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Bilaspur News: जिले की 50 निजी बसें जम्मू-कश्मीर चुनावों के लिए अधिग्रहित

Mon, 16 Sep 2024 11:01 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Mon, 16 Sep 2024 11:01 PM IST
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50 private buses of the district acquired for Jammu and Kashmir elections
-निजी बसों के रूट प्रभावित होने से लोग परेशान
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- 2 अक्तूबर तक यात्रियों को करना होगा असुविधा का सामना
-ऑपरेटर बोले, काम न होने के कारण चुनाव के लिए भेजनी पड़ीं बसें

संवाद न्यूज एजेंसी
घुमारवीं(बिलासपुर)। जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनावों के चलते निर्वाचन आयोग ने बिलासपुर से 50 निजी बसों सहित पूरे हिमाचल की करीब 305 बसों का अधिग्रहण किया। इस कारण यात्रियों को 2 अक्तूबर तक काफी असुविधा का सामना करना पड़ सकता है। आने वाले 20 दिन जिले में उन यात्रियों पर भारी पड़ सकते हैं जो अक्सर इन बसों में यात्रा करते हैं।
निजी बसों के न होने पर निगम की बसों को अतिरिक्त यात्रियों का भार ढोना पड़ेगा। इन 50 निजी बसों के कारण जिले भर में करीब 10 से अधिक रूट प्रभावित होंगे। जिनमें से सबसे अधिक बसें घुमारवीं से बिलासपुर रूट पर चलने वाली हैं। इस रूट की करीब 12 बसें भेजी गई हैं। वहीं जाहू जाने वाली पांच, झंडूता रूट की छह, लदरौर रूट पर चलने वाली चार, बरठीं रूट की तीन, श्री नयना देवी जी से आठ, हमीरपुर चलने वाली दो, घागस रूट के लिए जाने वाली चार व ऊना रूट पर चलने वाली एक बस को जम्मू-कश्मीर भेजा गया है।
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निजी बस ऑपरेटर यूनियन की मानें तो उन्होंने मजबूरी में इन बसों को जम्मू-कश्मीर भेजा है। क्योंकि जब से फोरलेन बना है तब से निजी बस ऑपरेटर को नुकसान उठाना पड़ रहा है। अधिकतर बसें अपने रूट से तेल का खर्चा भी नहीं निकल पा रही हैं। अधिकतर निजी बस ऑपरेटर बैंकों से भी डिफाल्टर हो चुके हैं, लेकिन सरकार उनकी किसी भी मांग पर विचार करने को तैयार नहीं है।
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यही कारण है कि अपनी आर्थिक स्थिति को देखते हुए ही निजी बस ऑपरेटरों ने अपनी बसों को जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव के लिए भेजा है। वहीं दूसरी तरफ निगम की बसों का नियमित संचालन जारी है। शहर में यात्रियों की संख्या अधिक होने के कारण यात्रियों को उन रूटों के लिए बसों का इंतजार करना पड़ रहा है, जिन रूटों की बसें चुनावों के चलते जम्मू-कश्मीर भेजी गई हैं। सोमवार को बस स्टैंड घुमारवीं में उन रूटों की तरफ जाने वाले अधिकतर लोग भीषण गर्मी में बसों की तलाश में परेशान रहे।

कोट
जिले से 50 निजी बसें जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव के लिए चुनाव आयोग की मांग पर भेजी गई हैं। यूनियन नहीं चाहती थी कि बसों को भेजा जाए और लोगों को परेशानी उठानी पड़े। फोरलेन बनने के बाद निगम की अधिकतम बसें इस रूट पर चलने के कारण निजी बस ऑपरेटरों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। निजी बस ऑपरेटर की आर्थिक स्थिति हालत खराब हो चुकी है। अधिकतर निजी बस ऑपरेटर से बैंक डिफाल्टर हो चुके हैं। सरकार सुनने को तैयार नहीं।
-राजेश पटियाल, प्रधान, निजी बस ऑपरेटर यूनियन, बिलासपुर
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