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ब्राह्मणा कोटलु में बिंदडया में मल्लिका आम तैयार
Updated Sat, 07 Jul 2018 11:10 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
बरठीं(बिलासपुर)। ग्राम पंचायत कोटलु ब्राह्मणा के कोटलु बिंदडया गांव के किसान सुरत राम ने अपने घर के आंगन में मल्लिका आम की नई किस्म पैदा कर ली है। इस आम की खासियत यह है कि इसका पौधा हमेशा छोटे कद का ही रहता है। उसमें प्रति आम का वजन करीब एक किलो होता है। इतना ही नहीं यह आम पकने के बाद करीब एक महीना तक खराब नहीं होता है तथा यह आम दिवाली के आसपास पेड़ पर ही पकता है।
अगर इस आम को तोड़ कर पकाया जाए तब यह पक तो जाता है लेकिन एक महीने तक फिर भी खराब नहीं होता है। बागवान सुरत राम और उनकी पत्नी कौशल्या देवी ने बताया कि इस मल्लिका आम की किस्म के दो पौधे वे सहारनपुर के भेहट नामक स्थान से करीब दस साल पहले लाए थे तथा यह पौधा पहले साल से ही फल देने लग गया था।
उन्होंने बताया कि हर साल यह पेड़ फल दे रहा है तथा हर बार एक पेड़ में करीब पचास से साठ फल दे रहा है। हालांकि पेड़ छोटा है लेकिन यह इतने ज्यादा फलों का भार भी सहन कर रहा है। आज दिन तक न तो उन्होंने इस पेड़ को कोई दवाई का स्प्रे किया है तथा न ही इसको किसी बीमारी ने जकड़ा है। मात्र दो पेड़ों से उनके अपने परिवार का गुजारा भली भांति हो जाता है।
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उन्होंने कहा कि उन्होंने और भी किस्म के आम के पेड़ लगाए हैं लेकिन वे समय पर पक जाते हैं। जबकि मल्लिका आम का स्वाद उनको दिवाली के महीने तक मिलता रहता है।
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बरठीं(बिलासपुर)। ग्राम पंचायत कोटलु ब्राह्मणा के कोटलु बिंदडया गांव के किसान सुरत राम ने अपने घर के आंगन में मल्लिका आम की नई किस्म पैदा कर ली है। इस आम की खासियत यह है कि इसका पौधा हमेशा छोटे कद का ही रहता है। उसमें प्रति आम का वजन करीब एक किलो होता है। इतना ही नहीं यह आम पकने के बाद करीब एक महीना तक खराब नहीं होता है तथा यह आम दिवाली के आसपास पेड़ पर ही पकता है।
अगर इस आम को तोड़ कर पकाया जाए तब यह पक तो जाता है लेकिन एक महीने तक फिर भी खराब नहीं होता है। बागवान सुरत राम और उनकी पत्नी कौशल्या देवी ने बताया कि इस मल्लिका आम की किस्म के दो पौधे वे सहारनपुर के भेहट नामक स्थान से करीब दस साल पहले लाए थे तथा यह पौधा पहले साल से ही फल देने लग गया था।
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उन्होंने बताया कि हर साल यह पेड़ फल दे रहा है तथा हर बार एक पेड़ में करीब पचास से साठ फल दे रहा है। हालांकि पेड़ छोटा है लेकिन यह इतने ज्यादा फलों का भार भी सहन कर रहा है। आज दिन तक न तो उन्होंने इस पेड़ को कोई दवाई का स्प्रे किया है तथा न ही इसको किसी बीमारी ने जकड़ा है। मात्र दो पेड़ों से उनके अपने परिवार का गुजारा भली भांति हो जाता है।
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उन्होंने कहा कि उन्होंने और भी किस्म के आम के पेड़ लगाए हैं लेकिन वे समय पर पक जाते हैं। जबकि मल्लिका आम का स्वाद उनको दिवाली के महीने तक मिलता रहता है।