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टूटने लगी पश्चिमी यमुना नहर की पटरी, आधा दर्जन गांवों पर संकट
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 16 Jun 2016 12:18 AM IST
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यमुना
- फोटो : ब्यूरो
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यमुनानगर। पश्चिमी यमुना नहर के किनारे बनी पटरी में दरारें आने से आधा दर्जन गांवों के डूबने का संकट खड़ा हो गया है। यदि समय रहते इस पटरी की मरम्मत नहीं कराई गई तो जलस्तर बढ़ने पर पटरी ढह सकती है। पटरी ढहने से जहां एक गांव का अस्तित्व मिट सकता है, वहीं इस समेत करीब आधा दर्जनों गांव और सैकड़ों एकड़ किसानों की फसल तबाह हो सकती है। प्री मानसून की पहली बरसात से ही पटरी में दरार आने से ग्रामीणों को हर वक्त पटरी के टूटने का भय सता रहा है।
प्री मानसून की पहली ही बरसात से बुड़िया पुल के नजदीक पश्चिमी यमुना नहर किनारे बनी पटरी में दरारें आ गई। वहीं कई स्थानों पर छेद हो गए। हालांकि बीते वर्ष प्रशासन की ओर से पटरी की मरम्मत के नाम पर जरा से पत्थर लगाकर लीपालोपी की गई थी। लेकिन ये लीपालोपी भी हल्की बूंदाबांदी में ही टूटकर यमुना नहर में ढह गई। यदि पटरी टूटी तो पश्चिमी यमुना नहर का पानी शहजादपुर की टपरियां (डैंकडिया वाला), माली माजरा, भोगपुर, भोगपुर माजरी सहित करीब आधा दर्जन गांव में तबाही मचा सकता है। वहीं सैकड़ों एकड़ फसल अलग से तबाह होगी। ग्रामीणों द्वारा पटरी को पक्का करने की मांग को लेकर कई बार डीसी व अन्य अधिकारियों को लिखित में शिकायत दी। लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला है।
- गांव में जाने के लिए नहीं एक भी पक्का मार्ग, पटरी को किया जाए पक्का :
शहजादपुर के पूर्व सरपंच बिशना राम, नंबरदार प्रेमचंद, पंच रमेश, बलदेव, जगमाल, अजमेर सिंह, भगतराम, बृजपाल आदि ने बताया कि सरकार हर गांव तक सड़क बनाए जाने के खोखले वादे कर रही है। लेकिन आज तक गांव शहजादपुर की टपरियां में जाने के लिए एक भी पक्का रास्ता नहीं है। उनका गांव प्रदेश का पहला ऐसा गांव होगा, जिसमें जाने के लिए पक्की सड़क नहीं है। उन्होंने पश्चिमी यमुना नहर किनारे बनी पटरी पर पक्की सड़क बनवाने की मांग को लेकर डीसी को शिकायत दी थी। पक्की सड़क बनने से जहां ग्रामीणों को आने जाने के लिए पक्का मार्ग मिल जाएगा, वहीं पटरी पक्की होने से पानी की तबाही का डर भी नहीं रहेगा।
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तो मिट जाएगा गांव का अस्तित्व :
ग्रामीणों ने बताया कि यदि पटरी टूटने से पानी की तबाही आई तो सबसे पहले शहदजादपुर ग्राम पंचायत के डैंकड़िया वाला का अस्तित्व मिट जाएगा। वहीं काफी जानमाल व आर्थिक नुकसान होगा। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि समय रहते इसका समाधान किया जाए।
बरसात में स्कूल नहीं जाते बच्चे :
गांव जाने के लिए पक्की सड़क न होने पर डैंकड़िया वाला के बच्चे नहर की पटरी से होकर स्कूल आते-जाते हैं। बरसात में बच्चों के स्कूल जाने का कोई अन्य रास्ता नहीं है। बरसात में पटरी पर जहां कीचड़ हो जाता है, वहीं पटरी टूटने का खतरा बना रहता है। इस डर से ग्रामीण अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजते हैं।
