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इलेक्शन का दौर है नेताओं के वायदे नहीं होते कम...
Updated Mon, 20 Nov 2017 10:16 PM IST
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बिलासपुर। भाषा एवं संस्कृति विभाग कार्यालय बिलासपुर की ओर से संस्कृति भवन में पहाड़ी भाषा को बढ़ावा देने के लिए मासिक कवि, साहित्यिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। साहित्यकारों ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण करके संगोष्ठी का शुभारंभ किया। मंच का संचालन इंद्र सिंह चंदेल ने किया।
संगोष्ठी में सबसे पहले प्रकाश चंद शर्मा ने मां सरस्वती की वंदना की। इसके उपरांत साहित्यकार नरैणु राम हितैषी ने इलेक्शन का दौर है, नेताओं के वायदे नहीं होते कम... राजनीति पर व्यंग्य रचना प्रस्तुत की। अमरनाथ धीमान ने पहाड़ी रचना घराटा रा आटा, बांइरे पाणिया-स्याणा रा साफा... प्रस्तुत की। प्रदीप गुप्ता ने प्याजा री करतूत विषय पर पहाड़ी व्यंग्य रचना प्रस्तुत की। इंद्रेश शर्मा ने राजनीति पर पहाड़ी रचना प्रस्तुत की। प्रकाश चंद शर्मा ने पहाड़ी गीत प्रस्तुत किया। राजपूत देवेंद्र कुमार ने आ गई सर्दी, बारिश-प्रेमिका को प्रेमी की याद सताए... रचना प्रस्तुत की। अवतार कौंडल ने आजादी का आलम छाया हममें भी था..., कविता सिसोदिया ने वर्षा ऋतु सा लगता आया मौसम चुनार का नजारा हो जाता अनोखा चारो ओर..., तृप्ता देवी ने मुसाफिर चल मुसाफिर तुझे निरंतर चलते जाना है..., कौशल्या देवी ने मनुष्य-मनुष्य न बने, तो गम नहीं, मनुष्य दानव न बने यह भी कम नहीं..., कंचन कुमारी ने पहाड़ी गीत बंदले रियां धारा रा नजारा... प्रस्तुत किया। रविंद्र चंदेल ने ढूंढता हूं अस्तित्व शीर्षक से रचना प्रस्तुत की।
इस अवसर पर जिला भाषा अधिकारी नीलम चंदेल ने कहा कि कविता पाठ का एक लक्ष्य होता है समाज को सही राह दिखाना और अपने भावों को अभिव्यक्त करना है। कवियों व लेखकों को सदैव लेखन का कार्य करते हुए समाज में फैली कुरीतियों पर प्रहार करते रहना चाहिए।
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संगोष्ठी में सबसे पहले प्रकाश चंद शर्मा ने मां सरस्वती की वंदना की। इसके उपरांत साहित्यकार नरैणु राम हितैषी ने इलेक्शन का दौर है, नेताओं के वायदे नहीं होते कम... राजनीति पर व्यंग्य रचना प्रस्तुत की। अमरनाथ धीमान ने पहाड़ी रचना घराटा रा आटा, बांइरे पाणिया-स्याणा रा साफा... प्रस्तुत की। प्रदीप गुप्ता ने प्याजा री करतूत विषय पर पहाड़ी व्यंग्य रचना प्रस्तुत की। इंद्रेश शर्मा ने राजनीति पर पहाड़ी रचना प्रस्तुत की। प्रकाश चंद शर्मा ने पहाड़ी गीत प्रस्तुत किया। राजपूत देवेंद्र कुमार ने आ गई सर्दी, बारिश-प्रेमिका को प्रेमी की याद सताए... रचना प्रस्तुत की। अवतार कौंडल ने आजादी का आलम छाया हममें भी था..., कविता सिसोदिया ने वर्षा ऋतु सा लगता आया मौसम चुनार का नजारा हो जाता अनोखा चारो ओर..., तृप्ता देवी ने मुसाफिर चल मुसाफिर तुझे निरंतर चलते जाना है..., कौशल्या देवी ने मनुष्य-मनुष्य न बने, तो गम नहीं, मनुष्य दानव न बने यह भी कम नहीं..., कंचन कुमारी ने पहाड़ी गीत बंदले रियां धारा रा नजारा... प्रस्तुत किया। रविंद्र चंदेल ने ढूंढता हूं अस्तित्व शीर्षक से रचना प्रस्तुत की।
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इस अवसर पर जिला भाषा अधिकारी नीलम चंदेल ने कहा कि कविता पाठ का एक लक्ष्य होता है समाज को सही राह दिखाना और अपने भावों को अभिव्यक्त करना है। कवियों व लेखकों को सदैव लेखन का कार्य करते हुए समाज में फैली कुरीतियों पर प्रहार करते रहना चाहिए।
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