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दहेज उत्पीड़न पर पति को 3 वर्ष के जेल और 10 हजार जुर्माना
Updated Tue, 28 Aug 2018 07:56 PM IST
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दहेज उत्पीड़न पर पति को 3 वर्ष के जेल और 10 हजार जुर्माना
अतिरिक्त न्यायिक दंडाधिकारी संदीप सिंह सिहाग की अदालत ने सुनाया फैसला
अमर उजाला ब्यूरो
घुमारवीं (बिलासपुर)। पत्नी को दहेज लिए प्रताड़ित करने के आरोप सिद्ध होने पर घुमारवीं की अदालत ने दोषी को तीन साल का कारावास व दस हजार रुपये बतौर जुर्माने की सजा चुनाई है। मामले को लेकर 18 गवाह पेश किए गए थे। इसके बाद आरोप सिद्ध होने पर अदालत ने आरोपी को दोषी करार किया है।
सहायक लोक अभियोजक केवी अवस्थी ने बताया की 31 जुलाई 2011 को घुमारवीं सिविल अस्पताल के चिकित्सक द्वारा घुमारवीं थाना में दूरभाष पर सूचना दी थी कि एक महिला को मृत अवस्था में लाया गया है। इस पर घुमारवीं थाना पुलिस ने अस्पताल में जाकर मृतका के पिता आजादी सिंह का दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 154 के तहत बयान दर्ज कर दहेज उत्पीड़न का मामला दर्ज किया। उसी दिन प्राथमिकी दर्ज की गई। पुलिस ने जांच में पाया कि मृतका ने कोई जहरीला पदार्थ खा लिया था, जिसके चलते उसकी मौत हो गई थी।
अभियोजन पक्ष के अनुसार जांच में यह तथ्य सामने आया था कि आरोपी मृतका के साथ मारपीट व गाली-गलौच करता था। अभियोजन पक्ष ने अपने मुकदमे के पक्ष में 18 गवाह पेश किए थे। आरोप सिद्ध होने पर अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए भारतीय दंड संहिता की धारा 498 ए के तहत तीन वर्ष के साधारण कारावास व 10000 जुर्माने की सजा सुनाई।
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केवी अवस्थी ने बताया कि अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी संदीप सिंह सिहाग की अदालत में दहेज उत्पीड़न के मामले के आरोपी चंद्रशेखर पुत्र प्रीतम सिंह निवासी मसौर तहसील घुमारवीं जिला बिलासपुर को भारतीय दंड संहिता की धारा 498 ए के तहत पत्नी को दहेज के लिए उत्पीड़ित करने का दोषी करार दिया। इसके चलते दोषी को 3 वर्ष के कारावास व 10000 जुर्माने की सजा सुनाई है।
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....खेमराज शर्मा।
अतिरिक्त न्यायिक दंडाधिकारी संदीप सिंह सिहाग की अदालत ने सुनाया फैसला
अमर उजाला ब्यूरो
घुमारवीं (बिलासपुर)। पत्नी को दहेज लिए प्रताड़ित करने के आरोप सिद्ध होने पर घुमारवीं की अदालत ने दोषी को तीन साल का कारावास व दस हजार रुपये बतौर जुर्माने की सजा चुनाई है। मामले को लेकर 18 गवाह पेश किए गए थे। इसके बाद आरोप सिद्ध होने पर अदालत ने आरोपी को दोषी करार किया है।
सहायक लोक अभियोजक केवी अवस्थी ने बताया की 31 जुलाई 2011 को घुमारवीं सिविल अस्पताल के चिकित्सक द्वारा घुमारवीं थाना में दूरभाष पर सूचना दी थी कि एक महिला को मृत अवस्था में लाया गया है। इस पर घुमारवीं थाना पुलिस ने अस्पताल में जाकर मृतका के पिता आजादी सिंह का दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 154 के तहत बयान दर्ज कर दहेज उत्पीड़न का मामला दर्ज किया। उसी दिन प्राथमिकी दर्ज की गई। पुलिस ने जांच में पाया कि मृतका ने कोई जहरीला पदार्थ खा लिया था, जिसके चलते उसकी मौत हो गई थी।
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अभियोजन पक्ष के अनुसार जांच में यह तथ्य सामने आया था कि आरोपी मृतका के साथ मारपीट व गाली-गलौच करता था। अभियोजन पक्ष ने अपने मुकदमे के पक्ष में 18 गवाह पेश किए थे। आरोप सिद्ध होने पर अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए भारतीय दंड संहिता की धारा 498 ए के तहत तीन वर्ष के साधारण कारावास व 10000 जुर्माने की सजा सुनाई।
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केवी अवस्थी ने बताया कि अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी संदीप सिंह सिहाग की अदालत में दहेज उत्पीड़न के मामले के आरोपी चंद्रशेखर पुत्र प्रीतम सिंह निवासी मसौर तहसील घुमारवीं जिला बिलासपुर को भारतीय दंड संहिता की धारा 498 ए के तहत पत्नी को दहेज के लिए उत्पीड़ित करने का दोषी करार दिया। इसके चलते दोषी को 3 वर्ष के कारावास व 10000 जुर्माने की सजा सुनाई है।
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....खेमराज शर्मा।