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जान जोखिम में डाल बसों की छत पर सफर कर रहे नौनिहाल
Updated Fri, 04 May 2018 11:34 PM IST
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बरमाणा (बिलासपुर)। बिलासपुर जिले में बसों में ओवरलोडिंग का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। निजी बसों की छतों पर स्कूली बच्चे सफर करते देखे जा सकते हैं। नूरपुर में हुए दर्दनाक हादसे से भी सबक नहीं लिया जा रहा। निजी बस चालक चंद मुनाफे के लिए बहुमूल्य जानों को जोखिम में डाल रहे हैं।
गौरतलब है कि बरमाणा क्षेत्र के पंजगाईं स्कूल में दूरदराज के क्षेत्रों से बच्चे पढ़ने के लिए आते हैं। जिले की अन्य पाठशालाओं की अपेक्षा इस स्कूल में ज्यादा बच्चे पढ़ते हैं। इस स्कूल में बैरी रजादियां, धार-टटोह, पंजगाईं, खारसी, सोलग के बच्चे पढ़ने आते हैं। लेकिन, विडंबना यह है कि इस सभी ग्रामीण क्षेत्रों के लिए केवल एक ही सरकारी बस है, जो कि दोपहर के समय चलती है। प्राइवेट बसों के समय में भी डेढ़ घंटे का अंतर है। ऐसे में स्कूली बच्चे जल्दी घर पहुंचने के चक्कर में मजबूरी में निजी बसों की छतों पर सफर करते हैं। वे अपनी जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर हैं। जिस दिन सरकारी बस नहीं आती उस दिन तो निजी बस में भेड़-बकरियों की तरह लोगों को बैठाते हैं। इस रूट पर चेकिंग न होने से बस चालक मनमानी करते हैं। जो सरकारी बस आती है वह भी केवल सोलग तक ही जाती है। खारसी व इसके साथ लगते गांवों के बच्चों को मजबूरी में निजी बसों की छतों पर सफर करना पड़ता है। जो भी निजी बसें बैरी से दाड़लाघाट के लिए आती-जाती हैं, उनमें इसी तरह भीड़ होती है।
स्कूली बच्चों का निजी बस की छत पर बैठने का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। एक निजी बस जो सुंदरनगर से दाड़ला जा रही है, उसकी छत पर स्कूली बच्चे बैठे हुए हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिरकार क्यों निजी बस चालक नियमों की अवहेलना करते हुए बच्चों की जान जोखिम में डाल रहे हैं। जहां से बस गुजर रही है, वहां सड़क भी तंग है, पेड़ों की टहनियां भी लटक रही हैं। इनकी चपेट में आने से कोई भी सड़क पर गिरकर घायल हो सकता है।
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गौरतलब है कि बरमाणा क्षेत्र के पंजगाईं स्कूल में दूरदराज के क्षेत्रों से बच्चे पढ़ने के लिए आते हैं। जिले की अन्य पाठशालाओं की अपेक्षा इस स्कूल में ज्यादा बच्चे पढ़ते हैं। इस स्कूल में बैरी रजादियां, धार-टटोह, पंजगाईं, खारसी, सोलग के बच्चे पढ़ने आते हैं। लेकिन, विडंबना यह है कि इस सभी ग्रामीण क्षेत्रों के लिए केवल एक ही सरकारी बस है, जो कि दोपहर के समय चलती है। प्राइवेट बसों के समय में भी डेढ़ घंटे का अंतर है। ऐसे में स्कूली बच्चे जल्दी घर पहुंचने के चक्कर में मजबूरी में निजी बसों की छतों पर सफर करते हैं। वे अपनी जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर हैं। जिस दिन सरकारी बस नहीं आती उस दिन तो निजी बस में भेड़-बकरियों की तरह लोगों को बैठाते हैं। इस रूट पर चेकिंग न होने से बस चालक मनमानी करते हैं। जो सरकारी बस आती है वह भी केवल सोलग तक ही जाती है। खारसी व इसके साथ लगते गांवों के बच्चों को मजबूरी में निजी बसों की छतों पर सफर करना पड़ता है। जो भी निजी बसें बैरी से दाड़लाघाट के लिए आती-जाती हैं, उनमें इसी तरह भीड़ होती है।
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स्कूली बच्चों का निजी बस की छत पर बैठने का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। एक निजी बस जो सुंदरनगर से दाड़ला जा रही है, उसकी छत पर स्कूली बच्चे बैठे हुए हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिरकार क्यों निजी बस चालक नियमों की अवहेलना करते हुए बच्चों की जान जोखिम में डाल रहे हैं। जहां से बस गुजर रही है, वहां सड़क भी तंग है, पेड़ों की टहनियां भी लटक रही हैं। इनकी चपेट में आने से कोई भी सड़क पर गिरकर घायल हो सकता है।
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