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नाले कर रहे यमुना के आंचल को मैला
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 28 Jul 2016 12:15 AM IST
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नाले कर रहे यमुना के आंचल को मैला
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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शहर के सीवरेज और नालों का दूषित पानी सीधे पश्चिमी यमुना नहर में गिराया जा रहा है। इससे यमुना में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है और इसमें पल रहे जीवों के जीवन संकट में है। कहने को यमुना एक्शन प्लान के तहत शहर में दो ट्रीटमेंट प्लांट लगे हैं, किंतु उनकी क्षमता कम होने पर नालों व सीवरेज का दूषित पानी बिना ट्रीट हुए सीधे यमुना में गिर रहा है।
बता दें कि यमुना एक्शन प्लान के तहत वर्ष 2000 में कैंप के जम्मू कॉलोनी में 25 एमएलडी का ट्रीटमेंट प्लांट लगाया गया था, जबकि वर्ष 2002 में 10 एमएलडी का एक प्लांट बाडीमाजरा पुल के पास लगाया गया था। विभागीय सूत्रों की मानें तो दोनों ट्रीटमेंट प्लांटों पर दबाव बढ़ता जा रहा है। जम्मू कॉलोनी के प्लांट की क्षमता 25 एमएलडी है, जबकि इस पर 28-29 एमएलडी दूषित पानी को साफ करने का बौझ पड़ रहा है। इसी प्रकार बाडीमाजरा पुल के पास लगे प्लांट की क्षमता 10 एमएलडी है, जिसमें मौजूदा समय में 12-13 एमएलडी पानी आ रहा है। क्षमता से ज्यादा गंदा पानी आने पर वह ठीक से ट्रीट नहीं हो पा रहा है।
सीधे नहर में गिर रहा नालों का पानी
पश्चिमी यमुना नहर की पटरी चिट्टा मंदिर रोड पर आजाद नगर से निकलते नाले का दूषित पानी नहर में गिर रहा है। जिस पर कुछ वर्ष पहले सिंचाई विभाग ने आउटलेट लगाया था, किंतु उसे भी लोगों द्वारा ऊपर उठा दिया जाता है। जिस कारण नाले का गंदा पानी कूड़े-कचरे समेत यमुना में मिल रहा है। इसी प्रकार गुरुनानक खालसा कॉलेज से लगती यमुना विहार कॉलोनी से गुजरते नाले का गंदा पानी सीधे यमुना में मिल रहा है। इसी तरह जमना गली के समीप एक नाला सीधे नहर में मिल रहा है। वहीं, जगाधरी-यमुनानगर की विभिन्न कॉलोनियों से बाइपास होकर जम्मू कॉलोनी में पश्चिमी यमुना नहर में मिलते शहर के सबसे बड़े नाले का दूषित पानी भी नहर के पानी को दूषित कर रहा है। नवंबर माह में मुख्यमंत्री मनोहरलाल इन नालों को एसटीपी तक पहुंचाने की घोषणा कर चुके हैं। बावजूद इसके योजना के तहत अभी तक कार्य शुरू नहीं हो पाया है और नाले पहले की तरह यमुना में गिर रहे हैं।
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जलीय जीव-जंतु व भू-जल भी हो रहा प्रदूषित
नहर में गिरते दूषित पानी से सिर्फ नहर का पानी ही प्रदूषित नहीं हो रहा है, बल्कि इससे जलीय जीव-जंतुओं के साथ भू-जल भी प्रदूषित हो रहा है। आसपास के इलाके में खारा व प्रदूषित पानी निकलने का सबसे बड़ा कारण यह भी है। विशेषज्ञों की मानें तो नहर में जब भी पानी कम हो जाता है तो नहर की घाटी में नालों का प्रदूषित पानी बहता है। इसके अलावा विशेष अवसरों पर यमुना की पूजा होती है और लोग श्रद्धा की डुबकी लगाते हैं, लेकिन पानी में गंदगी होने के कारण उनकी श्रद्धा आहत होती है।
