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अवैध कब्जे क्यों नहीं हटे 31 को बताएंगें तहसीलदार
Updated Tue, 24 Oct 2017 12:10 AM IST
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बिलासपुर। जिला में अवैध कब्जा धारकों के खिलाफ क्या कार्रवाई की इस संबंध में तहसीलदार 31 अक्तूबर को स्टेटस रिपोर्ट सौंपंगे। हाईकोर्ट ने पूछा है कि अवैध कब्जा धारकों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है। अगर नहीं की है तो क्यों नहीं की गई?
गौर रहे कि 1051 लोगों ने 150 वर्ग मीटर जमीन को नियमित करने के लिए आवेदन कर रखा है। इसमें से 335 को स्वीकृत किया गया है। जबकि अन्य आवेदन कई कारणों से रद्द हो गए हैं। इसके बाद भी अवैध कब्जों को हटाने के संबंध में सरकारी अमला कोई कार्रवाई नहीं कर पाया है। इसके बाद मामला हाईकाई में पहुंचा। हाईकोर्ट ने शहर में अवैध कब्जों को हटाने के आदेश दिए हैं। लेकिन, इसके बाद भी शहर में मात्र गरीब लोगों के कब्जे हटाए जा रहे हैं। लेकिन, रसूखदारों के कब्जे हटाने को लेकर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। एक सरकारी अधिकारी के मानें तो शहर में अधिकांश कब्जे अवैध हैं। लेकिन, सरकारी उदासीनता के कारण हर साल शहर में अवैध कब्जे हो रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि भाखड़ा विस्थापितों को सरकार ने 150 वर्ग मीटर जमीन देने की बात कही थी। इसके बाद लोगों ने यहां अपने मकान बनाए। लेकिन, कुछ रसूखदारों ने पांच-पांच बीघा से अधिक जमीन पर कब्जा कर रखा है। लेकिन, विभाग इन पर कार्रवाई करने से कतरा रहा है। राजस्व विभाग के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि रसूखदारों को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है। कई बार कब्जे हटाने भी गए। लेकिन, राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण कोई कार्रवाई नहीं कर पाए। उधर, नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी केआर ठाकुर का कहना है कि इस संबंध में पूरा रिकार्ड राजस्व विभाग के पास है। उन्होंने बताया कि अवैध कब्जों के बारे में तहसीलदार 31 अक्तूबर को हाईकोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट सौंपेंगे।
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गौर रहे कि 1051 लोगों ने 150 वर्ग मीटर जमीन को नियमित करने के लिए आवेदन कर रखा है। इसमें से 335 को स्वीकृत किया गया है। जबकि अन्य आवेदन कई कारणों से रद्द हो गए हैं। इसके बाद भी अवैध कब्जों को हटाने के संबंध में सरकारी अमला कोई कार्रवाई नहीं कर पाया है। इसके बाद मामला हाईकाई में पहुंचा। हाईकोर्ट ने शहर में अवैध कब्जों को हटाने के आदेश दिए हैं। लेकिन, इसके बाद भी शहर में मात्र गरीब लोगों के कब्जे हटाए जा रहे हैं। लेकिन, रसूखदारों के कब्जे हटाने को लेकर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। एक सरकारी अधिकारी के मानें तो शहर में अधिकांश कब्जे अवैध हैं। लेकिन, सरकारी उदासीनता के कारण हर साल शहर में अवैध कब्जे हो रहे हैं।
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उल्लेखनीय है कि भाखड़ा विस्थापितों को सरकार ने 150 वर्ग मीटर जमीन देने की बात कही थी। इसके बाद लोगों ने यहां अपने मकान बनाए। लेकिन, कुछ रसूखदारों ने पांच-पांच बीघा से अधिक जमीन पर कब्जा कर रखा है। लेकिन, विभाग इन पर कार्रवाई करने से कतरा रहा है। राजस्व विभाग के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि रसूखदारों को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है। कई बार कब्जे हटाने भी गए। लेकिन, राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण कोई कार्रवाई नहीं कर पाए। उधर, नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी केआर ठाकुर का कहना है कि इस संबंध में पूरा रिकार्ड राजस्व विभाग के पास है। उन्होंने बताया कि अवैध कब्जों के बारे में तहसीलदार 31 अक्तूबर को हाईकोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट सौंपेंगे।
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