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एम्स में नियमित रोजगार के लिए महापंचायत बैठी
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एम्स में नियमित रोजगार के लिए कोठीपुरा में महापंचायत
निर्माण कार्य के दौरान काम और बाद में नियमित नौकरी की मांग उठाई
एमबीबीएस की सीटों में भी मिले प्रभावितों को आरक्षण
अमर उजाला ब्यूरो
बिलासपुर। एम्स में निर्माण कार्य से लेकर कॉलेज बनने के बाद स्थायी रोजगार की मांग को लेकर कोठीपुरा में महापंचायत की बैठक की गई। बैठक में साफ किया गया कि क्षेत्र के लोगों को निर्माण कार्य के दौरान रोजगार दें। वहीं, एम्स बन जाने के बाद विभिन्न श्रेणियों में स्थानीय लोगों को नियमित रोजगार मुहैया करवाया जाए, ताकि एम्स निर्माण के दौरान प्रभावित लोगों को भविष्य की चिंता न रहे। महापंचायत का आयोजन एम्स निर्माण समन्वय समिति की ओर से किया गया था। जिसमें कोठीपुरा और राजपुरा पंचायत के लोगों ने भाग लिया।
इसके बाद बैठक में विभिन्न वक्ताओं ने अपने विचार रखे। जिसमें वर्तमान और आने वाले समय में पैदा होने वाली समस्याओं पर चर्चा की गई। वहीं, इसके समाधान के लिए भी मंथन किया गया।
एम्स निर्माण समन्वय समिति की समन्वयक किन्नर बिजली महंत की अगुवाई में इस बैठक का आयोजन किया गया। उन्होंने कहा कि इस निर्माण कार्य के दौरान कंपनी माल ढुलाई और अन्य छोटे-बड़े कार्य बाहरी लोगों और मजदूरों से न करवाकर क्षेत्र के लोगों को रोजगार दिया जाए। इस मौके पर स्थानीय लोगों ने तीन मांगों पर चर्चा की। जिसमें एम्स संस्थान में स्थायी नौकरियों में स्थानीय लोगों के आरक्षण की कुछ प्रतिशतता तय करना, एम्स संस्थान बनने के बाद उपचार के लिए स्थानीय प्रभावित एवं विस्थापितों के परिवारों के लिए अगले से बेहतर सुविधा होना। प्रभावितों और विस्थापितों के बच्चों की पढ़ाई के लिए एम्स संस्थान व कंपनी प्रबंधन की और से आवश्यक मदद दिया जाना शामिल है।
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कोठीपुरा पंचायत प्रधान नंदलाल ठाकुर ने कहा कि एम्स संस्थान में प्रयोग हो रही 1200 बीघा से भी अधिक जमीन में से अधिकतर जमीन पुश्तैनी चरांध वाली जमीन है। इससे लोगों की आजीविका प्रभावित हुई है। उनके परंपरागत पेयजल स्रोत भी प्रभावित हुए हैं। अधिवक्ता प्रवेश चंदेल ने कहा कि इस चरांध भूमि में लोगों के वनाधिकार हैं जो इस भूमि पर निर्माण कार्य के चलते छिन गया है। इस मौके पर इस महासभा में समिति के पदाधिकारी सुषमा चौधरी, सुषमा ठाकुर, तनुज सोनी, कोठीपुरा पंचायत उप-प्रधान जगदीश ठाकुर सहित विस्थापित व प्रभावित बड़ी संख्या के रूप में मौजूद रहे।
इस प्रोजेक्ट क्षेत्र में होने वाले प्रभाव का आकलन करवाए सरकार
अधिवक्ता सुमन ठाकुर ने लोगों को बताया कि भूमि अधिग्रहण उचित मुआवजे का अधिकार-एक्ट-2013 के अनुसार किसी भी प्रोजेक्ट के लगने से पहले उस प्रोजेक्ट का उस क्षेत्र में होने वाले प्रभाव का आकलन किया जाना आवश्यक है, लेकिन यहां ऐसा कुछ भी नहीं हुआ है। कहा कि समिति की मांग की है कि इस आकलन को सरकार अब करवाए, ताकि लोगों को उनके अधिकार मिल सके।
