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बिलासपुर में डेंगू और वायरल फीवर का प्रकोप
Updated Mon, 10 Sep 2018 10:55 PM IST
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बिलासपुर में डेंगू और वायरल फीवर का प्रकोप
मेडिसन ओपीडी बुखार से ग्रस्त मरीजों से भरी
बिलासपुर अस्पताल में वार्ड सिस्टर का कार्य कर रहीं नर्सें
अमर उजाला ब्यूरो
बिलासपुर। जिले में इन दिनों जहां डेंगू फैला हुआ है, वहीं वायरल फीवर के मरीज भी अस्पतालों में दाखिल हो रहे हैं। विडंबना यह है कि विभिन्न वार्डों में जो कार्य वार्ड सिस्टर का होता है वह भी यहां पर कार्य करने वाली नर्सों को करना पड़ता है। जिन नर्सों का कार्य मरीजों की देखभाल करना है उन्हें रजिस्टर मेेंटेन करने से लेकर स्टोर तक का ब्योरा रखना पड़ता है।
बिलासपुर अस्पताल में रोजाना 150 के करीब मरीज बुखार, जुखाम, सिर दर्द व अन्य बीमारियों के पहुंच रहे हैं। जबकि रोजाना डेंगू के भी मामले जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं। ऐसे में जब मरीजों को अस्पताल में दाखिल किया जाता है तो उन्हें विभिन्न वार्डों में जाने के लिए सबसे पहले वार्ड सिस्टर के पास जाकर खुद को पंजीकृत करवाना होता है। जिला अस्पताल का आलम यह है कि यहां पर वार्ड सिस्टर कभी कबार ही वार्डों में देखने को मिलती है। सारा का सारा जिम्मा नर्सों के सिर पर ही है।
वार्डों में मरीजों की देखभाल करने वाली नर्सों को मरीजों को पंजीकृत करने से लेकर उन्हें बिस्तर तक पहुंचाने से लेकर उनके टेस्टों के लिए ब्लड सैंपल लेने सहित अन्य सभी कार्य करने पड़ते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि जो कार्य वार्ड सिस्टर का होता है वह नर्सेें क्यों करती हैं। क्या वार्ड सिस्टरों को केवल अस्पताल आने व घर जाने के लिए ही रखा गया है।
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वहीं इस बारे में एमएस बिलासपुर डॉ. आहलूवालिया का कहना है कि अगर उनके पास ऐसी कोई लिखित शिकायत आती है तो इस पर कार्रवाई की जाएगी।
इनसेट...
वार्ड सिस्टर नहीं करती कोई कार्य
जिला अस्पताल में अन्य वार्डों में कार्य करने वाली नर्सों का कहना है कि वार्ड सिस्टर कोई भी कार्य नहीं करती है। नाम न छापने की शर्त में नर्सों ने बताया जो कार्य वार्ड सिस्टरों का होता है वह भी उन्हें ही करना होता है, ऐसे में वह मरीजों को सही तरीके से नहीं देख पाती है। इससे मरीजों के साथ आए तीमारदार उनके साथ बहसबाजी करने लग जाते हैं। वार्ड सिस्टर कभी कबार ही वार्डोें में आती है। ऐसे में स्टाफ भी कम होने के चलते उन्हें ज्यादा परेशानी उठानी पड़ती है।
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...खेमराज शर्मा।
मेडिसन ओपीडी बुखार से ग्रस्त मरीजों से भरी
बिलासपुर अस्पताल में वार्ड सिस्टर का कार्य कर रहीं नर्सें
अमर उजाला ब्यूरो
बिलासपुर। जिले में इन दिनों जहां डेंगू फैला हुआ है, वहीं वायरल फीवर के मरीज भी अस्पतालों में दाखिल हो रहे हैं। विडंबना यह है कि विभिन्न वार्डों में जो कार्य वार्ड सिस्टर का होता है वह भी यहां पर कार्य करने वाली नर्सों को करना पड़ता है। जिन नर्सों का कार्य मरीजों की देखभाल करना है उन्हें रजिस्टर मेेंटेन करने से लेकर स्टोर तक का ब्योरा रखना पड़ता है।
बिलासपुर अस्पताल में रोजाना 150 के करीब मरीज बुखार, जुखाम, सिर दर्द व अन्य बीमारियों के पहुंच रहे हैं। जबकि रोजाना डेंगू के भी मामले जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं। ऐसे में जब मरीजों को अस्पताल में दाखिल किया जाता है तो उन्हें विभिन्न वार्डों में जाने के लिए सबसे पहले वार्ड सिस्टर के पास जाकर खुद को पंजीकृत करवाना होता है। जिला अस्पताल का आलम यह है कि यहां पर वार्ड सिस्टर कभी कबार ही वार्डों में देखने को मिलती है। सारा का सारा जिम्मा नर्सों के सिर पर ही है।
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वार्डों में मरीजों की देखभाल करने वाली नर्सों को मरीजों को पंजीकृत करने से लेकर उन्हें बिस्तर तक पहुंचाने से लेकर उनके टेस्टों के लिए ब्लड सैंपल लेने सहित अन्य सभी कार्य करने पड़ते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि जो कार्य वार्ड सिस्टर का होता है वह नर्सेें क्यों करती हैं। क्या वार्ड सिस्टरों को केवल अस्पताल आने व घर जाने के लिए ही रखा गया है।
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वहीं इस बारे में एमएस बिलासपुर डॉ. आहलूवालिया का कहना है कि अगर उनके पास ऐसी कोई लिखित शिकायत आती है तो इस पर कार्रवाई की जाएगी।
इनसेट...
वार्ड सिस्टर नहीं करती कोई कार्य
जिला अस्पताल में अन्य वार्डों में कार्य करने वाली नर्सों का कहना है कि वार्ड सिस्टर कोई भी कार्य नहीं करती है। नाम न छापने की शर्त में नर्सों ने बताया जो कार्य वार्ड सिस्टरों का होता है वह भी उन्हें ही करना होता है, ऐसे में वह मरीजों को सही तरीके से नहीं देख पाती है। इससे मरीजों के साथ आए तीमारदार उनके साथ बहसबाजी करने लग जाते हैं। वार्ड सिस्टर कभी कबार ही वार्डोें में आती है। ऐसे में स्टाफ भी कम होने के चलते उन्हें ज्यादा परेशानी उठानी पड़ती है।
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...खेमराज शर्मा।