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शहर में 6 मार्च से पहले हटेंगे 345 अवैध कब्जे
Updated Sun, 18 Feb 2018 11:15 PM IST
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बिलासपुर। बिलासपुर में अवैध कब्जों को हटाने का समय धीरे-धीरे नजदीक आ रहा है। कोर्ट ने जिला प्रशासन को साफ किया है कि 6 मार्च से पहले बिलासपुर शहर के 345 कब्जो को हटाया जाए। इसको लेकर जिला प्रशासन ने अपनी आगामी प्रक्रिया शुरू कर दी है। जिला प्रशासन ने नप को आदेश दिए हैं कि कब्जों को हटाने के लिए तैयारी कर ले। इसके लिए जितनी भी पुलिस बल की जरूरत होगी प्रशासन मुहैया करवाएगा।
उल्लेखनीय है कि हाईकोर्ट ने बिलासपुर के 345 अवैध कब्जों को हटाने के लिए जिला प्रशासन को कहा है। इस बाबत कोर्ट पहले भी जिला प्रशासन को फटकार लगा चुका है। इसके बाद कोर्ट ने तत्कालीन उपायुक्त को शपथपत्र दायर करने को कहा था। जिला प्रशासन ने शपथ पत्र दायर कर कहा था कि बिलासपुर के अवैध कब्जों को हटाएंगे। बिलासपुर में अवैध कब्जों को हटाने को लेकर सामाजिक संस्थाओं ने भी विरोध करना शुरू कर दिया है। संस्थाओं ने बैठकों का दौर शुरू कर लोगों को एकत्रित करना शुरू कर दिया है। संस्थाओं का कहना है कि बिलासपुर शहर विस्थापितों का शहर है। भाखड़ा बांध बनने के बाद यहां के लोगों ने अपना सब कुछ खो दिया था। इसके बाद उन्होंने अपने घर यहां बनाए थे। लेकिन अब उन लोगों के घरों को उजाड़ना कहां तक सही है। संस्थाओं का कहना है कि अगर सरकार अवैध कब्जों को तोड़ने को लेकर अपनी स्थिति जल्द स्पष्ट नहीं करती है तो वे विस्थापितों के साथ सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेंगे। वहीं कांग्रेस भी विस्थापितों का साथ देने का ऐलान कर चुकी है।
इस बारे में व्यापार मंडल के महासचिव सुरेंद्र गुप्ता का कहना है कि मामला सरकार के समक्ष उठाया गया है। जिनके कब्जे हटाने हैं वे विस्थापित हैं। सरकार को लोगों को उजड़ने से बचाना चाहिए।
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उपायुक्त विवेक भाटिया का कहना है कि हाईकोर्ट के आदेशों का पालन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मामला प्रदेश सरकार के ध्यान में भी है।
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उल्लेखनीय है कि हाईकोर्ट ने बिलासपुर के 345 अवैध कब्जों को हटाने के लिए जिला प्रशासन को कहा है। इस बाबत कोर्ट पहले भी जिला प्रशासन को फटकार लगा चुका है। इसके बाद कोर्ट ने तत्कालीन उपायुक्त को शपथपत्र दायर करने को कहा था। जिला प्रशासन ने शपथ पत्र दायर कर कहा था कि बिलासपुर के अवैध कब्जों को हटाएंगे। बिलासपुर में अवैध कब्जों को हटाने को लेकर सामाजिक संस्थाओं ने भी विरोध करना शुरू कर दिया है। संस्थाओं ने बैठकों का दौर शुरू कर लोगों को एकत्रित करना शुरू कर दिया है। संस्थाओं का कहना है कि बिलासपुर शहर विस्थापितों का शहर है। भाखड़ा बांध बनने के बाद यहां के लोगों ने अपना सब कुछ खो दिया था। इसके बाद उन्होंने अपने घर यहां बनाए थे। लेकिन अब उन लोगों के घरों को उजाड़ना कहां तक सही है। संस्थाओं का कहना है कि अगर सरकार अवैध कब्जों को तोड़ने को लेकर अपनी स्थिति जल्द स्पष्ट नहीं करती है तो वे विस्थापितों के साथ सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेंगे। वहीं कांग्रेस भी विस्थापितों का साथ देने का ऐलान कर चुकी है।
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इस बारे में व्यापार मंडल के महासचिव सुरेंद्र गुप्ता का कहना है कि मामला सरकार के समक्ष उठाया गया है। जिनके कब्जे हटाने हैं वे विस्थापित हैं। सरकार को लोगों को उजड़ने से बचाना चाहिए।
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उपायुक्त विवेक भाटिया का कहना है कि हाईकोर्ट के आदेशों का पालन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मामला प्रदेश सरकार के ध्यान में भी है।