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लावारिस पशु बने जान को आफत

Sat, 20 Jan 2018 10:49 PM IST
Updated Sat, 20 Jan 2018 10:49 PM IST
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लावारिस पशु बने जान को आफत
दो साल में 6 लोगों को उतारा मौत के घाट - फोटो : अमर उजाला

अमर उजाला ब्यूरो

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बिलासपुर।
जिला में लावारिस पशुओं के आतंक से लोग सहमे हैं। यह कोई पहला मौका नहीं है जब लावारिस पशु के हमले से किसी की जान गई हो। इससे पहले भी लावारिस पशु जिला के करीब आधा दर्जन से अधिक लोगों को मौत के घाट उतार चुके हैं। जबकि दर्जन भर लोगों को अस्पताल भी पहुंचा चुके हैं। हाईकोर्ट ने पंचायत स्तर पर गोसदन बनाने के आदेश दिए थे लेकिन उन आदेशों पर आज तक अमल नहीं हो पाया।

उल्लेखनीय है कि जिला में लावारिस पशुओं का तादात लगातार बढ़ रही है। जहां गत वर्ष फरवरी महीने में लावारिस सांड ने झंडूता में एक व्यक्ति पर हमला किया था। बरमाणा में भी ऐसे मामले सामने आ चुके हैं। इससे पीड़ित व्यक्ति की मौत हो गई थी। इसके अलावा बिलासपुर में भी लावारिस पशुओं के हमले एक व्यक्ति व्यक्ति की मौत हो चुकी है। इसके अलावा जिला के अलग अलग स्थानों में करीब छह लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं दर्जन भर लोग घायल हो कर अस्पताल पहुंच चुके। लेकिन इसके बाद भी लावारिस पशुओं के लोगों को बचाने के लिए कोई पुख्ता प्रबंधन नहीं हो पाए है।
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ये हैं हाईकोर्ट के आदेश
हाईकोर्ट ने 2015 में अपने आदेश में कहा थ कि लावारिस पशुओं के लिए पंचायत, नगर परिषद स्तर पर गोशालाएं बनाई जाएं। आदेश में यह भी कहा गया था कि पंचायत में लावारिस पशु मिलने पर प्रधान, सचिव, नप क्षेत्र में लावारिस पशु मिलने पर नप अध्यक्ष, कार्यकारी अधिकारी, सड़कों पर लावारिस पशु मिलने पर जेई और एसडीएम और अन्य संबंधित अधिकारियों पर मामला दर्ज किया जाए। लेकिन हाईकोर्ट के आदेशों का आज तक पालन नहीं हो पाया।
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किसानों ने छोड़ दी खेती
लावारिस पशुओं के आतंक के कारण घुमारवीं और झंडूता क्षेत्रों में कई किसानों ने खेती करना तक छोड़ दी है। क्योंकि लावारिस पशु लोगों की फसल को चट कर जा रहे हैं। ऐसे में किसानों को आर्थिक नुकसान हो रहा है। इस कारण सैकड़ों लोगों ने खेती करना बंद कर दी है।

प्रशासन बनाएगा योजना
एडीएम बिलासपुर विनय कुमार का कहना है कि लावारिस पशुओं से लोगों और उनकी फसलों को बचाने के लिए प्रशासन गंभीर है। गोशालाएं भी बनाई गई हैं। लेकिन इसके अलावा स्थाई समाधान के लिए भी प्रशासन प्रयास कर रहा है।


सात गोसदन सेवारत
पशु पालन विभाग सहायक उप निदेशक डॉ. विनोद कुंदी ने बताया कि जिले में सात गोसदन चल रहे हैं। इसमें कुठेड़ा, धार टटोह, लैहरी, बडयालग, झबोला, बलसिहणा सहित सात गोसदन चल रहे हैं। इसके अलावा तीन गो सदन बन कर तैयार हैं। जिसे चलाने के लिए समिति का गठन किया जा रहा है। जैसे ही समिति बनेगी उनका भी संचालन शुरू कर दिया जाएगा।

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