{"_id":"5a81d4074f1c1b9f268b9a40","slug":"141518457863-bilaspur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"बारिश से 26,400 हेक्टेयर गेहूं को मिली संजीवनी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बारिश से 26,400 हेक्टेयर गेहूं को मिली संजीवनी
Updated Mon, 12 Feb 2018 11:41 PM IST
विज्ञापन
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बिलासपुर। सोमवार को हुई बारिश से गेहूं की फसल को संजीवनी मिली है। वहीं किसानों ने भी राहत की सांस ली है। जिले में बारिश न होने के कारण गेहूं की फसल को संकट खड़ा हो गया था। लेकिन सोमवार को हुई बारिश किसानों के लिए वरदान बनकर बरसी है
बिलासपुर जिले में कुल 31, 878 हेक्टेयर भूमि पर विभिन्न प्रकार की फसलें, सब्जियां, फल उगाए जाते हैं। जिले की केवल 5,740 हेक्टेयर भूमि पर ही सिंचाई की सुविधा है। जबकि बाकी की जमीन बारिश पर भरोसे निर्भर है। ऐसे में किसानों को अपनी फसलों की पैदावार के लिए बारिश पर ही निर्भर रहना पड़ता है। जिले में 26, 400 हेक्टेयर भूमि पर गेहूं की फसल उगाई जाती है। इसमें ज्यादातर भूमि बारिश पर निर्भर है। अगर समय पर बारिश न हो तो फसलें बर्बाद हो जाती हैं। पिछले लंबे समय से जिले में बारिश न होने से गेहूं की फसल पर संकट खड़ा हो गया था। वहीं किसानों को भी अपनी आर्थिकी की चिंता सताने लगी थी।
सबसे ज्यादा परेशानी किसानों को अप्पर नयनादेवी क्षेत्र, हरलोग, स्वारघाट, नम्होल, कोटधार, बंदला, लाड़ाघाट में थी। हालांकि कम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में कोहरे से गेहूं को नमी मिल रही थी। इससे पैदावार पर कोई खासा असर नहीं पड़ रहा था। इस बारे में कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉक्टर डीएस पंत का कहना है कि बारिश से किसानों को राहत मिलेगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
बिलासपुर जिले में कुल 31, 878 हेक्टेयर भूमि पर विभिन्न प्रकार की फसलें, सब्जियां, फल उगाए जाते हैं। जिले की केवल 5,740 हेक्टेयर भूमि पर ही सिंचाई की सुविधा है। जबकि बाकी की जमीन बारिश पर भरोसे निर्भर है। ऐसे में किसानों को अपनी फसलों की पैदावार के लिए बारिश पर ही निर्भर रहना पड़ता है। जिले में 26, 400 हेक्टेयर भूमि पर गेहूं की फसल उगाई जाती है। इसमें ज्यादातर भूमि बारिश पर निर्भर है। अगर समय पर बारिश न हो तो फसलें बर्बाद हो जाती हैं। पिछले लंबे समय से जिले में बारिश न होने से गेहूं की फसल पर संकट खड़ा हो गया था। वहीं किसानों को भी अपनी आर्थिकी की चिंता सताने लगी थी।
विज्ञापन
सबसे ज्यादा परेशानी किसानों को अप्पर नयनादेवी क्षेत्र, हरलोग, स्वारघाट, नम्होल, कोटधार, बंदला, लाड़ाघाट में थी। हालांकि कम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में कोहरे से गेहूं को नमी मिल रही थी। इससे पैदावार पर कोई खासा असर नहीं पड़ रहा था। इस बारे में कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉक्टर डीएस पंत का कहना है कि बारिश से किसानों को राहत मिलेगी।
विज्ञापन