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दस सालों से नहीं हो पाई डॉक्टरों की नियुक्ति
Updated Tue, 24 Oct 2017 11:23 PM IST
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डेमो
- फोटो : डेमो
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झंडूता (बिलासपुर)। झंडूता स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा बढ़ाकर एफआरयू तो कर दिया गया है। लेकिन, इसके बाद सरकार यहां डॉक्टरों की तैनाती करना मानों भूल गई है। सरकार ने स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा 2007 में बढ़ाया था। इसके बाद स्वास्थ्य केंद्र में 30 बिस्तरों की सुविधा मुहैया करवाई गई। वहीं, पांच विशेषज्ञ चिकित्सकों के पद भी स्वीकृत किए गए। लेकिन, दस साल बाद भी यहां चिकित्सकों के पद नहीं भरे जा सके हैं। इस कारण लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा नहीं मिल पा रही है। हालांकि यहां पर एक डॉक्टर डेपुटेशन पर मरीजों की जांच करने पहुंच रहा है। यहां हर रोज 100 से 120 मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं।
30 बिस्तरों वाले अस्पताल में क्षेत्र की एक दर्जन ग्राम पंचायतों की करीब 20 हजार आबादी को घरद्वार पर ही स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया होनी थी। लेकिन, एक दशक बाद भी इस अस्पताल को पांच विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं मिल पाए हैं। अस्पताल खुद ही बीमार चल रहा है तो यह मरीजों का क्या इलाज करेगा।
क्षेत्र में कोई भी अप्रिय घटना हो जाए तो यहां पर प्राथमिक उपचार के बाद मरीजों को रेफर कर दिया जाता है। इससे कई लोग रास्ते में ही समय पर उपचार न मिलने से दम तोड़ देते हैं। क्षेत्र के नेताओं ने कभी भी इस अस्पताल के लिए कोई भी उचित कदम नहीं उठाए। इससे लोग आज भी छोटी-छोटी बीमारी के इलाज के लिए अन्य अस्पतालों को जाने के लिए मजबूर हैं।
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खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजीव गर्ग ने बताया कि अस्पताल में पांच विशेषज्ञ डॉक्टरों के पद स्वीकृत हैं। लेकिन, लंबे समय से पद नहीं भरे गए हैं। रिक्त पदों के बारे में विभाग के उच्च अधिकारियों को अवगत करवाया गया है। अभी यहां पर अस्थाई तौर पर ही डॉक्टरों की सेवाएं मुहैया करवाई जा रही हैं।
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30 बिस्तरों वाले अस्पताल में क्षेत्र की एक दर्जन ग्राम पंचायतों की करीब 20 हजार आबादी को घरद्वार पर ही स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया होनी थी। लेकिन, एक दशक बाद भी इस अस्पताल को पांच विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं मिल पाए हैं। अस्पताल खुद ही बीमार चल रहा है तो यह मरीजों का क्या इलाज करेगा।
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क्षेत्र में कोई भी अप्रिय घटना हो जाए तो यहां पर प्राथमिक उपचार के बाद मरीजों को रेफर कर दिया जाता है। इससे कई लोग रास्ते में ही समय पर उपचार न मिलने से दम तोड़ देते हैं। क्षेत्र के नेताओं ने कभी भी इस अस्पताल के लिए कोई भी उचित कदम नहीं उठाए। इससे लोग आज भी छोटी-छोटी बीमारी के इलाज के लिए अन्य अस्पतालों को जाने के लिए मजबूर हैं।
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खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजीव गर्ग ने बताया कि अस्पताल में पांच विशेषज्ञ डॉक्टरों के पद स्वीकृत हैं। लेकिन, लंबे समय से पद नहीं भरे गए हैं। रिक्त पदों के बारे में विभाग के उच्च अधिकारियों को अवगत करवाया गया है। अभी यहां पर अस्थाई तौर पर ही डॉक्टरों की सेवाएं मुहैया करवाई जा रही हैं।