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स्वाइन फ्लू ग्रस्त मरीजों के नजदीक जाने से डर रहे डॉक्टर और नर्सें
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swine flu
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अमर उजाला ब्यूरो
बिलासपुर। स्वाइन फ्लू के बढ़ते हुए मामलों को देखते हुए अपने डॉक्टरों व नर्सों के बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग ने निदेशालय से 100 वैक्सीन भेजने को कहा है, ताकि स्वाइन फ्लू ग्रस्त मरीजों का उपचार करने वाले डॉक्टर व नर्सें इससे बच सकें। अभी तक यहां पर किसी भी डॉक्टर व नर्स का टीकाकरण नहीं किया गया है जिससे वह भी स्वाइन फ्लू ग्रस्त मरीजों के पास जाने से डरने लग गए हैं। बहरहाल अब स्वास्थ्य विभाग ने अपने डॉक्टरों व नर्सों को इस बीमारी से बचाने के लिए 100 टीकों को मांगा हैं, ताकि उन्हें इस बीमारी की चपेट में आने से बचाया जा सके। गौरतलब है कि हिमाचल में ठंड का प्रकोप बढ़ने के साथ-साथ स्वाइन फ्लू का प्रकोप बढ़ना भी शुरू हो गया है। रोजाना मामले अस्पतालों में पहुंच रहे हैं। बिलासपुर अस्पताल में भी तीन बच्चों को संदिग्ध आधार पर भर्ती किया गया है, जहां पर उनका उपचार चल रहा है। जबकि उनके सैंपल भी जांच के लिए भेज दिए गए हैं। हालांकि चिकित्सकों का कहना है कि अगर लोग समझदारी व सावधानी बरतें तो इससे आसानी से बचा जा सकता है। ज्यादातर यह वायरस बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं व अन्य बीमारी से ग्रस्त मरीजों को होता है। स्वाइन फ्लू की चपेट में आने का सबसे ज्यादा खतरा बच्चों के डॉक्टरों व उनकी देखभाल करने वाली नर्सों को होता है। ऐसे में इन सभी को इस वायरस की चपेट में आने से बचाने के लिए एक टीकाकरण किया जाता है जोकि अभी तक नहीं किया गया है लेकिन अब यहां 100 टीकों की मांग निदेशालय से की गई है, ताकि डॉक्टरों व नर्सों का टीकाकरण करके इनके डर को खत्म किया जा सके।
एमओएच डॉ. प्रविंद्र सिंह का कहना है कि 100 टीकों की मांग को लेकर आला अधिकारियों को लिखा गया है। जल्द ही यह टीके उन्हें मुहैया हो जाएंगे, जिसके बाद यह डॉक्टरों व नर्सों को लगा दिए जाएंगे ताकि वह मरीजों का उपचार करने के दौरान वायरस की चपेट में आ सके। --
इनसेट...
एक सप्ताह बाद असर करना शुरू करता है टीकाकरण
जो टीका डॉक्टरों व नर्सों को लगाया जाता है वह एक सप्ताह बाद अपना कार्य करना शुरू करता है। एक बार टीका लग जाने से एक से डेढ़ साल तक स्वाइन फ्लू जैसा वायरस डॉक्टरों व नर्सों को अपनी चपेट में नहीं ले पाता क्योंकि इससे उनमें इस रोग से लड़ने की क्षमता बढ़ जाती है। आम लोगों तक यह टीका इसलिए नहीं पहुंच जाता क्योंकि इस टीके की कीमत पांच से छह हजार रुपये के बीच की है। जो भी डॉक्टर व नर्सें स्वाइन फ्लू ग्रस्त मरीजों को देखते हैं उनका टीकाकरण किया जाता है।
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बिलासपुर। स्वाइन फ्लू के बढ़ते हुए मामलों को देखते हुए अपने डॉक्टरों व नर्सों के बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग ने निदेशालय से 100 वैक्सीन भेजने को कहा है, ताकि स्वाइन फ्लू ग्रस्त मरीजों का उपचार करने वाले डॉक्टर व नर्सें इससे बच सकें। अभी तक यहां पर किसी भी डॉक्टर व नर्स का टीकाकरण नहीं किया गया है जिससे वह भी स्वाइन फ्लू ग्रस्त मरीजों के पास जाने से डरने लग गए हैं। बहरहाल अब स्वास्थ्य विभाग ने अपने डॉक्टरों व नर्सों को इस बीमारी से बचाने के लिए 100 टीकों को मांगा हैं, ताकि उन्हें इस बीमारी की चपेट में आने से बचाया जा सके। गौरतलब है कि हिमाचल में ठंड का प्रकोप बढ़ने के साथ-साथ स्वाइन फ्लू का प्रकोप बढ़ना भी शुरू हो गया है। रोजाना मामले अस्पतालों में पहुंच रहे हैं। बिलासपुर अस्पताल में भी तीन बच्चों को संदिग्ध आधार पर भर्ती किया गया है, जहां पर उनका उपचार चल रहा है। जबकि उनके सैंपल भी जांच के लिए भेज दिए गए हैं। हालांकि चिकित्सकों का कहना है कि अगर लोग समझदारी व सावधानी बरतें तो इससे आसानी से बचा जा सकता है। ज्यादातर यह वायरस बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं व अन्य बीमारी से ग्रस्त मरीजों को होता है। स्वाइन फ्लू की चपेट में आने का सबसे ज्यादा खतरा बच्चों के डॉक्टरों व उनकी देखभाल करने वाली नर्सों को होता है। ऐसे में इन सभी को इस वायरस की चपेट में आने से बचाने के लिए एक टीकाकरण किया जाता है जोकि अभी तक नहीं किया गया है लेकिन अब यहां 100 टीकों की मांग निदेशालय से की गई है, ताकि डॉक्टरों व नर्सों का टीकाकरण करके इनके डर को खत्म किया जा सके।
एमओएच डॉ. प्रविंद्र सिंह का कहना है कि 100 टीकों की मांग को लेकर आला अधिकारियों को लिखा गया है। जल्द ही यह टीके उन्हें मुहैया हो जाएंगे, जिसके बाद यह डॉक्टरों व नर्सों को लगा दिए जाएंगे ताकि वह मरीजों का उपचार करने के दौरान वायरस की चपेट में आ सके। --
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एक सप्ताह बाद असर करना शुरू करता है टीकाकरण
जो टीका डॉक्टरों व नर्सों को लगाया जाता है वह एक सप्ताह बाद अपना कार्य करना शुरू करता है। एक बार टीका लग जाने से एक से डेढ़ साल तक स्वाइन फ्लू जैसा वायरस डॉक्टरों व नर्सों को अपनी चपेट में नहीं ले पाता क्योंकि इससे उनमें इस रोग से लड़ने की क्षमता बढ़ जाती है। आम लोगों तक यह टीका इसलिए नहीं पहुंच जाता क्योंकि इस टीके की कीमत पांच से छह हजार रुपये के बीच की है। जो भी डॉक्टर व नर्सें स्वाइन फ्लू ग्रस्त मरीजों को देखते हैं उनका टीकाकरण किया जाता है।
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