा गया था। करीब 62 करोड़ का अस्टिमेट बनाया गया था। लेकिन बजट ज्यादा होने से जीएडीए ने इसको मंजूरी नहीं दी है।
बजट ज्यादा होने के चलते शिमला से फाइल लौटाई : उपायुक्त
उपायुक्त बिलासपुर ऋग्वेद ठाकुर का कहना है कि तत्कालीन सीएम वीरभद्र सिंह की घोषणा के बाद मिनी सचिवालय से संबंधित फाइल को तैयार कर शिमला भेजा गया था। लेकिन वहां से फाइल वापस आ गई है। बजट ज्यादा होने से इसे वापस भेजा गया है।