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मांगों को लेकर विस्थापितों का आमरण अनशन आज से
Updated Mon, 01 Jan 2018 11:26 PM IST
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बिलासपुर।सीमेंट फैक्ट्री के कारण विस्थापित हुए मागल क्षेत्र के लोग अपनी मांगों को लेकर मंगलवार से आमरण अनशन पर बैठने जा रहे हैं। विस्थापितों ने अल्ट्राटेक कॉलोनी को जाने वाली पानी की आपूर्ति भी बंद करने को चेताया है। वहीं अन्य मूलभूत सुविधाओं पर भी विस्थापितों द्वारा रोक लगा दी जाएगी।
विस्थापितों ने साफ किया है कि जब तक उनकी मांगों को पूरा नहीं किया जाएगा तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। इस बारे में विस्थापितों ने सोमवार को एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर अवगत करवा दिया है।
उल्लेखनीय है कि मांगल क्षेत्र के विस्थापित व प्रभावित वर्षों से रोजगार की लड़ाई लड़ रहे हैं। पहले जेपी और उसके बाद अब अल्ट्राटेक कंपनी से योग्यता के आधार पर रोजगार मुहैया करवाने की मांग कर रहे हैं। दोनों ही कंपनियों ने विस्थापितों व प्रभावितों के हकों की अनदेखी की है। वर्कर यूनियन के प्रधान व मांगल से बीडीसी मेंबर सुरेश ठाकुर ने बताया कि इससे पहले भी मांगों को जिला प्रशासन सोलन के सामने रख चुके हैं। प्रशासन ने उस समय जेपी कंपनी प्रबंधन को आदेश दिए थे कि विस्थापितों को योग्यता के आधार पर हर घर से नौकरी दी जाए। लेकिन इसके बाद भी कंपनी ने प्रशासन के आदेशों को ठेंगा दिखा दिया।
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सुरेश ठाकुर ने कहा कि जेपी कंपनी ने बग्गा में अपनी कंपनी अल्ट्राटेक को बेच दी। तीन महीने तक मांगों को लेकर बातचीत करते रहे। तीन महीने बाद भी जब कंपनी लोगों की मांगें पूरी करने के लिए नहीं मानी तो अपने हकों के लिए बेरोजगार युवाओं को आमरण अनशन का फैसला लेना पड़ा। उन्होंने साफ किया है कि अनशन तब तक जारी रहेगा जब तक विस्थापितों की मांगें पूरी नहीं हो जाती हैं।
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विस्थापितों ने साफ किया है कि जब तक उनकी मांगों को पूरा नहीं किया जाएगा तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। इस बारे में विस्थापितों ने सोमवार को एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर अवगत करवा दिया है।
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उल्लेखनीय है कि मांगल क्षेत्र के विस्थापित व प्रभावित वर्षों से रोजगार की लड़ाई लड़ रहे हैं। पहले जेपी और उसके बाद अब अल्ट्राटेक कंपनी से योग्यता के आधार पर रोजगार मुहैया करवाने की मांग कर रहे हैं। दोनों ही कंपनियों ने विस्थापितों व प्रभावितों के हकों की अनदेखी की है। वर्कर यूनियन के प्रधान व मांगल से बीडीसी मेंबर सुरेश ठाकुर ने बताया कि इससे पहले भी मांगों को जिला प्रशासन सोलन के सामने रख चुके हैं। प्रशासन ने उस समय जेपी कंपनी प्रबंधन को आदेश दिए थे कि विस्थापितों को योग्यता के आधार पर हर घर से नौकरी दी जाए। लेकिन इसके बाद भी कंपनी ने प्रशासन के आदेशों को ठेंगा दिखा दिया।
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सुरेश ठाकुर ने कहा कि जेपी कंपनी ने बग्गा में अपनी कंपनी अल्ट्राटेक को बेच दी। तीन महीने तक मांगों को लेकर बातचीत करते रहे। तीन महीने बाद भी जब कंपनी लोगों की मांगें पूरी करने के लिए नहीं मानी तो अपने हकों के लिए बेरोजगार युवाओं को आमरण अनशन का फैसला लेना पड़ा। उन्होंने साफ किया है कि अनशन तब तक जारी रहेगा जब तक विस्थापितों की मांगें पूरी नहीं हो जाती हैं।