{"_id":"5bcc8bb5bdec226947534a5e","slug":"51540131765-bilaspur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सतलुज में नियमों को ताक में रखकर बहा रहे सीवरेज की गंदगी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सतलुज में नियमों को ताक में रखकर बहा रहे सीवरेज की गंदगी
Updated Sun, 21 Oct 2018 07:52 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमर उजाला ब्यूरो
बिलासपुर। बिलासपुर शहर के एक तरफ से गुजरने वाली सतलुज नदी में सीवरेज की गंदगी बिना ट्रीटमेंट के बहाई जा रही है। बिलासपुर के लुहणू खेल मैदान में तो हालत इससे भी ज्यादा बदतर है। यहां पर सीवरेज पाइप लाइन ब्लाक होने से सीवरेज के गंदे पानी को खुले में विकल्प के तौर पर एक नाली खोद कर सतलुज नदी में मिला दिया गया है। इससे गंदगी बिना ट्रीटमेंट हुए ही सीधे सतलुज नदी में जा रही है।
स्वच्छता के मामले में देश के टॉप 50 जिलों में बिलासपुर को 39 स्थान मिला है लेकिन अभी भी धरातल पर कई कमियां बाकी हैं। जिला में भले ही हर घर में शौचालय निर्माण का दावा किया गया है लेकिन हालत ऐसी है कि बिलासपुर शहर में सीवरेज की पूरी गंदगी गोबिंद सागर में जा रही है। ऐसे ही कई सवाल हैं जो स्वच्छता पर बड़े सवाल खड़े कर रहे हैं।
एनजीटी इस बारे में जिला प्रशासन व नगर परिषद को पहले ही आदेश दे चुकी है कि सतलुज नदी में किसी भी तरह का कचरा न फेंका जाए। शहर की गंदगी जो सीवरेज से निकलती है, उसमें बीबीएमबी की लापरवाही भी सामने आ रही है। यहां पर आईपीएच विभाग द्वारा दो सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाए जाने हैं लेकिन बीबीएमबी से एनओसी न मिल पाने के कारण कार्य आगे नहीं बढ़ पा रहा है। जबकि बजट विभाग के पास मौजूद है। लुहणू खेल मैदान में बन रहे सिंथेटिक ट्रेक को बचाने के लिए सीवरेज की सारी गंदगी एक अस्थायी नाली के जरिए सतलुज नदी में जा रही है। वहीं दूसरी और यहां पर एक जगह अवैध रूप से मिट्टी भी सतलुज नदी में डंप की जा रही है जो सीधे सतलुज नदी में जा रही है। ऐसे में सवाल यह है कि सतलुज नदी को गंदा क्यों किया जा रहा है। जबकि मछलियों की पैदावार साल दर साल कम होती जा रही है।
विज्ञापन
इनसेट....
दो में से एक ट्रीटमेंट प्लांट को मिली है एनओसी
बिलासपुर में दो ट्रीटमेंट प्लांट बनाने की योजना हैं, एक लखनपुर व दूसरा लुहणू खैरियां में बनना है। इनमें से एक ट्रीटमेंट प्लांट को मंजूरी मिल गई है। जबकि दूसरे में जमीन संबंधित खामियां रह जाने से एनओसी नहीं मिल पाई है। वहीं विभाग का कहना है कि दोनों सीवरेज ट्रीटमेंट की एनओसी मिल जाने के बाद ही कार्य शुरू किया जाएगा।
--------------
विज्ञापन
बिलासपुर। बिलासपुर शहर के एक तरफ से गुजरने वाली सतलुज नदी में सीवरेज की गंदगी बिना ट्रीटमेंट के बहाई जा रही है। बिलासपुर के लुहणू खेल मैदान में तो हालत इससे भी ज्यादा बदतर है। यहां पर सीवरेज पाइप लाइन ब्लाक होने से सीवरेज के गंदे पानी को खुले में विकल्प के तौर पर एक नाली खोद कर सतलुज नदी में मिला दिया गया है। इससे गंदगी बिना ट्रीटमेंट हुए ही सीधे सतलुज नदी में जा रही है।
स्वच्छता के मामले में देश के टॉप 50 जिलों में बिलासपुर को 39 स्थान मिला है लेकिन अभी भी धरातल पर कई कमियां बाकी हैं। जिला में भले ही हर घर में शौचालय निर्माण का दावा किया गया है लेकिन हालत ऐसी है कि बिलासपुर शहर में सीवरेज की पूरी गंदगी गोबिंद सागर में जा रही है। ऐसे ही कई सवाल हैं जो स्वच्छता पर बड़े सवाल खड़े कर रहे हैं।
विज्ञापन
एनजीटी इस बारे में जिला प्रशासन व नगर परिषद को पहले ही आदेश दे चुकी है कि सतलुज नदी में किसी भी तरह का कचरा न फेंका जाए। शहर की गंदगी जो सीवरेज से निकलती है, उसमें बीबीएमबी की लापरवाही भी सामने आ रही है। यहां पर आईपीएच विभाग द्वारा दो सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाए जाने हैं लेकिन बीबीएमबी से एनओसी न मिल पाने के कारण कार्य आगे नहीं बढ़ पा रहा है। जबकि बजट विभाग के पास मौजूद है। लुहणू खेल मैदान में बन रहे सिंथेटिक ट्रेक को बचाने के लिए सीवरेज की सारी गंदगी एक अस्थायी नाली के जरिए सतलुज नदी में जा रही है। वहीं दूसरी और यहां पर एक जगह अवैध रूप से मिट्टी भी सतलुज नदी में डंप की जा रही है जो सीधे सतलुज नदी में जा रही है। ऐसे में सवाल यह है कि सतलुज नदी को गंदा क्यों किया जा रहा है। जबकि मछलियों की पैदावार साल दर साल कम होती जा रही है।
विज्ञापन
इनसेट....
दो में से एक ट्रीटमेंट प्लांट को मिली है एनओसी
बिलासपुर में दो ट्रीटमेंट प्लांट बनाने की योजना हैं, एक लखनपुर व दूसरा लुहणू खैरियां में बनना है। इनमें से एक ट्रीटमेंट प्लांट को मंजूरी मिल गई है। जबकि दूसरे में जमीन संबंधित खामियां रह जाने से एनओसी नहीं मिल पाई है। वहीं विभाग का कहना है कि दोनों सीवरेज ट्रीटमेंट की एनओसी मिल जाने के बाद ही कार्य शुरू किया जाएगा।
--------------