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बागठेडू में मकान गिरना बना अब गले की फांस
Updated Sun, 07 Oct 2018 08:16 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
बिलासपुर। कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन निर्माण के नाम पर मार्च महीने में बागठेडू में तीन मकान गिराये जाने का मामला अब राजस्व विभाग की गले की फांस बनते जा रहा है। राजस्व विभाग का कोई भी अधिकारी यह नहीं बता पा रहा है कि उक्त तीन मकान किस आधार पर गिराये गए हैं। वहीं अब राज्य सरकार से मिले आदेश के बाद एसडीएम घुमारवीं ने आदेश देकर तीन दिन में क्षेत्रीय कानूनगो रोहिण और जनसूचना अधिकारी घुमारवीं को सात दिन के अंदर पूरे मामले की रिपोर्ट देने को कहा गया है।
रिपोर्ट सात बिंदुओं पर देनी होगी जिसमें बताना होगा की क्या हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार मौका पर कब्जा लिया गया, नियम अनुसार निशानदेही की गई या नहीं, तत्काल सुनवाई के लिए दिए गए आवेदन पर सुनवाई की या नहीं, परियोजना निदेशक ने किस आधार पर लाइनमेंट को बदला, कंपनी द्वारा एनजीटी में दिए शपथ पत्र के अनुसार 45 मीटर जगह का अधिग्रहण किया है या अधिक का, आईआरसी की गाइड लाइन का पालन किया गया और नौ और चार कर्मकान एसडीएम के आदेश के अनुसार दर्ज किया गया या नहीं।
इस संबंध में अब मौके पर गए कानूनगो और जनसूचना अधिकारी को प्रार्थी मदन लाल शर्मा को पूरा जानकारी देनी होगी। वहीं एसडीएम के आदेश उक्त अधिकारियों के लिए गले की फांस बन गए हैं क्योंकि सोमवार को तय समय पूरा होने जा रहा है लेकिन अभी तक अधिकारियों को यह समझ नहीं आ रहा है की इस मामले में क्या जानकारी दें।
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उल्लेखनीय है कि हाईकोर्ट के आदेशों के हवाला देते हुए राजस्व विभाग ने मदन लाल शर्मा, निर्मला देवी और रामपाल के मकानों को गिरा दिया था। हालांकि कार्रवाई से पूर्व उक्त लोगों ने तथ्यों सहित एक प्रार्थना पत्र दिया था जिसमें कहा गया था कि उनके घर न तो फोरलेन रोड अलाइनमेंट प्लान, भूमि अधिग्रहण प्लान, निशानदेही, आईआरसी की गाइड लाइन में नहीं आते हैं। इसलिए किसी भी कार्रवाई से पूर्व निशानदेही कर यह तय कर लिया जाएगा कि उनके मकान वास्तव में फोरलेन निर्माण में आते हैं या नहीं क्योंकि हाईकोर्ट ने अपने आदेश में नियम अनुसार कार्रवाई के आदेश दिए थे। इसके तहत पहले निशानदेही जरूरी थी। एसडीएम शशी पाल शर्मा ने बताया कि दस दिन के अंदर जनसूचना अधिकारी को सूचना देने के आदेश दिए गए हैं।
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बिलासपुर। कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन निर्माण के नाम पर मार्च महीने में बागठेडू में तीन मकान गिराये जाने का मामला अब राजस्व विभाग की गले की फांस बनते जा रहा है। राजस्व विभाग का कोई भी अधिकारी यह नहीं बता पा रहा है कि उक्त तीन मकान किस आधार पर गिराये गए हैं। वहीं अब राज्य सरकार से मिले आदेश के बाद एसडीएम घुमारवीं ने आदेश देकर तीन दिन में क्षेत्रीय कानूनगो रोहिण और जनसूचना अधिकारी घुमारवीं को सात दिन के अंदर पूरे मामले की रिपोर्ट देने को कहा गया है।
रिपोर्ट सात बिंदुओं पर देनी होगी जिसमें बताना होगा की क्या हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार मौका पर कब्जा लिया गया, नियम अनुसार निशानदेही की गई या नहीं, तत्काल सुनवाई के लिए दिए गए आवेदन पर सुनवाई की या नहीं, परियोजना निदेशक ने किस आधार पर लाइनमेंट को बदला, कंपनी द्वारा एनजीटी में दिए शपथ पत्र के अनुसार 45 मीटर जगह का अधिग्रहण किया है या अधिक का, आईआरसी की गाइड लाइन का पालन किया गया और नौ और चार कर्मकान एसडीएम के आदेश के अनुसार दर्ज किया गया या नहीं।
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इस संबंध में अब मौके पर गए कानूनगो और जनसूचना अधिकारी को प्रार्थी मदन लाल शर्मा को पूरा जानकारी देनी होगी। वहीं एसडीएम के आदेश उक्त अधिकारियों के लिए गले की फांस बन गए हैं क्योंकि सोमवार को तय समय पूरा होने जा रहा है लेकिन अभी तक अधिकारियों को यह समझ नहीं आ रहा है की इस मामले में क्या जानकारी दें।
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उल्लेखनीय है कि हाईकोर्ट के आदेशों के हवाला देते हुए राजस्व विभाग ने मदन लाल शर्मा, निर्मला देवी और रामपाल के मकानों को गिरा दिया था। हालांकि कार्रवाई से पूर्व उक्त लोगों ने तथ्यों सहित एक प्रार्थना पत्र दिया था जिसमें कहा गया था कि उनके घर न तो फोरलेन रोड अलाइनमेंट प्लान, भूमि अधिग्रहण प्लान, निशानदेही, आईआरसी की गाइड लाइन में नहीं आते हैं। इसलिए किसी भी कार्रवाई से पूर्व निशानदेही कर यह तय कर लिया जाएगा कि उनके मकान वास्तव में फोरलेन निर्माण में आते हैं या नहीं क्योंकि हाईकोर्ट ने अपने आदेश में नियम अनुसार कार्रवाई के आदेश दिए थे। इसके तहत पहले निशानदेही जरूरी थी। एसडीएम शशी पाल शर्मा ने बताया कि दस दिन के अंदर जनसूचना अधिकारी को सूचना देने के आदेश दिए गए हैं।