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मांगों को घोषणा पत्र में शामिल नहीं किया तो होगा नोटा का प्रयोग
Updated Fri, 27 Oct 2017 09:50 PM IST
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बिलासपुर। जिला मेडिकल ऑफिसर्ज एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. सतीश शर्मा और महासचिव डॉ. विजय राय ने प्रेस को जारी बयान में राजनीतिक दलों से उनकी मांगों को घोषणा पत्र में शामिल करने की मांग की है। वहीं चेताया है कि अगर उनकी मांगों को घोषणा पत्र में शामिल नहीं किया गया तो पूरे प्रदेश के चिकित्सक परिवार सहित चुनावों में नोटा का बटन दबाने को मजबूर होंगे।
जिला महासचिव डॉ. विजय राय ने कहा कि प्रदेश में इस वर्ग की जबरदस्त अनदेखी हो रही है। विपरीत परिस्थितियों में चिकित्सक जनसेवा में दिनरात एक कर रहे हैं। लेकिन, सरकारों द्वारा इस वर्ग की सुख सुविधा का कोई ध्यान नहीं रखा जा रहा है। जो कि चिकित्सकीय क्षेत्र में काम करने वाले लोगों के लिए कोई अच्छे संकेत नहीं हैं। उन्होंने कहा कि समाज में सम्मान की दृष्टि से देखा जाने वाला यह काम सरकारों द्वारा मजाक बना दिया गया है।
डॉ. राय ने कहा कि प्रदेश में चिकित्सक वर्ग को काम करने का माहौल नहीं मिल रहा है। यही कारण है कि अधिकांश चिकित्सक या तो नौकरी छोड़ कर निजी क्षेत्र की ओर रुख कर रहे हैं या फिर प्रदेश से बाहर अपनी आजीविका ढूंढ रहे हैं। लगातार 18 घंटे सेवाएं देने वाले इस वर्ग की हालत मजदूरों से भी बदतर हो चुकी है। लेकिन, कोई भी सरकार सुनवाई करने के लिए तैयार नहीं है। उन्होंने कहा कि कई मांगें ऐसी हैं जिनका समाधान करने में सरकारें रुचि नहीं ले रही हैं। जबकि चिकित्सक वर्ग लंबे समय से अपनी जायज मांगों को लेकर संघर्ष कर रहा है। संघ का कहना है कि सभी राजनीतिक दल चिकित्सकों की मांगों को अपने घोषणा पत्र में शामिल करें अन्यथा वे विस चुनावों में नोटा बटन दबाने के लिए बाध्य होंगे।
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जिला महासचिव डॉ. विजय राय ने कहा कि प्रदेश में इस वर्ग की जबरदस्त अनदेखी हो रही है। विपरीत परिस्थितियों में चिकित्सक जनसेवा में दिनरात एक कर रहे हैं। लेकिन, सरकारों द्वारा इस वर्ग की सुख सुविधा का कोई ध्यान नहीं रखा जा रहा है। जो कि चिकित्सकीय क्षेत्र में काम करने वाले लोगों के लिए कोई अच्छे संकेत नहीं हैं। उन्होंने कहा कि समाज में सम्मान की दृष्टि से देखा जाने वाला यह काम सरकारों द्वारा मजाक बना दिया गया है।
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डॉ. राय ने कहा कि प्रदेश में चिकित्सक वर्ग को काम करने का माहौल नहीं मिल रहा है। यही कारण है कि अधिकांश चिकित्सक या तो नौकरी छोड़ कर निजी क्षेत्र की ओर रुख कर रहे हैं या फिर प्रदेश से बाहर अपनी आजीविका ढूंढ रहे हैं। लगातार 18 घंटे सेवाएं देने वाले इस वर्ग की हालत मजदूरों से भी बदतर हो चुकी है। लेकिन, कोई भी सरकार सुनवाई करने के लिए तैयार नहीं है। उन्होंने कहा कि कई मांगें ऐसी हैं जिनका समाधान करने में सरकारें रुचि नहीं ले रही हैं। जबकि चिकित्सक वर्ग लंबे समय से अपनी जायज मांगों को लेकर संघर्ष कर रहा है। संघ का कहना है कि सभी राजनीतिक दल चिकित्सकों की मांगों को अपने घोषणा पत्र में शामिल करें अन्यथा वे विस चुनावों में नोटा बटन दबाने के लिए बाध्य होंगे।
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