वर्जन
नगर निगम व पब्लिक हेल्थ विभाग द्वारा नालों को एसीटीपी तक ले जाने के लिए प्लानिंग की जा रही है। जल्द नालों को एसटीपी की ओर डाईवर्ट की दिया जाएगा।
अरविंद रोहिला, एक्सईएन, जनस्वास्थ्य एवं जलापूर्ति अभियंत्रिकी विभाग।
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बता दें कि यमुना एक्शन प्लान के तहत वर्ष 2000 में कैंप के जम्मू कॉलोनी में 25 एमएलडी का ट्रीटमेंट प्लांट लगाया गया था, जबकि वर्ष 2002 में 10 एमएलडी का एक प्लांट बाडीमाजरा पुल के पास लगाया गया था। विभागीय सूत्रों की मानें तो दोनों ट्रीटमेंट प्लांटों पर दबाव बढ़ता जा रहा है। जम्मू कॉलोनी के प्लांट की क्षमता 25 एमएलडी है, जबकि इस पर 28-29 एमएलडी दूषित पानी को साफ करने का बौझ पड़ रहा है। इसी प्रकार बाडीमाजरा पुल के पास लगे प्लांट की क्षमता 10 एमएलडी है, जिसमें मौजूदा समय में 12-13 एमएलडी पानी आ रहा है। क्षमता से ज्यादा गंदा पानी आने पर वह ठीक से ट्रीट नहीं हो पा रहा है।
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सीधे नहर में गिर रहा नालों का पानी
पश्चिमी यमुना नहर की पटरी चिट्टा मंदिर रोड पर आजाद नगर से निकलते नाले का दूषित पानी नहर में गिर रहा है। जिस पर कुछ वर्ष पहले सिंचाई विभाग ने आउटलेट लगाया था, किंतु उसे भी लोगों द्वारा ऊपर उठा दिया जाता है। जिस कारण नाले का गंदा पानी कूड़े-कचरे समेत यमुना में मिल रहा है। इसी प्रकार गुरुनानक खालसा कॉलेज से लगती यमुना विहार कॉलोनी से गुजरते नाले का गंदा पानी सीधे यमुना में मिल रहा है। इसी तरह जमना गली के समीप एक नाला सीधे नहर में मिल रहा है। वहीं, जगाधरी-यमुनानगर की विभिन्न कॉलोनियों से बाइपास होकर जम्मू कॉलोनी में पश्चिमी यमुना नहर में मिलते शहर के सबसे बड़े नाले का दूषित पानी भी नहर के पानी को दूषित कर रहा है। नवंबर माह में मुख्यमंत्री मनोहरलाल इन नालों को एसटीपी तक पहुंचाने की घोषणा कर चुके हैं। बावजूद इसके योजना के तहत अभी तक कार्य शुरू नहीं हो पाया है और नाले पहले की तरह यमुना में गिर रहे हैं।
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जलीय जीव-जंतु व भू-जल भी हो रहा प्रदूषित
नहर में गिरते दूषित पानी से सिर्फ नहर का पानी ही प्रदूषित नहीं हो रहा है, बल्कि इससे जलीय जीव-जंतुओं के साथ भू-जल भी प्रदूषित हो रहा है। आसपास के इलाके में खारा व प्रदूषित पानी निकलने का सबसे बड़ा कारण यह भी है। विशेषज्ञों की मानें तो नहर में जब भी पानी कम हो जाता है तो नहर की घाटी में नालों का प्रदूषित पानी बहता है। इसके अलावा विशेष अवसरों पर यमुना की पूजा होती है और लोग श्रद्धा की डुबकी लगाते हैं, लेकिन पानी में गंदगी होने के कारण उनकी श्रद्धा आहत होती है।
वर्जन
नगर निगम व पब्लिक हेल्थ विभाग द्वारा नालों को एसीटीपी तक ले जाने के लिए प्लानिंग की जा रही है। जल्द नालों को एसटीपी की ओर डाईवर्ट की दिया जाएगा।
अरविंद रोहिला, एक्सईएन, जनस्वास्थ्य एवं जलापूर्ति अभियंत्रिकी विभाग।