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3 हजार का स्पीड गवर्नर 13 हजार में, ट्रांसपोर्टरों का प्रदर्शन
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 13 Aug 2016 12:08 AM IST
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आरटीए कार्यालय में प्रदर्शन
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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ट्रांसपोर्ट के लिए जारी नई गाइड लाइन में लूट खसोट का आरोप लगाते हुए ट्रांसपोर्टर शुक्रवार को रोड पर उतर आए। ट्रांसपोर्टर का कहना है कि 3 हजार की कीमत वाला स्पीड गवर्नर उनके वाहनों में 13 हजार रुपये में थौंपा जा रहा है। इसके विरोध में ट्रांसपोर्टरों ने आएटीए कार्यालय में जमकर प्रदर्शन किया। सीएम को ज्ञापन भेजकर नई गाइड लाइन वापस लेने की मांग की। दूसरी तरफ हरियाणा उद्योग व्यापार मंडल ने ट्रांसपोर्ट व्यापारियों का शोषण रुकवाने की मांग को लेकर नायब तहसीलदार के माध्यम से केंद्रीय ट्रांसपोर्ट मंत्री को ज्ञापन भेजा। मांग पूरी न होने पर ट्रांसपोर्टरों ने आंदोलन करने की चेतावनी दी।
जिले भर के सैकड़ों ट्रांसपोर्टर शुक्रवार को आरटीए कार्यालय में एकत्रित हुए और सरकार तथा परिवहन विभाग के खिलाफ नारेबाजी की। उसके बाद आरटीए सचिव से बातचीत में ट्रांसपोर्टरों सतपाल सिंह, गुरबाज सिंह संधू, अश्वनी, नसीब सिंह, सुखविंद्र सिंह, संजीव, रमेश अमरीक, रामपाल, अश्वनी, नयीम ने कहा कि उनका जो शोषण किया जा रहा है उसे बंद किया जाए। आरटीए सचिव के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन भी भेजा। ज्ञापन में कहा गया कि आटो डिपर और स्पीड गवर्नर लगाने से बीमे का क्लेम नहीं मिल रहा है, बीमा कंपनी का कहना है कि स्पीड गवर्नर और आटो डिपर की वजह से गाड़ी में कोई भी खराबी आती है तो उसकी जिम्मेदारी हमारी नहीं होगी। कुछ समय पहले सरकार के दिशा निर्देश अनुसार स्पीड गवर्नर गाड़ियों में लगाए गए थे। जिनकी कीमत लगभग तीन हजार रुपये थी, लेकिन अब इनकी कीमत को बढ़ाकर 13 हजार रुपये तक कर दिया गया।
परमिट फीस 2725 से बढ़ाकर 25 हजार की
ट्रांसपोर्टरों ने कहा कि पांच साल की परमिट फीस जो पहले 2725 रुपये थी, उसे अब बढ़ाकर 25 हजार रुपये तक कर दिया गया है। इससे ट्रांसपोर्ट व्यवसाय बंद होने के कगार पर है। सरकार द्वारा जारी इस प्रकार के तुगलकी फरमानों के चलते दो ट्रांसपोर्टरों ने आत्महत्या तक कर ली है। परमिट फीस को पुरानी दरों से ही पास किया जाए।
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निर्धारित गति सीमा से खिलवाड़
ट्रांसपोर्टर्स ने कहा कि स्पीड गवर्नर लगाने से जहां गाड़ियों के बैरिंगों की टूट फूट बढ़ रही है। सरकार द्वारा ट्रक की स्पीड 60 किलोमीटर प्रतिघंटा निर्धारित की गई है। लेकिन जो स्पीड़ गवर्नर लगाए जा रहे है। उसमें ट्रक की गति 80 किलो मीटर प्रतिघंटा तक निर्धारित है।
