{"_id":"6a0b1f5e9ee09aa68705aecf","slug":"155-bags-of-government-cement-found-in-the-house-bilaspur-news-c-92-1-bls1001-160135-2026-05-18","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bilaspur News: घर में मिली सरकारी सीमेंट की 155 बोरियां","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bilaspur News: घर में मिली सरकारी सीमेंट की 155 बोरियां
विज्ञापन
घुमारवीं की ग्राम पंचायत पट्टा के एक निजी घर में मिली सरकारी सीमेंट की बोरियां। स्रोत: जागरूक प
मौके पर पहुंची पुलिस, पंचायत सचिव से मांगा जवाब
पांच माह पहले पंचायत में निर्माण कार्य के लिए आया था सीमेंट
संवाद न्यूज एजेंसी
भराड़ी (बिलासपुर)। विकासखंड घुमारवीं के तहत ग्राम पंचायत पट्टा के वार्ड 2 में एक घर से 155 बोरी सरकारी सीमेंट बरामद होने का मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार पुलिस को सूचना मिली थी कि गांव के एक घर में लंबे समय से सरकारी सीमेंट की बोरियां रखी गई हैं। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू की।
मौके पर पुलिस ने पाया कि घर के बरामदे में सीमेंट की बोरियां ढककर रखी गई थीं। गिनती करने पर वहां 155 भरी हुई बोरियां और एक आधी प्रयोग की हुई बोरी मिली। प्रारंभिक जांच में यह सारा सीमेंट सरकारी पाया गया। जब संबंधित व्यक्ति से पूछताछ की गई तो उसने बताया कि यह सीमेंट ग्राम पंचायत पट्टा का है और पंचायत की ओर से ही इसे यहां रखवाया गया था। इसके बाद पंचायत प्रतिनिधियों को मौके पर बुलाया गया। पंचायत पदाधिकारियों ने बताया कि यह सीमेंट मुक्ति धाम को जाने वाले रास्ते के निर्माण कार्य के लिए मंगवाया गया था, लेकिन किसी कारणवश काम शुरू नहीं हो पाया। जानकारी के अनुसार पंचायत को जनवरी में करीब 750 बोरी सीमेंट अलॉट हुई थी। हालांकि अब इस पूरे मामले में विभागीय जांच की मांग भी उठने लगी है। पंचायत सचिव की ओर से सीमेंट मंगवाने और उसके उपयोग से संबंधित जानकारी देने की बात तो कही गई है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि आखिर सीमेंट मंगवाने के बाद निर्माण कार्य शुरू क्यों नहीं किया गया। यदि काम शुरू ही नहीं होना था तो फिर पहले ही इतनी मात्रा में सीमेंट मंगवाने की क्या आवश्यकता थी। इसके साथ ही यह सवाल भी उठ रहा है कि जब तीन महीने के भीतर सीमेंट का उपयोग नहीं हो पाया तो उसे वापस क्यों नहीं भेजा गया। निर्माण कार्य से जुड़े जानकारों के अनुसार सीमेंट की गुणवत्ता और उसकी मजबूती समय के साथ कम होने लगती है। सामान्य तौर पर तीन महीने बाद सीमेंट की मजबूती प्रभावित होना शुरू हो जाती है।
फिलहाल पुलिस ने मामले से संबंधित रिकॉर्ड और दस्तावेजों के लिए पंचायत सचिव को तलब किया है। सचिव ने भी सीमेंट से संबंधित पूरी जानकारी उपलब्ध करवाने की बात कही है। अब देखना होगा कि विभागीय स्तर पर इस मामले में क्या कार्रवाई होती है। वहीं पुलिस की जांच अभी जारी है और रिकॉर्ड की जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। डीएसपी घुमारवीं विशाल वर्मा ने बताया कि पुलिस को जानकारी मिली थी कि गांव में किसी घर में सरकारी सीमेंट पड़ा है, जिसके बाद मौके पर पुलिस ने सारी जानकारी जुटाई तो पता चला कि यह ग्राम पंचायत पट्टा का सीमेंट है जिसके बाद सचिव से सीमेंट की सारी जानकारी मांगी गई है उसके बाद ही आगे की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
पांच माह पहले पंचायत में निर्माण कार्य के लिए आया था सीमेंट
संवाद न्यूज एजेंसी
भराड़ी (बिलासपुर)। विकासखंड घुमारवीं के तहत ग्राम पंचायत पट्टा के वार्ड 2 में एक घर से 155 बोरी सरकारी सीमेंट बरामद होने का मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार पुलिस को सूचना मिली थी कि गांव के एक घर में लंबे समय से सरकारी सीमेंट की बोरियां रखी गई हैं। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू की।
मौके पर पुलिस ने पाया कि घर के बरामदे में सीमेंट की बोरियां ढककर रखी गई थीं। गिनती करने पर वहां 155 भरी हुई बोरियां और एक आधी प्रयोग की हुई बोरी मिली। प्रारंभिक जांच में यह सारा सीमेंट सरकारी पाया गया। जब संबंधित व्यक्ति से पूछताछ की गई तो उसने बताया कि यह सीमेंट ग्राम पंचायत पट्टा का है और पंचायत की ओर से ही इसे यहां रखवाया गया था। इसके बाद पंचायत प्रतिनिधियों को मौके पर बुलाया गया। पंचायत पदाधिकारियों ने बताया कि यह सीमेंट मुक्ति धाम को जाने वाले रास्ते के निर्माण कार्य के लिए मंगवाया गया था, लेकिन किसी कारणवश काम शुरू नहीं हो पाया। जानकारी के अनुसार पंचायत को जनवरी में करीब 750 बोरी सीमेंट अलॉट हुई थी। हालांकि अब इस पूरे मामले में विभागीय जांच की मांग भी उठने लगी है। पंचायत सचिव की ओर से सीमेंट मंगवाने और उसके उपयोग से संबंधित जानकारी देने की बात तो कही गई है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि आखिर सीमेंट मंगवाने के बाद निर्माण कार्य शुरू क्यों नहीं किया गया। यदि काम शुरू ही नहीं होना था तो फिर पहले ही इतनी मात्रा में सीमेंट मंगवाने की क्या आवश्यकता थी। इसके साथ ही यह सवाल भी उठ रहा है कि जब तीन महीने के भीतर सीमेंट का उपयोग नहीं हो पाया तो उसे वापस क्यों नहीं भेजा गया। निर्माण कार्य से जुड़े जानकारों के अनुसार सीमेंट की गुणवत्ता और उसकी मजबूती समय के साथ कम होने लगती है। सामान्य तौर पर तीन महीने बाद सीमेंट की मजबूती प्रभावित होना शुरू हो जाती है।
विज्ञापन
फिलहाल पुलिस ने मामले से संबंधित रिकॉर्ड और दस्तावेजों के लिए पंचायत सचिव को तलब किया है। सचिव ने भी सीमेंट से संबंधित पूरी जानकारी उपलब्ध करवाने की बात कही है। अब देखना होगा कि विभागीय स्तर पर इस मामले में क्या कार्रवाई होती है। वहीं पुलिस की जांच अभी जारी है और रिकॉर्ड की जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। डीएसपी घुमारवीं विशाल वर्मा ने बताया कि पुलिस को जानकारी मिली थी कि गांव में किसी घर में सरकारी सीमेंट पड़ा है, जिसके बाद मौके पर पुलिस ने सारी जानकारी जुटाई तो पता चला कि यह ग्राम पंचायत पट्टा का सीमेंट है जिसके बाद सचिव से सीमेंट की सारी जानकारी मांगी गई है उसके बाद ही आगे की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
विज्ञापन