वर्जन :::::::
बुड़िया पुल के नजदीक पटरी का मौके पर जाकर मुआयना किया जाएगा। जांच में यदि पटरी में दरारें आई हुई मिली या टूटी हुई पाई गई तो उसकी मरम्मत करा दी जाएगी। पटरी पर सड़क बनाने का कार्य पीडब्ल्यूडी के अंडर आता है।
- राजेश यादव, एसडीओ, सिंचाई विभाग।
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प्री मानसून की पहली ही बरसात से बुड़िया पुल के नजदीक पश्चिमी यमुना नहर किनारे बनी पटरी में दरारें आ गई। वहीं कई स्थानों पर छेद हो गए। हालांकि बीते वर्ष प्रशासन की ओर से पटरी की मरम्मत के नाम पर जरा से पत्थर लगाकर लीपालोपी की गई थी। लेकिन ये लीपालोपी भी हल्की बूंदाबांदी में ही टूटकर यमुना नहर में ढह गई। यदि पटरी टूटी तो पश्चिमी यमुना नहर का पानी शहजादपुर की टपरियां (डैंकडिया वाला), माली माजरा, भोगपुर, भोगपुर माजरी सहित करीब आधा दर्जन गांव में तबाही मचा सकता है। वहीं सैकड़ों एकड़ फसल अलग से तबाह होगी। ग्रामीणों द्वारा पटरी को पक्का करने की मांग को लेकर कई बार डीसी व अन्य अधिकारियों को लिखित में शिकायत दी। लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला है।
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- गांव में जाने के लिए नहीं एक भी पक्का मार्ग, पटरी को किया जाए पक्का :
शहजादपुर के पूर्व सरपंच बिशना राम, नंबरदार प्रेमचंद, पंच रमेश, बलदेव, जगमाल, अजमेर सिंह, भगतराम, बृजपाल आदि ने बताया कि सरकार हर गांव तक सड़क बनाए जाने के खोखले वादे कर रही है। लेकिन आज तक गांव शहजादपुर की टपरियां में जाने के लिए एक भी पक्का रास्ता नहीं है। उनका गांव प्रदेश का पहला ऐसा गांव होगा, जिसमें जाने के लिए पक्की सड़क नहीं है। उन्होंने पश्चिमी यमुना नहर किनारे बनी पटरी पर पक्की सड़क बनवाने की मांग को लेकर डीसी को शिकायत दी थी। पक्की सड़क बनने से जहां ग्रामीणों को आने जाने के लिए पक्का मार्ग मिल जाएगा, वहीं पटरी पक्की होने से पानी की तबाही का डर भी नहीं रहेगा।
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तो मिट जाएगा गांव का अस्तित्व :
ग्रामीणों ने बताया कि यदि पटरी टूटने से पानी की तबाही आई तो सबसे पहले शहदजादपुर ग्राम पंचायत के डैंकड़िया वाला का अस्तित्व मिट जाएगा। वहीं काफी जानमाल व आर्थिक नुकसान होगा। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि समय रहते इसका समाधान किया जाए।
बरसात में स्कूल नहीं जाते बच्चे :
गांव जाने के लिए पक्की सड़क न होने पर डैंकड़िया वाला के बच्चे नहर की पटरी से होकर स्कूल आते-जाते हैं। बरसात में बच्चों के स्कूल जाने का कोई अन्य रास्ता नहीं है। बरसात में पटरी पर जहां कीचड़ हो जाता है, वहीं पटरी टूटने का खतरा बना रहता है। इस डर से ग्रामीण अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजते हैं।
वर्जन :::::::
बुड़िया पुल के नजदीक पटरी का मौके पर जाकर मुआयना किया जाएगा। जांच में यदि पटरी में दरारें आई हुई मिली या टूटी हुई पाई गई तो उसकी मरम्मत करा दी जाएगी। पटरी पर सड़क बनाने का कार्य पीडब्ल्यूडी के अंडर आता है।
- राजेश यादव, एसडीओ, सिंचाई विभाग।