वर्जन
शुक्रवार सुबह कुछ ट्रांसपोर्टरों ने इस संबंध में उनसे बातचीत की और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन दिया। वे इस संबंध में उच्च अधिकारियों से बात करेंगे। उच्च अधिकारियों के जो निर्देश आएंगे, उसी के तहत कार्य किया जाएगा। फिलहाल तो सरकार के आए फरमानों के तहत वाहनों में स्पीड गवर्नर लगाए जाए रहे है।
- देवेंद्र कौशिक, सचिव, आरटीए।
व्यापार मंडल ने भी खोला मोर्चा, केंद्र को भेजा ज्ञापन
यमुनानगर। उद्योग व्यापार मंडल ट्रांसपोर्ट संघ ने भी शुक्रवार को ट्रांसपोर्टर्स के शोषण को लेकर रोष जताया। संघ के पदाधिकारियों ने नायब तहसीलदार कृष्ण कुमार को केंद्रीय ट्रांसपोर्ट मंत्री नितिन गडकरी के नाम ज्ञापन देकर ट्रांसपोर्ट उद्योग की समस्याओं को दूर करने और व्यापारियों के हो रहे शोषण को रुकवाने की मांग की।
ट्रांसपोर्ट संघ के शहरी अध्यक्ष तारा चंद सैनी, मंडल के प्रदेशाध्यक्ष महेंद्र मित्तल ने कहा कि प्रदेश परिवहन मंत्रालय और विभाग द्वारा जन सुरक्षा के हित के नाम पर लिए गए कथित फैसलों से ट्रांसपोर्ट वर्ग असंतोष हैं। जिस कंपनी को आटो डिपर लगाने का ठेका दिया गया है, वह अधिक कीमत वसूल रही है। जबकी बाजार भाव पांच सौ रुपये से लेकर एक हजार तक है। लेकिन आरटीओ विभाग द्वारा गाडी की फिटनेस के दौरान जबरदस्ती 4500 रुपये से लेकर पांच हजार रुपये तक डिपर लगाने के आदेश दिए गए हैं। उन्होंने मांग की कि ऐसे काम के ठेके की बजाय खुले बाजार में सुरक्षा मानकों को पूरा करने वाली कंपनियों के उपकरण लगवाने की खुली छूट कर दी जाए। जिससे वाहन मालिकों का शोषण न हो। मौके पर प्रदेश महासचिव संजय मित्तल, विक्रम चौहान, विनय कुमार, नवनीत राणा, सनमित सिंह, दीपक बडोला, भूपिंदर मल्होत्रा, भारत अरोड़ा, जसविंद्र सिंह, मनीष, नरेश शर्मा कैथल, देवराज इस्माइलाबाद, तारा चंद सैनी, शिव कुमार अग्रवाल आदि उपस्थित थे।
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जिले भर के सैकड़ों ट्रांसपोर्टर शुक्रवार को आरटीए कार्यालय में एकत्रित हुए और सरकार तथा परिवहन विभाग के खिलाफ नारेबाजी की। उसके बाद आरटीए सचिव से बातचीत में ट्रांसपोर्टरों सतपाल सिंह, गुरबाज सिंह संधू, अश्वनी, नसीब सिंह, सुखविंद्र सिंह, संजीव, रमेश अमरीक, रामपाल, अश्वनी, नयीम ने कहा कि उनका जो शोषण किया जा रहा है उसे बंद किया जाए। आरटीए सचिव के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन भी भेजा। ज्ञापन में कहा गया कि आटो डिपर और स्पीड गवर्नर लगाने से बीमे का क्लेम नहीं मिल रहा है, बीमा कंपनी का कहना है कि स्पीड गवर्नर और आटो डिपर की वजह से गाड़ी में कोई भी खराबी आती है तो उसकी जिम्मेदारी हमारी नहीं होगी। कुछ समय पहले सरकार के दिशा निर्देश अनुसार स्पीड गवर्नर गाड़ियों में लगाए गए थे। जिनकी कीमत लगभग तीन हजार रुपये थी, लेकिन अब इनकी कीमत को बढ़ाकर 13 हजार रुपये तक कर दिया गया।
