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क्षेत्रीय अस्पताल में 12 दिन बाद भी शुरू नहीं हुई नई लैब
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क्षेत्रीय अस्पताल बिलासपुर की सरकारी लैब के बाहर टेस्ट करवाने के लिए लगी लोगों की भीड़।संवाद
- फोटो : BILASPUR
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बिलासपुर। क्षेत्रीय अस्पताल बिलासपुर में एसआर लैब का करार समाप्त होने के 12 दिन बाद भी नई लैब शुरू नहीं हो पाई है। इससे मरीजों को सैंपल टेस्ट करवाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
अस्पताल प्रबंधन लैब को आज-कल शुरू करने की बात कर रहा है, लेकिन इन आश्वासनों से मरीजों का मर्ज कम होता नहीं दिख रहा।
मरीज टेस्ट करवाने के लिए सरकारी लैब पर ही निर्भर हैं। ऐसे में लैब में दिन प्रतिदिन मरीजों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। भीड़ ज्यादा और समय कम होने के कारण कई मरीजों को बिना टेस्ट करवाए ही वापस जाना पड़ रहा है। वापस जाने वाले मरीज या तो निजी लैब में टेस्ट करवाने को मजबूर हैं या उन्हें अगले दिन का इंतजार करना पड़ रहा है। शनिवार को सरकारी लैब में 152 मरीजों के टेस्ट किए गए। वहीं, सरकारी लैब के बाहर मरीजों के बैठने के लिए उचित सुविधा तक नहीं है। इसके चलते मरीजों को अस्पताल की सीढ़ियों पर बैठना पड़ रहा है।
खाली पेट टेस्ट करवाने वाले मरीजों को एक से डेढ़ घंटे तक इंतजार करना पड़ रहा है। बता दें कि एसआर लैब ने 21 मई से काम बंद कर दिया था। सरकार ने क्रस्ना डायग्नोस्टिक्स के साथ अस्पतालों में टेस्ट सुविधा देने का करार किया है, लेकिन नई कंपनी ने अभी तक कामकाज नहीं संभाला है। हालांकि अस्पताल की सरकारी लैब में टेस्ट किए जा रहे हैं, लेकिन वह दोपहर 12:30 बजे तक ही होते हैं। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संजीव वर्मा ने बताया कि लैब के कमरे की मरम्मत करवाई जा रही है। क्रस्ना डायग्नोस्टिक कंपनी को तीन माह का समय दिया गया है। कंपनी के अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि वह शीघ्र ही अपना काम शुरू कर देंगे।
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अस्पताल प्रबंधन लैब को आज-कल शुरू करने की बात कर रहा है, लेकिन इन आश्वासनों से मरीजों का मर्ज कम होता नहीं दिख रहा।
मरीज टेस्ट करवाने के लिए सरकारी लैब पर ही निर्भर हैं। ऐसे में लैब में दिन प्रतिदिन मरीजों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। भीड़ ज्यादा और समय कम होने के कारण कई मरीजों को बिना टेस्ट करवाए ही वापस जाना पड़ रहा है। वापस जाने वाले मरीज या तो निजी लैब में टेस्ट करवाने को मजबूर हैं या उन्हें अगले दिन का इंतजार करना पड़ रहा है। शनिवार को सरकारी लैब में 152 मरीजों के टेस्ट किए गए। वहीं, सरकारी लैब के बाहर मरीजों के बैठने के लिए उचित सुविधा तक नहीं है। इसके चलते मरीजों को अस्पताल की सीढ़ियों पर बैठना पड़ रहा है।
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खाली पेट टेस्ट करवाने वाले मरीजों को एक से डेढ़ घंटे तक इंतजार करना पड़ रहा है। बता दें कि एसआर लैब ने 21 मई से काम बंद कर दिया था। सरकार ने क्रस्ना डायग्नोस्टिक्स के साथ अस्पतालों में टेस्ट सुविधा देने का करार किया है, लेकिन नई कंपनी ने अभी तक कामकाज नहीं संभाला है। हालांकि अस्पताल की सरकारी लैब में टेस्ट किए जा रहे हैं, लेकिन वह दोपहर 12:30 बजे तक ही होते हैं। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संजीव वर्मा ने बताया कि लैब के कमरे की मरम्मत करवाई जा रही है। क्रस्ना डायग्नोस्टिक कंपनी को तीन माह का समय दिया गया है। कंपनी के अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि वह शीघ्र ही अपना काम शुरू कर देंगे।
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