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दो माह में एनएचएआई हटाए वन भूमि से अवैध मिट्टी
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बिलासपुर। अरण्यपाल बिलासपुर ने डीएफओ बिलासपुर को आदेश जारी किए हैं कि वह एनएचएआई से दो माह के भीतर वन भूमि पर फेंकी गई अवैध मिट्टी को उठवाएं। वहीं उन्होंने साथ में यह भी स्पष्ट किया है कि अगर एनएचएआई मिट्टी नहीं उठाता है तो जो खर्चा पौधरोपण व अन्य कार्यों के लिए होगा उसका खर्चा एनएचएआई को उठाना होगा।
फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति का कहना है कि कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन निर्माण से निकल रहे मलबे को नालों, खड्डों, गोबिंद सागर झील, वन भूमि में बिना अनुमति के बिना सुरक्षा दीवार लगाए लोगों की निजी भूमि, सरकारी स्कूल के ग्राउंड को दीवार लगाकर समतल ना करने के लिए कंपनी द्वारा अवैध डंपिंग की गई है जिस पर अरण्यपाल बिलासपुर ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के परियोजना निदेशक को अलग से निर्देश जारी करने को कहा है।
फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति की एक अपील का निपटारा करते हुए उन्होंने फैसला दिया कि जिला वन अधिकारी एनएचएआई को कहें कि वह उपरोक्त स्थानों पर की गई सारी अवैध मक डंपिंग को उठाए या फिर डीएफओ बिलासपुर इस सारे नुकसान की अलग से रिपोर्ट तैयार कर परियोजना निदेशक को भेजे ताकि फोरलेन कंपनी द्वारा किए गए नुकसान की भरपाई की जा सके।
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समिति ने वन भूमि के हुए डायवर्सन में शर्त नंबर 26 का हवाला देते हुए कहा कि इस शर्त में साफ लिखा है कि अगर यूजर्स एजेंसी एनएचएआई 25 शर्तों में किसी भी शर्त की उल्लंघन करती है तो इस काम को तुरंत बंद कर दिया जाएगा जिस पर अरण्यपाल बिलासपुर ने समिति के इन विषयों को गंभीरता से लेते हुए यह फैसला सुनाया है। समिति ने साफ किया है कि जब तक नई कंपनी टेंडर प्रक्रिया को पूरा नहीं करती है तब तक रोड अलाइनमेंट प्लान, भूमि अधिग्रहण प्लान का पूरी तरह से रास्ता साफ हो जाना चाहिए, साथ में ब्लास्टिंग से लोगों के मकानों को हुए नुकसान, रास्तों, शमशान घाटों की तस्वीर साफ हो जानी चाहिए ताकि सड़क निर्माण कंपनी ठीक से अपना काम कर सके।
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फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति का कहना है कि कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन निर्माण से निकल रहे मलबे को नालों, खड्डों, गोबिंद सागर झील, वन भूमि में बिना अनुमति के बिना सुरक्षा दीवार लगाए लोगों की निजी भूमि, सरकारी स्कूल के ग्राउंड को दीवार लगाकर समतल ना करने के लिए कंपनी द्वारा अवैध डंपिंग की गई है जिस पर अरण्यपाल बिलासपुर ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के परियोजना निदेशक को अलग से निर्देश जारी करने को कहा है।
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फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति की एक अपील का निपटारा करते हुए उन्होंने फैसला दिया कि जिला वन अधिकारी एनएचएआई को कहें कि वह उपरोक्त स्थानों पर की गई सारी अवैध मक डंपिंग को उठाए या फिर डीएफओ बिलासपुर इस सारे नुकसान की अलग से रिपोर्ट तैयार कर परियोजना निदेशक को भेजे ताकि फोरलेन कंपनी द्वारा किए गए नुकसान की भरपाई की जा सके।
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समिति ने वन भूमि के हुए डायवर्सन में शर्त नंबर 26 का हवाला देते हुए कहा कि इस शर्त में साफ लिखा है कि अगर यूजर्स एजेंसी एनएचएआई 25 शर्तों में किसी भी शर्त की उल्लंघन करती है तो इस काम को तुरंत बंद कर दिया जाएगा जिस पर अरण्यपाल बिलासपुर ने समिति के इन विषयों को गंभीरता से लेते हुए यह फैसला सुनाया है। समिति ने साफ किया है कि जब तक नई कंपनी टेंडर प्रक्रिया को पूरा नहीं करती है तब तक रोड अलाइनमेंट प्लान, भूमि अधिग्रहण प्लान का पूरी तरह से रास्ता साफ हो जाना चाहिए, साथ में ब्लास्टिंग से लोगों के मकानों को हुए नुकसान, रास्तों, शमशान घाटों की तस्वीर साफ हो जानी चाहिए ताकि सड़क निर्माण कंपनी ठीक से अपना काम कर सके।
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