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कहलूर रिहायत को एक बार फिर से खड़ा करेगी राजकुमारी सुन्नंदा चंद
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अमर उजाला ब्यूरो
बिलासपुर।
कहलूर रियासत के अंतिम राजा राजा आनंद चंद की बेटी राजकुमारी सुनंदा चंद एक बार फिर से अपनी रियासत को खड़ा करने जा रही है। तीन दशक बाद बिलासपुर में स्थायी रूप से रहर्ने आइं राजकुमारी सुनंदा बिलासपुर के विकास के लिए अपनी मुख्य भूमिका निभाना चाहती हैं। सोमवार को अमर उजाला से बातचीत में राजकुमारी सुनंदा चंद ने सार्वजनिक जीवन को लेकर अपनी भावी योजना साझा की।
उन्होंने बताया कि वह अपने पिता की रियासत के लोगों से रूबरू होना चाहती हैं। बिलासपुर शहर को एक नई विकास की राह दिखाना उनका कार्य रहेगा। लंदन में बतौर चिकित्सक के रूप में अपनी सेवाएं देने के बाद अब अपना सारा कार्य छोड़कर वह स्थायी रूप से बिलासपुर आ गई हैं। लोहड़ी के दिन उन्होंने अपनी कुल देवी मां नयना देवी जी के दर्शन किए। नए कार्य की शुरूआत करने के लिए मां का आशीर्वाद भी प्राप्त किया। राजकुमारी सुनंदा ने कहा कि उनका जन्म दिल्ली में हुआ था। जब वह सात साल की हुईं तो उनके पिता स्व. राजा आनंद चंद उनको लेकर लंदन में चले गए थे। वे दस साल की हुईं तो 1983 में उनके पिता व कहलूर रियासत के अंतिम राजा की मृत्यु हो गई थी। राजकुमारी ने कहा कि उनके पिता की अंतिम इच्छा थी कि उनकी मृत्यु होने पर उनका पार्थिव शरीर बिलासपुर में ले जाया जाए। परिवार ने उनका अंतिम संस्कार बिलासपुर में ही किया था। उसके बाद पूरा परिवार वापस लंदन चला गया था। वहीं पर राजकुमारी ने अपनी पढ़ाई पूरी कर लंदन के इंपीरियल कॉलेज से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद लंदन में ही 10 साल तक बतौर चिकित्सक अपनी सेवाएं दीं। उन्होंने कहा कि अब वे अपने शहर में हमेशा के लिए लौट आई हैं। यहां वह लोगों को साथ लेकर जनहित कार्यों में अपना योगदान देना चाहती हैं।
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बिलासपुर।
कहलूर रियासत के अंतिम राजा राजा आनंद चंद की बेटी राजकुमारी सुनंदा चंद एक बार फिर से अपनी रियासत को खड़ा करने जा रही है। तीन दशक बाद बिलासपुर में स्थायी रूप से रहर्ने आइं राजकुमारी सुनंदा बिलासपुर के विकास के लिए अपनी मुख्य भूमिका निभाना चाहती हैं। सोमवार को अमर उजाला से बातचीत में राजकुमारी सुनंदा चंद ने सार्वजनिक जीवन को लेकर अपनी भावी योजना साझा की।
उन्होंने बताया कि वह अपने पिता की रियासत के लोगों से रूबरू होना चाहती हैं। बिलासपुर शहर को एक नई विकास की राह दिखाना उनका कार्य रहेगा। लंदन में बतौर चिकित्सक के रूप में अपनी सेवाएं देने के बाद अब अपना सारा कार्य छोड़कर वह स्थायी रूप से बिलासपुर आ गई हैं। लोहड़ी के दिन उन्होंने अपनी कुल देवी मां नयना देवी जी के दर्शन किए। नए कार्य की शुरूआत करने के लिए मां का आशीर्वाद भी प्राप्त किया। राजकुमारी सुनंदा ने कहा कि उनका जन्म दिल्ली में हुआ था। जब वह सात साल की हुईं तो उनके पिता स्व. राजा आनंद चंद उनको लेकर लंदन में चले गए थे। वे दस साल की हुईं तो 1983 में उनके पिता व कहलूर रियासत के अंतिम राजा की मृत्यु हो गई थी। राजकुमारी ने कहा कि उनके पिता की अंतिम इच्छा थी कि उनकी मृत्यु होने पर उनका पार्थिव शरीर बिलासपुर में ले जाया जाए। परिवार ने उनका अंतिम संस्कार बिलासपुर में ही किया था। उसके बाद पूरा परिवार वापस लंदन चला गया था। वहीं पर राजकुमारी ने अपनी पढ़ाई पूरी कर लंदन के इंपीरियल कॉलेज से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद लंदन में ही 10 साल तक बतौर चिकित्सक अपनी सेवाएं दीं। उन्होंने कहा कि अब वे अपने शहर में हमेशा के लिए लौट आई हैं। यहां वह लोगों को साथ लेकर जनहित कार्यों में अपना योगदान देना चाहती हैं।
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