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लोहड़ी पर आज जलेंगे अंगीठे, बंटेगी रेवड़ी
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अमर उजाला ब्यूरो
बिलासपुर। मन्नतों व खुशियों को पूरा करने का पर्व लोहड़ी रविवार को धूमधाम से मनाया जाएगा। हिमाचली सहित पंजाब समाज से जुड़े सभी लोग सामूहिक रूप से एकत्रित होकर लोहड़ी मनाएंगे। जिन लोगों की अभी शादी हुई है या फिर किसी दंपती के घर किसी बच्चे ने जन्म लिया है तो उसके घरों में भव्य तरीके से लोहड़ी का आयोजन किया जाएगा। पारंपरिक तौर पर लोहड़ी फसल की बुवाई और उसकी कटाई से जुड़ा एक विशेष त्योहार है। लोहड़ी के दिन लोग शाम को अग्नि में नए अनाज को डालकर उसकी परिक्रमा लगाकर अपनों की सुख-समृद्धि के लिए मंगलकामना करेंगे।
बिलासपुर के वरिष्ठ साहित्यकार व ज्योतिष कृष्ण शुक्ला ने बताया कि लोहड़ी का अर्थ लोहड़ी पौष के अंतिम दिन यानी माघ संक्रांति से पहली रात को मनाई जाती है। मकर संक्रांति की पूर्ण संध्या पर इस त्योहार का विशेष उल्लास उत्तर भारत के राज्यों में देखने को मिलता है। लोहड़ी शब्द अनेक शब्दों को मिलाकर बनता है, जिसमें ‘ल’ का अर्थ है लकड़ी, ‘ओह’ का अर्थ गोहा होता है, जिसे सूखे उपले कहा जाता है और ‘ड़ी’ का अर्थ होता है रेवड़ी। लोहड़ी के दिन किसी तरह का व्रत नहीं होता है। इस दिन खान-पान और नाच-गाने के साथ उल्लासपूर्वक इस त्योहार का आनंद लिया जाता है।
इनसेट...
सोशल मीडिया पर जमकर दी जा रही बधाइयां
इन दिनों सोशल मीडिया पर लोहड़ी पर्व की जमकर बधाई दी जा रही है। लोग अपने रिश्तेदारों को फोन पर कम तो व्हाट्स एप के जरिए ज्यादा बधाइयां दे रहे हैं। साथ ही लोहड़ी पर्व को लेकर बिलासपुर शहर पूरी तरह से सज गया है। सभी जगहों पर लोगों ने लकड़ी के अंगीठे सजा दिए हैं। ---------------------------------
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बिलासपुर। मन्नतों व खुशियों को पूरा करने का पर्व लोहड़ी रविवार को धूमधाम से मनाया जाएगा। हिमाचली सहित पंजाब समाज से जुड़े सभी लोग सामूहिक रूप से एकत्रित होकर लोहड़ी मनाएंगे। जिन लोगों की अभी शादी हुई है या फिर किसी दंपती के घर किसी बच्चे ने जन्म लिया है तो उसके घरों में भव्य तरीके से लोहड़ी का आयोजन किया जाएगा। पारंपरिक तौर पर लोहड़ी फसल की बुवाई और उसकी कटाई से जुड़ा एक विशेष त्योहार है। लोहड़ी के दिन लोग शाम को अग्नि में नए अनाज को डालकर उसकी परिक्रमा लगाकर अपनों की सुख-समृद्धि के लिए मंगलकामना करेंगे।
बिलासपुर के वरिष्ठ साहित्यकार व ज्योतिष कृष्ण शुक्ला ने बताया कि लोहड़ी का अर्थ लोहड़ी पौष के अंतिम दिन यानी माघ संक्रांति से पहली रात को मनाई जाती है। मकर संक्रांति की पूर्ण संध्या पर इस त्योहार का विशेष उल्लास उत्तर भारत के राज्यों में देखने को मिलता है। लोहड़ी शब्द अनेक शब्दों को मिलाकर बनता है, जिसमें ‘ल’ का अर्थ है लकड़ी, ‘ओह’ का अर्थ गोहा होता है, जिसे सूखे उपले कहा जाता है और ‘ड़ी’ का अर्थ होता है रेवड़ी। लोहड़ी के दिन किसी तरह का व्रत नहीं होता है। इस दिन खान-पान और नाच-गाने के साथ उल्लासपूर्वक इस त्योहार का आनंद लिया जाता है।
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सोशल मीडिया पर जमकर दी जा रही बधाइयां
इन दिनों सोशल मीडिया पर लोहड़ी पर्व की जमकर बधाई दी जा रही है। लोग अपने रिश्तेदारों को फोन पर कम तो व्हाट्स एप के जरिए ज्यादा बधाइयां दे रहे हैं। साथ ही लोहड़ी पर्व को लेकर बिलासपुर शहर पूरी तरह से सज गया है। सभी जगहों पर लोगों ने लकड़ी के अंगीठे सजा दिए हैं। ---------------------------------
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