फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Yamuna Nagar News ›   yamunanagar,health, maileriya,worker, loss

मलेरिया के डंक से स्वास्थ्य विभाग सुन्न

Thu, 11 Aug 2016 12:05 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Thu, 11 Aug 2016 12:05 AM IST
विज्ञापन
yamunanagar,health, maileriya,worker, loss
पानी में मच्छर पनप रहे हैं। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
मलेरिया फैलाने वाले मच्छरों के डंक से पीड़ितों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। अब तक जहां मलेरिया के 200 केस पॉजिटिव मिल चुके हैं, वहीं डेंगू का एक केस भी कंफर्म हो चुका है। स्वास्थ्य विभाग इनसे निपटने का मादा रखता है, लेकिन उसकी स्थिति जंग में बिना हथियारों के सैनिकों जैसी है। दरअसल जिले में मलेरिया स्टाफ की भारी कमी है। दबी जुबान में अधिकारी भी मान रहे हैं कि ऐसी स्थिति में मलेरिया से निपटना काफी मुश्किल है।
विज्ञापन

बारिश के बाद जगह-जगह व खाली प्लाटों में पानी जमा हो रहा है। निकासी न होने के कारण पानी में मच्छर पनप रहे हैं। इन मच्छरों के काटने से लोग बीमार हो रहे हैं। इन दिनों मलेरिया का प्रकोप तो बढ़ ही रहा है, डेंगू का खतरा भी बढ़ गया है।
विज्ञापन


स्टाफ नहीं पूरा, कैसे रोकें
मलेरिया बीमारी मच्छरों के काटने से होती है। इस बीमारी से ग्रसित होने पर व्यक्ति को बुखार आता है। अक्सर पीड़ित मलेरिया को सामान्य बुखार मानकर अपना इलाज करता रहता है। ग्रामीण क्षेत्रों में मलेरिया के मरीज स्वास्थ्य केंद्रों तक कम ही पहुंच पाते हैं। ऐसे में मलेरिया स्टाफ की मदद से मलेरिया रोगियों का पता लगाया जाता है।  जिले में मलेरिया स्टाफ की भारी कमी होने से शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में मलेरिया रोगियों की पहचान का काम बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। ऐसे में जिले में मलेरिया रोगियों की सही संख्या सामने नहीं आ पा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में मलेरिया होने पर भी पीड़ित झोलाछाप डाक्टरों से बुखार की दवा ले रहे हैं, जो कि उनके लिए घातक हो सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


एमपीएचडबल्यू की 99 पोस्ट, 87 खाली
मलेरिया स्टाफ में सबसे अहम मल्टी पर्पज हेल्थ वर्कर्स हैं। एमपीएचडब्ल्यू फील्ड में जाकर लोगों के रक्त के नमूने लेकर स्लाइड्स बनाते हैं, जिससे मलेरिया रोगियों का पता चलता है। जरूरत के हिसाब से 120 एमपीएचडब्ल्यू चाहिए, लेकिन जिले में एमपीएचडब्ल्यू की कुल 99 पोस्ट हैं, जिनमें से 87 खाली पड़ी हैं। मलेरिया का प्रकोप बढ़ने पर कुरुक्षेत्र व करनाल से 10 एमपीएचडब्ल्यू डेपुटेशन पर जिले में बुलाए गए हैं, जो कि सिर्फ एक महीने के लिए आए हैं।

एमपीएचएस की 26 में से 21 पोस्ट वेकेंट
मलेरिया स्टाफ में मल्टी पर्पस हेल्थ सुपरवाइजर का भी अहम रोल है। ये सुपरवाइजर एमपीएचडब्ल्यू को निर्देशित करते रहते हैं। इनकी देखरेख में मलेरिया का इलाज किया जाता है। ये तब तक मरीज की निगरानी करते हैं, जब तक वह पूरी तरह ठीक न हो जाए। जिले में 30 एमपीएचएस की जरूरत है, लेकिन 26 पोस्ट मंजूर की गई हैं, जिनमें से 21 खाली पड़ी है।

मच्छरों की पहचान करने वाला कोई नहीं
किस इलाके में कौन से मच्छरों का प्रकोप है, इनसेक्ट कोलेक्टर की मदद से इसका पता चलता है। इनसेक्ट कोलेक्टर फील्ड में जाकर मच्छरों को पकड़ते हैं और फिर उनकी पहचान करते हैं। जिले में इनसेक्ट कोलेक्टर की एक पोस्ट है, जो कि कई सालों से वेेकेंट है।

हद है.., ये पद भी खाली
असिस्टेंट मलेरिया आफिसर की एक पोस्ट है, जो कि खाली पड़ी है। वहीं, सीनियर मलेरिया इंस्पेक्टर की दो पोस्ट है और दोनों ही वेकेंट हैं। इसके अलावा मेडिकल आफिसर, बायोलॉजिस्ट व स्वास्थ्य सहायक के एक-एक पद है और तीनों ही खाली पड़े हैं।


वर्जन-
यह सही है कि मलेरिया स्टाफ काफी कम है। हमने उच्चाधिकारियों से स्टाफ पूरा करने के लिए लैटर लिखा है। एमपीएचडब्ल्यू की सबसे अधिक जरूरत है। उम्मीद है कि जल्द स्टाफ बढ़ाया जाएगा।
डॉ रमेश, सिविल सर्जन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed