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Ayurveda day 2025 : शिमला में हजारों साल पुरानी चिकित्सा पद्धति हर रही मरीजों का दर्द, 9,700 मरीजों का उपचार

Tue, 23 Sep 2025 01:00 AM IST
अंकेश डोगरा संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: अंकेश डोगरा Updated Tue, 23 Sep 2025 01:00 AM IST
सार

23 सितंबर को आयुर्वेद दिवस मनाया जा रहा है। इसी कड़ी में छोटा शिमला के सरकारी आयुर्वेदिक अस्पताल में मर्म चिकित्सा, अग्निकर्म, विद्यंग्निकर्म और आलाबु चिकित्सा से मरीजों का उपचार किया जा रहा है। पढ़ें पूरी खबर...

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Ayurveda Day 2025 Thousands of years old medical system in Shimla is relieving patients pain
आयुर्वेदिक हॉस्पिटल छोटा शिमला में पुरानी चिकित्सा पद्धति से लोगों का किया जा रहा उपचार - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

हजारों साल पुरानी चिकित्सा पद्धति मरीजों के लिए मददगार साबित हो रही है। छोटा शिमला के सरकारी आयुर्वेदिक अस्पताल में मर्म चिकित्सा, अग्निकर्म, विद्यंग्निकर्म और आलाबु चिकित्सा से मरीजों का उपचार किया जा रहा है।

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अस्पताल के डॉ. नितिन कश्यप ने बताया कि इस वर्ष अब तक अस्पताल में 9,700 मरीज पहुंचे, जबकि पिछले तीन वर्षों में करीब 50 हजार मरीज लाभान्वित हुए। आयुर्वेदिक उपचार विशेष रूप से हड्डियों और जोड़ों की चोट, गठिया, मांसपेशियों की अकड़न, नसों के दर्द, रीढ़ की समस्याएं, पुरानी सूजन और पुराने दर्द में ज्यादा प्रभावी साबित होता है। यह प्राकृतिक, सुरक्षित और साइड-इफेक्ट मुक्त है।
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मर्म चिकित्सा से मांसपेशियों में लचीलापन आता है और नसों पर तनाव कम होता है। यह तकनीक विशेष रूप से गठिया, मांसपेशियों की अकड़न, रीढ़ की समस्या और पुराने दर्द में प्रभावी है। अग्निकर्म नियंत्रित गर्मी वाली आयुर्वेदिक तकनीक है। यह विशेष रूप से टेनिस एल्बो, एडी की दर्द दूर करने में मदद करती है। अस्पताल में इसका शुल्क 10 रुपए रखा गया है। विद्यंग्निकर्म आयुर्वेद की शल्य चिकित्सा (सर्जिकल) तकनीक है। इससे हड्डियों और जोड़ों की समस्याओं का उपचार होता है। अस्पताल में इसका प्रति सुई 15 रुपये शुल्क है। लंबे समय तक दर्द या चोट से जूझ रहे मरीजों के लिए यह आयुर्वेदिक तकनीक जीवन में सहजता और स्वतंत्रता लौटाने वाली साबित हो रही है।
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आलाबु चिकित्सा में स्थानीय सूजन और मांसपेशियों में जमा अवशिष्ट रक्त को हटाने का काम किया जाता है। इसमें सूजन हटाने, रक्त परिसंचरण सुधारने और मांसपेशियों में लचीलापन बढ़ाने के लिए विशेष तकनीक अपनाई जाती है। इसका प्रति सत्र 150 रुपये शुल्क है।

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