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बिलासपुर एचआरटीसी डिपो के बेड़े में 11 बसें बूढ़ी
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- फोटो : अमर उजाला
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बिलासपुर। बिलासपुर पथ परिवहन निगम के बेड़े में भी 11 बसें ऐसी हैं जो अपनी माइलेज पुरी कर चुकी हैं, लेकिन बसों की भारी कमी होने के चलते मजबूरी में उन्हें सड़कों पर चलाना पड़ रहा है जिससे बिलासपुर में भी बसों के हादसे होने का भय हर वक्त बना हुआ है। सभी बसें अपनी तय माइलेज साढ़े आठ लाख से ज्यादा चल चुकी हैं। सूत्र बताते हैं कई बसें तो 12 लाख किलोमीटर से भी ज्यादा सड़कों पर दौड़ चुकी हैं। ऐसे में इन बसों में सफर करना खतरे से खाली नहीं है। इस बारे में संबंधित विभाग खामोश है।
बिलासपुर में बसों की कमी तो है ही, लेकिन दूसरी और मेन पावर की भी कमी चल रही है। स्टाफ की इतनी कमी है कि कर्मियों को छुट्टियां भी नहीं मिल रही है। इस समय बिलासपुर डिपो में 45 मैकेनिक हैं, जबकि वर्तमान में इनकी संख्या 60 होनी चाहिए ताकि बसों की रखरखाव का कार्य सही तरीके से हो सके। एक आदमी के ऊपर काम का इतना ज्यादा बोझ है कि वह सही तरीके से बसों का रखरखाव नहीं कर पा रहा है। इसके अलावा चालकों की भी भारी कमी एचआरटीसी डिपो बिलासपुर में चल रही है। यहां पर 135 चालक हैं, जबकि 200 चालकों की आवश्यकता है ताकि रूट सही तरीके से चल सके और सवारियों को भी सुरक्षित पहुंचाया जा सके। कई बार तो ऐसा होता है कि लांग रूट से आए चालक को लोकल रूट पर बस लेकर भेज दिया जाता है जिससे हादसों के होने का खतरा बना रहता है। इसके अलावा बिलासपुर डिपो में परिचालक भी 125 ही हैं, लेकिन इनकी संख्या भी कम है। बिलासपुर को परिचालक भी 160 चाहिए ताकि वह अपना कार्य सुचारु रूप से चला सके।
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आरएम बिलासपुर पवन कुमार का कहना है कि समस्याओं के बारे में आला अधिकारियों को बताया गया है। सरकार व अधिकारी परेशानियों से परिचित हैं। जल्द ही सब कुछ बेहतर हो जाएगा।
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