{"_id":"595151a84f1c1b7c1b8b47ac","slug":"131498501544-bilaspur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"लाखों के कर्ज में डूबे किसान मौत को गले लगाने को मजबूर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लाखों के कर्ज में डूबे किसान मौत को गले लगाने को मजबूर
Updated Mon, 26 Jun 2017 11:55 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रितेश गुलेरिया
बिलासपुर।
हिमाचल में भी अब सरकार की अनदेखी के कारण किसान मौत को गले लगाने को मजबूर हो गए हैं। लाखों के कर्ज में दबे झंडूता के किसान हितेश की मौत ने प्रदेश के किसानों की हालत को बयां कर दिया है। जिला में कुछ समय के भीतर ही किसान की आत्महत्या का यह तीसरा मामला सामने आ चुका है। इससे साफ है कि सरकार की योजनाओं का लाभ प्रदेश के किसानों को नहीं मिल रहा है। किसान इस उम्मीद में बैंक से लाखों का ऋण लेते हैं कि वह अपने परिवार का अच्छी तरह पालन पोषण कर सकेंगे। मगर यही ऋण उनकी जान ले लेता है। सरकार के संबंधित विभाग अपने टारगेट पूरा करने के लिए किसानों से ऐसी योजनाओं के बारे में बरगलाते हैं। जो आगे जाकर उनकी गले की फांस बन जाता है। वहीं हितेश को भी क्या पता था कि परिवार को पालने के लिए लोन लेकर जो ट्रैक्टर उसने खरीदा था, वहीं एक दिन उसकी मौत का कारण बन जाएगा। हितेश से पहले पिछले साल घुमारवीं क्षेत्र का एक 62 वर्षीय किसान भी मौत को गले लगा चुका है। वह भी ऋण अदा न करने के कारण तनाव में आ गया था। इसके बाद बैरी के कुशल चंदेल ने भी कर्ज अदा न होने के कारण अपने पर मिट्टी का तेल डाल कर आत्मदाह कर लिया था। इसके बाद किसानों ने प्रदर्शन भी किया था। मगर परिणाम उसके बाद भी सरकार ने इस संबंध में कोई उचित कार्रवाई नहीं की। ऐसे में प्रदेश किसान ऋण के बोझ तले दबने को मजबूर हैं। स्थानीय ग्राम पंचायत प्रधान किशोरी लाल के अनुसार हितेश उर्फ भोला के ऊपर बैंक का लाखों रुपये का कर्जा था।
फूलों की खेती के नाम पर किसानों से छल
जिला में कुछ समय पहले किसानों को फूलों की खेती के नाम पर संबंधित विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने बरगलाया। इसके झांसे में आकर सैकड़ों किसानों ने पालीहाउस लगाने के लिए लाखों का ऋण ले लिया। मगर बाद में नौणी विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों ने जब जिले का दौरा किया तो पता चला कि बिलासपुर जिले का मौसम फूलों की खेती के लिए माकूल नहीं है। लाखों का ऋण लेने वाले किसान फूलों की खेती करने में असफल रहे और अब उनकी जमीन नीलाम होने की तैयारियां चल रही है। बैंकों से इस संबंध में उन्हें नोटिस जारी किए जा रहे हैं। ऐसे में यह 450 किसान मानसिक तनाव झेलने को मजबूर है। ऐसे में सवाल है कि सरकारी विभाग कोई भी योजना का लाभ किसान को देने से पहले उसे पूरी तरह प्रशिक्षित क्यों नहीं करते ? अगर कोई कारोबार शुरू करवाया जाता है तो कम से कम उसके लिए मार्केट का इंतजाम किया जाना चाहिए। मगर यहां ऐसा कुछ नहीं होता है। यही वजह है कि आज देश का अन्नदाता खुद मोहताज होता जा रहा है।
विज्ञापन
बिलासपुर।
हिमाचल में भी अब सरकार की अनदेखी के कारण किसान मौत को गले लगाने को मजबूर हो गए हैं। लाखों के कर्ज में दबे झंडूता के किसान हितेश की मौत ने प्रदेश के किसानों की हालत को बयां कर दिया है। जिला में कुछ समय के भीतर ही किसान की आत्महत्या का यह तीसरा मामला सामने आ चुका है। इससे साफ है कि सरकार की योजनाओं का लाभ प्रदेश के किसानों को नहीं मिल रहा है। किसान इस उम्मीद में बैंक से लाखों का ऋण लेते हैं कि वह अपने परिवार का अच्छी तरह पालन पोषण कर सकेंगे। मगर यही ऋण उनकी जान ले लेता है। सरकार के संबंधित विभाग अपने टारगेट पूरा करने के लिए किसानों से ऐसी योजनाओं के बारे में बरगलाते हैं। जो आगे जाकर उनकी गले की फांस बन जाता है। वहीं हितेश को भी क्या पता था कि परिवार को पालने के लिए लोन लेकर जो ट्रैक्टर उसने खरीदा था, वहीं एक दिन उसकी मौत का कारण बन जाएगा। हितेश से पहले पिछले साल घुमारवीं क्षेत्र का एक 62 वर्षीय किसान भी मौत को गले लगा चुका है। वह भी ऋण अदा न करने के कारण तनाव में आ गया था। इसके बाद बैरी के कुशल चंदेल ने भी कर्ज अदा न होने के कारण अपने पर मिट्टी का तेल डाल कर आत्मदाह कर लिया था। इसके बाद किसानों ने प्रदर्शन भी किया था। मगर परिणाम उसके बाद भी सरकार ने इस संबंध में कोई उचित कार्रवाई नहीं की। ऐसे में प्रदेश किसान ऋण के बोझ तले दबने को मजबूर हैं। स्थानीय ग्राम पंचायत प्रधान किशोरी लाल के अनुसार हितेश उर्फ भोला के ऊपर बैंक का लाखों रुपये का कर्जा था।
फूलों की खेती के नाम पर किसानों से छल
जिला में कुछ समय पहले किसानों को फूलों की खेती के नाम पर संबंधित विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने बरगलाया। इसके झांसे में आकर सैकड़ों किसानों ने पालीहाउस लगाने के लिए लाखों का ऋण ले लिया। मगर बाद में नौणी विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों ने जब जिले का दौरा किया तो पता चला कि बिलासपुर जिले का मौसम फूलों की खेती के लिए माकूल नहीं है। लाखों का ऋण लेने वाले किसान फूलों की खेती करने में असफल रहे और अब उनकी जमीन नीलाम होने की तैयारियां चल रही है। बैंकों से इस संबंध में उन्हें नोटिस जारी किए जा रहे हैं। ऐसे में यह 450 किसान मानसिक तनाव झेलने को मजबूर है। ऐसे में सवाल है कि सरकारी विभाग कोई भी योजना का लाभ किसान को देने से पहले उसे पूरी तरह प्रशिक्षित क्यों नहीं करते ? अगर कोई कारोबार शुरू करवाया जाता है तो कम से कम उसके लिए मार्केट का इंतजाम किया जाना चाहिए। मगर यहां ऐसा कुछ नहीं होता है। यही वजह है कि आज देश का अन्नदाता खुद मोहताज होता जा रहा है।
विज्ञापन