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नववर्ष के पहले दिन बिलासपुर ने ओढ़ी धुंध की चादर
Updated Mon, 01 Jan 2018 11:29 PM IST
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- फोटो : amarujala
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बिलासपुर। नववर्ष के पहले ही दिन बिलासपुर ने धुंध की चादर ओढ़ ली। सोमवार सुबह हालत ऐसी हो गई थी कि वाहन चालकों को दस फीट की दूरी तक देख पाना मुश्किल हो रहा था। इसके कारण कई लंबी दूरी की बसें लेट हुईं। वहीं गोबिंदसागर झील आरपार करने वाले लोग भी धुंध के कारण भटकते रहे। बच्चों को भी स्कूल पहुंचने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
हर साल सर्दी के मौसम में बिलासपुर धुंध की चपेट में आ जाता है। यहां तापमान शिमला, कुल्लू, मनाली से भी नीचे चला जाता है। दिसंबर और जनवरी माह में धुंध का प्रकोप सबसे ज्यादा होता है।
ऐसे में अस्पतालों में मरीजों की भी बढ़ोत्तरी होना शुरू हो जाती है। सर्दी, जुकाम, दमा, खांसी, बुखार से पीड़ित मरीज अस्पताल पहुंचते हैं। डॉक्टर भी लोगों को धुंध में घरों से बाहर न निकलने की सलाह देते हैं। इसके अलावा धुंध में सड़क हादसों का खतरा बना रहता है।
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विशेषज्ञ चिकित्सक डॉक्टर सतीश का कहना है कि लोग धुंध में जितना कम हो बाहर निकलें। धुंध में बाहर निकलने से सर्दी, खांसी व श्वास की बीमारियां होने का खतरा बना रहता है।
गोबिंदसागर झील में भटक जाते हैं बोट
धुंध के कारण हालत ऐसी हो जाती है कि कई बार गोबिंदसागर झील में बोट भटक जाते हैं। ऋषिकेश से बिलासपुर की ओर जहां बोट 10 से 15 मिनट में पहुंचता है। वहीं धुंध के कारण गोबिंदसागर झील में बोट भटक जाता है। इसी सफर को पूरा करने में दो से तीन घंटे का समय लग जाता है।
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हर साल सर्दी के मौसम में बिलासपुर धुंध की चपेट में आ जाता है। यहां तापमान शिमला, कुल्लू, मनाली से भी नीचे चला जाता है। दिसंबर और जनवरी माह में धुंध का प्रकोप सबसे ज्यादा होता है।
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ऐसे में अस्पतालों में मरीजों की भी बढ़ोत्तरी होना शुरू हो जाती है। सर्दी, जुकाम, दमा, खांसी, बुखार से पीड़ित मरीज अस्पताल पहुंचते हैं। डॉक्टर भी लोगों को धुंध में घरों से बाहर न निकलने की सलाह देते हैं। इसके अलावा धुंध में सड़क हादसों का खतरा बना रहता है।
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विशेषज्ञ चिकित्सक डॉक्टर सतीश का कहना है कि लोग धुंध में जितना कम हो बाहर निकलें। धुंध में बाहर निकलने से सर्दी, खांसी व श्वास की बीमारियां होने का खतरा बना रहता है।
गोबिंदसागर झील में भटक जाते हैं बोट
धुंध के कारण हालत ऐसी हो जाती है कि कई बार गोबिंदसागर झील में बोट भटक जाते हैं। ऋषिकेश से बिलासपुर की ओर जहां बोट 10 से 15 मिनट में पहुंचता है। वहीं धुंध के कारण गोबिंदसागर झील में बोट भटक जाता है। इसी सफर को पूरा करने में दो से तीन घंटे का समय लग जाता है।