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परमिट फीस 2725 से बढ़ाकर 25 हजार की
ट्रांसपोर्टरों ने कहा कि पांच साल की परमिट फीस जो पहले 2725 रुपये थी, उसे अब बढ़ाकर 25 हजार रुपये तक कर दिया गया है। इससे ट्रांसपोर्ट व्यवसाय बंद होने के कगार पर है। सरकार द्वारा जारी इस प्रकार के तुगलकी फरमानों के चलते दो ट्रांसपोर्टरों ने आत्महत्या तक कर ली है। परमिट फीस को पुरानी दरों से ही पास किया जाए।
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निर्धारित गति सीमा से खिलवाड़
ट्रांसपोर्टर्स ने कहा कि स्पीड गवर्नर लगाने से जहां गाड़ियों के बैरिंगों की टूट फूट बढ़ रही है। सरकार द्वारा ट्रक की स्पीड 60 किलोमीटर प्रतिघंटा निर्धारित की गई है। लेकिन जो स्पीड़ गवर्नर लगाए जा रहे है। उसमें ट्रक की गति 80 किलो मीटर प्रतिघंटा तक निर्धारित है।
वर्जन
शुक्रवार सुबह कुछ ट्रांसपोर्टरों ने इस संबंध में उनसे बातचीत की और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन दिया। वे इस संबंध में उच्च अधिकारियों से बात करेंगे। उच्च अधिकारियों के जो निर्देश आएंगे, उसी के तहत कार्य किया जाएगा। फिलहाल तो सरकार के आए फरमानों के तहत वाहनों में स्पीड गवर्नर लगाए जाए रहे है।
- देवेंद्र कौशिक, सचिव, आरटीए।
व्यापार मंडल ने भी खोला मोर्चा, केंद्र को भेजा ज्ञापन
यमुनानगर। उद्योग व्यापार मंडल ट्रांसपोर्ट संघ ने भी शुक्रवार को ट्रांसपोर्टर्स के शोषण को लेकर रोष जताया। संघ के पदाधिकारियों ने नायब तहसीलदार कृष्ण कुमार को केंद्रीय ट्रांसपोर्ट मंत्री नितिन गडकरी के नाम ज्ञापन देकर ट्रांसपोर्ट उद्योग की समस्याओं को दूर करने और व्यापारियों के हो रहे शोषण को रुकवाने की मांग की।
ट्रांसपोर्ट संघ के शहरी अध्यक्ष तारा चंद सैनी, मंडल के प्रदेशाध्यक्ष महेंद्र मित्तल ने कहा कि प्रदेश परिवहन मंत्रालय और विभाग द्वारा जन सुरक्षा के हित के नाम पर लिए गए कथित फैसलों से ट्रांसपोर्ट वर्ग असंतोष हैं। जिस कंपनी को आटो डिपर लगाने का ठेका दिया गया है, वह अधिक कीमत वसूल रही है। जबकी बाजार भाव पांच सौ रुपये से लेकर एक हजार तक है। लेकिन आरटीओ विभाग द्वारा गाडी की फिटनेस के दौरान जबरदस्ती 4500 रुपये से लेकर पांच हजार रुपये तक डिपर लगाने के आदेश दिए गए हैं। उन्होंने मांग की कि ऐसे काम के ठेके की बजाय खुले बाजार में सुरक्षा मानकों को पूरा करने वाली कंपनियों के उपकरण लगवाने की खुली छूट कर दी जाए। जिससे वाहन मालिकों का शोषण न हो। मौके पर प्रदेश महासचिव संजय मित्तल, विक्रम चौहान, विनय कुमार, नवनीत राणा, सनमित सिंह, दीपक बडोला, भूपिंदर मल्होत्रा, भारत अरोड़ा, जसविंद्र सिंह, मनीष, नरेश शर्मा कैथल, देवराज इस्माइलाबाद, तारा चंद सैनी, शिव कुमार अग्रवाल आदि उपस्थित थे।