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निर्माण कार्य के दौरान काम और बाद में नियमित नौकरी की मांग उठाई
एमबीबीएस की सीटों में भी मिले प्रभावितों को आरक्षण
अमर उजाला ब्यूरो
बिलासपुर। एम्स में निर्माण कार्य से लेकर कॉलेज बनने के बाद स्थायी रोजगार की मांग को लेकर कोठीपुरा में महापंचायत की बैठक की गई। बैठक में साफ किया गया कि क्षेत्र के लोगों को निर्माण कार्य के दौरान रोजगार दें। वहीं, एम्स बन जाने के बाद विभिन्न श्रेणियों में स्थानीय लोगों को नियमित रोजगार मुहैया करवाया जाए, ताकि एम्स निर्माण के दौरान प्रभावित लोगों को भविष्य की चिंता न रहे। महापंचायत का आयोजन एम्स निर्माण समन्वय समिति की ओर से किया गया था। जिसमें कोठीपुरा और राजपुरा पंचायत के लोगों ने भाग लिया।
इसके बाद बैठक में विभिन्न वक्ताओं ने अपने विचार रखे। जिसमें वर्तमान और आने वाले समय में पैदा होने वाली समस्याओं पर चर्चा की गई। वहीं, इसके समाधान के लिए भी मंथन किया गया।
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एम्स निर्माण समन्वय समिति की समन्वयक किन्नर बिजली महंत की अगुवाई में इस बैठक का आयोजन किया गया। उन्होंने कहा कि इस निर्माण कार्य के दौरान कंपनी माल ढुलाई और अन्य छोटे-बड़े कार्य बाहरी लोगों और मजदूरों से न करवाकर क्षेत्र के लोगों को रोजगार दिया जाए। इस मौके पर स्थानीय लोगों ने तीन मांगों पर चर्चा की। जिसमें एम्स संस्थान में स्थायी नौकरियों में स्थानीय लोगों के आरक्षण की कुछ प्रतिशतता तय करना, एम्स संस्थान बनने के बाद उपचार के लिए स्थानीय प्रभावित एवं विस्थापितों के परिवारों के लिए अगले से बेहतर सुविधा होना। प्रभावितों और विस्थापितों के बच्चों की पढ़ाई के लिए एम्स संस्थान व कंपनी प्रबंधन की और से आवश्यक मदद दिया जाना शामिल है।
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कोठीपुरा पंचायत प्रधान नंदलाल ठाकुर ने कहा कि एम्स संस्थान में प्रयोग हो रही 1200 बीघा से भी अधिक जमीन में से अधिकतर जमीन पुश्तैनी चरांध वाली जमीन है। इससे लोगों की आजीविका प्रभावित हुई है। उनके परंपरागत पेयजल स्रोत भी प्रभावित हुए हैं। अधिवक्ता प्रवेश चंदेल ने कहा कि इस चरांध भूमि में लोगों के वनाधिकार हैं जो इस भूमि पर निर्माण कार्य के चलते छिन गया है। इस मौके पर इस महासभा में समिति के पदाधिकारी सुषमा चौधरी, सुषमा ठाकुर, तनुज सोनी, कोठीपुरा पंचायत उप-प्रधान जगदीश ठाकुर सहित विस्थापित व प्रभावित बड़ी संख्या के रूप में मौजूद रहे।
इस प्रोजेक्ट क्षेत्र में होने वाले प्रभाव का आकलन करवाए सरकार
अधिवक्ता सुमन ठाकुर ने लोगों को बताया कि भूमि अधिग्रहण उचित मुआवजे का अधिकार-एक्ट-2013 के अनुसार किसी भी प्रोजेक्ट के लगने से पहले उस प्रोजेक्ट का उस क्षेत्र में होने वाले प्रभाव का आकलन किया जाना आवश्यक है, लेकिन यहां ऐसा कुछ भी नहीं हुआ है। कहा कि समिति की मांग की है कि इस आकलन को सरकार अब करवाए, ताकि लोगों को उनके अधिकार मिल सके।