फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Bilaspur News ›   150-year-old Peepal tree in danger, center of faith destroyed due to road cutting

Bilaspur News: 150 साल पुराने पीपल वृक्ष पर संकट, सड़क कटान से आस्था का केंद्र उजड़ा

Mon, 09 Feb 2026 11:46 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर Updated Mon, 09 Feb 2026 11:46 PM IST
विज्ञापन
150-year-old Peepal tree in danger, center of faith destroyed due to road cutting
चढ़ाऊ गांव के पास सड़क की जद्द में आया पीपल का पेड़। संवाद
मलोथी–बैरी पंजगाईं सड़क पर चडाऊ गांव के पास का है मामला
विज्ञापन


ग्रामीणों ने प्रशासन से की पेड़ को बचाने की मांग

संवाद न्यूज एजेंसी
मलोखर(बिलासपुर)। मलोथी से बैरी पंजगाईं सड़क पर चडाऊ गांव के समीप स्थित करीब 150 वर्ष पुराना पीपल का वृक्ष आज अस्तित्व के संकट से जूझ रहा है। ग्रामीणों के अनुसार यह पीपल केवल एक वृक्ष नहीं, बल्कि वर्षों से आस्था और पूजा का केंद्र रहा है। लोगों का कहना है कि शास्त्रों में पीपल को ब्रह्म का स्वरूप माना गया है, लेकिन सड़क विस्तारीकरण और लापरवाही के चलते यह आस्था स्थल उपेक्षा का शिकार हो गया है।

लोगों ने बताया कि इससे पहले इसी पीपल के साथ एक बरगद का वृक्ष भी मौजूद था, जिसे सड़क चौड़ीकरण के दौरान काट दिया गया। पीपल को बचाने के लिए चौंकड़ा (चौंतड़ा) बनाया गया था, लेकिन वह अब टूट चुका है। सड़क कटान के कारण पीपल की जड़ें चारों तरफ से कट गई हैं और अब वे खोखली हो चुकी हैं। यदि समय रहते मरम्मत और संरक्षण कार्य नहीं किया गया, तो यह ऐतिहासिक पीपल का पेड़ सूख सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क कटान के बाद से अब तक स्थानीय लोग पूजा-अर्चना भी नहीं कर पा रहे हैं। वहीं, पीपल के आसपास पानी के दो पुराने प्राकृतिक पानी के स्रोत भी मौजूद हैं, जो इस स्थान के महत्व को और बढ़ाते हैं। लोगों की मांग है कि इस आस्था केंद्र को रमणीय स्थल के रूप में विकसित किया जाए। प्रशासन से मांग की है कि पीपल को बचाने के लिए चारों तरफ रिटेनिंग वॉल का निर्माण किया जाए और पूजा के लिए सुरक्षित रास्ता बनाया जाए। इस संबंध में हरीश शर्मा, लालमन, जितेंद्र शर्मा, कुमार और शशि सहित अन्य ग्रामीणों ने कहा कि पीपल के वृक्ष को हर हाल में बचाया जाना चाहिए। उनका कहना है कि भीषण गर्मी के दिनों में यह पीपल छांव का बड़ा सहारा बनता है और सड़क किनारे की प्राकृतिक सुंदरता को भी बढ़ाता है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि कोई कदम नहीं उठाए गए, तो एक ऐतिहासिक, धार्मिक और पर्यावरणीय धरोहर हमेशा के लिए नष्ट हो सकती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed