{"_id":"57e96c084f1c1bbb6f574010","slug":"yamuna-nagar-rice-barise","type":"story","status":"publish","title_hn":"खरीद के इंतजार में भीगा साढ़े छह हजार क्विंटल धान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
खरीद के इंतजार में भीगा साढ़े छह हजार क्विंटल धान
yamuna nagar
Updated Tue, 27 Sep 2016 12:12 AM IST
विज्ञापन
barice
- फोटो : yamunanagar
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सोमवार को हुई बरसात से मंडियों में खुले में रखे सैकड़ों एकड़ धान भीग गये। इस बारिश ने उन किसानों की चिंता भी बढ़ा दी, जो धान कटाई कर चुके हैं और धान को मंडी में ले जाने की तैयारी कर रहे हैं।
किसानों के लिए चिंता की बात यह है कि प्रशासन ने एक अक्तूबर से धान की खरीद शुरू करने का एलान किया है। ऐसे में अगले चार दिनों तक मंडियों में आया धान पूरी तरह भगवान के रहमोकरम पर ही है। दोपहर बाद बिलासपुर, छछरौली व खिजराबाद क्षेत्र में बरसात हुई। बिलासपुर व छछरौली में अधिक बरसात होने से यहां खुले में रखा धान भीग गया।
बिलासपुर मंडी में डेढ़ हजार क्विंटल धान भीगा
बिलासपुर। बिलासपुर मंडी में जिस समय बरसात हुई, उस समय करीब डेढ़ हजार क्विंटल धान खुले में पड़ा था। करीब आधा घंटे हुई बारिश से खुले में रखा धान पूरी तरह भीग गया। बरसात में शाहपुर गांव के किसान अशोक का 30 क्विंटल, बिलासपुर के राकेश का 35 क्विंटल, अहडवाला के संजीव का 32 क्विंटल, तुंबी के संजीव का 90 क्विंटल व बनकट के विक्रम का 60 क्विंटल धान खराब हो गया।
विज्ञापन
इसके अलावा दर्जनों अन्य किसानों का धान भीग गया। एकाएक हुई बरसात से किसान जब तक धान को बचाते, तब तक धान पूरी तरह भीग चुका था। गौरतलब है कि मंडी में प्रतिदिन सैकड़ों क्विंटल धान पहुंच रहा है। मंडी में एक हजार क्विटल से अधिक धान आ चुका है। किसानों ने अपने धान को फड़ों व सड़कों पर सूखने के लिए डाला हुआ है। मौजूदा समय में मंडी में मौजूद लगभग 31 व्यापारियों में एक के पास भी धान को सुखाने के लिए जगह नहीं बची है।
किसान राम कुमार, अशोक कुमार व रणदीप सिंह का कहना है पहले लेबर की वजह से धान की फसल की कटाई में देरी होती थी। अब वे पिछले दो वर्ष से कंबाइन से गेहूं की फसल की कटाई कर रहे हैं, जिससे एक दिन में वे अपने सारी फसल की कटाई करके मंडी में ले आते है। अब तक खरीद शुरू न होने से किसानों को अपने धान की चिंता सता रही है।
-छछरौली मंडियों में भीगा पांच हजार क्विंटल धान-
छछरौली। बरसात से छछरौली अनाज मंडी में नई व पुरानी दो मंडियां हैं। दोनों मंडियों में करीब 10 हजार क्विंटल धान आ चुका है। इसमें से करीब पांच हजार क्विंटल धान खुले में पड़ा है। बरसात से यह धान भीग गया। बरसात होते ही किसान व आढती धान को बचाने के लिए उस पर तिरपाल डालने लगे। लेकिन खुले में इतना अधिक धान पड़ा था कि तिरपाल कम पड़ गई।
अनाज मंडी प्रधान जगमाल सिंह शेरपुर ने बताया कि मंडी धान की आवक दो सप्ताह से हो रही है। मंडी के फड़ धान से भर चुके हैं। इस बारिश से किसानों को काफी नुकसान हुआ है। यदि खरीद जल्द शुरू न हुई तो मौसम को देखते हुए किसानों को काफी नुकसान हो जाएगा। किसान कर्मबीर, धर्मबीर, रामकिशन, मैनपाल, राजेश व राजन ने बताया कि वह एक हफ्ते से धान लेकर मंडी में पड़े है। वे धान की खरीद शुरू होने का इंतजार कर रहे थे। लेकिन बरसात ने उनके धान को पूरी तरह भिगो दिया।
धान की आवक हुई तेज, सरकारी खरीद शुरू नहीं
सरस्वती नगर। अनाज मंडी मुस्तफाबाद में धान की आवक तेज होने से मंडी की सड़कों तक पर धान बिछा पड़ा है। सरकारी खरीद एक अक्तूबर से शुरू होनी है, मगर उससे पहले करीब अढाई लाख कट्टा अनाज मंडी में पहुंच जाएगा। खरीद शुरू न होने के कारण किसान बहुत परेशान है।
क्षेत्र के किसान महिंद्र सिंह, राम कुमार, रमेश कुमार, गुरमीत का कहना कि सरकार के आदेशानुसार 15 जून से धान लगाने का समय होता है। उनके अनुसार भी अगर 90 दिन फसल की पकाई को लगते है, तो 15 सितंबर से सरकार द्वारा खरीद शुरू कर देनी चाहिए। मार्केट कमेटी के सचिव राजीव ने बताया कि अब तक करीब 60000 क्विटंल धान मंडी में पहुंच चुका है।
मंडी में मूलभूत सुविधाएं नदारद
अनाज मंडी में मूलभूत सुविधाओं की कमी भी आढ़तियों व किसानों के लिए समस्या बनी हुई है। अनाज मंडी में न तो कोई शैड है, न पक्के फड्ड और न ही चार दिवारी। किसानों के लिए कोई रेस्ट हाउस तक नही है। मुस्तफाबाद अनाज मंडी लाखों रुपये की मार्केट फीस हर वर्ष देती है। लेकिन सुविधाओं के नाम पर शून्य है। अनाज मंडी के आढ़ती मुनीष गोयल, सुरेंद्र कुमार, नरेश सैनी का कहना है कि धान की आवक को देखते हुए सरकार को शीध्र्र खरीद शुरू करनी चाहिए या धान को शैलर में भेजने की व्यवस्था करनी चाहिए। आढ़तियों का कहना है कि अनाज मंडी अभी से अटनी शुरू हो गई है। सोमवार को हुई बुंदाबांदी से किसानों को परेशानियां उठानी पड़ी। किसानों का कहना है कि बीते वर्ष 25 सितंबर को खरीद शुरू हो गई थी। इसलिए उन्हें आस थी कि इस बार 26 सितंबर से खरीद शुरू हो जाएगी।
विज्ञापन
किसानों के लिए चिंता की बात यह है कि प्रशासन ने एक अक्तूबर से धान की खरीद शुरू करने का एलान किया है। ऐसे में अगले चार दिनों तक मंडियों में आया धान पूरी तरह भगवान के रहमोकरम पर ही है। दोपहर बाद बिलासपुर, छछरौली व खिजराबाद क्षेत्र में बरसात हुई। बिलासपुर व छछरौली में अधिक बरसात होने से यहां खुले में रखा धान भीग गया।
विज्ञापन
बिलासपुर मंडी में डेढ़ हजार क्विंटल धान भीगा
बिलासपुर। बिलासपुर मंडी में जिस समय बरसात हुई, उस समय करीब डेढ़ हजार क्विंटल धान खुले में पड़ा था। करीब आधा घंटे हुई बारिश से खुले में रखा धान पूरी तरह भीग गया। बरसात में शाहपुर गांव के किसान अशोक का 30 क्विंटल, बिलासपुर के राकेश का 35 क्विंटल, अहडवाला के संजीव का 32 क्विंटल, तुंबी के संजीव का 90 क्विंटल व बनकट के विक्रम का 60 क्विंटल धान खराब हो गया।
विज्ञापन
इसके अलावा दर्जनों अन्य किसानों का धान भीग गया। एकाएक हुई बरसात से किसान जब तक धान को बचाते, तब तक धान पूरी तरह भीग चुका था। गौरतलब है कि मंडी में प्रतिदिन सैकड़ों क्विंटल धान पहुंच रहा है। मंडी में एक हजार क्विटल से अधिक धान आ चुका है। किसानों ने अपने धान को फड़ों व सड़कों पर सूखने के लिए डाला हुआ है। मौजूदा समय में मंडी में मौजूद लगभग 31 व्यापारियों में एक के पास भी धान को सुखाने के लिए जगह नहीं बची है।
किसान राम कुमार, अशोक कुमार व रणदीप सिंह का कहना है पहले लेबर की वजह से धान की फसल की कटाई में देरी होती थी। अब वे पिछले दो वर्ष से कंबाइन से गेहूं की फसल की कटाई कर रहे हैं, जिससे एक दिन में वे अपने सारी फसल की कटाई करके मंडी में ले आते है। अब तक खरीद शुरू न होने से किसानों को अपने धान की चिंता सता रही है।
-छछरौली मंडियों में भीगा पांच हजार क्विंटल धान-
छछरौली। बरसात से छछरौली अनाज मंडी में नई व पुरानी दो मंडियां हैं। दोनों मंडियों में करीब 10 हजार क्विंटल धान आ चुका है। इसमें से करीब पांच हजार क्विंटल धान खुले में पड़ा है। बरसात से यह धान भीग गया। बरसात होते ही किसान व आढती धान को बचाने के लिए उस पर तिरपाल डालने लगे। लेकिन खुले में इतना अधिक धान पड़ा था कि तिरपाल कम पड़ गई।
अनाज मंडी प्रधान जगमाल सिंह शेरपुर ने बताया कि मंडी धान की आवक दो सप्ताह से हो रही है। मंडी के फड़ धान से भर चुके हैं। इस बारिश से किसानों को काफी नुकसान हुआ है। यदि खरीद जल्द शुरू न हुई तो मौसम को देखते हुए किसानों को काफी नुकसान हो जाएगा। किसान कर्मबीर, धर्मबीर, रामकिशन, मैनपाल, राजेश व राजन ने बताया कि वह एक हफ्ते से धान लेकर मंडी में पड़े है। वे धान की खरीद शुरू होने का इंतजार कर रहे थे। लेकिन बरसात ने उनके धान को पूरी तरह भिगो दिया।
धान की आवक हुई तेज, सरकारी खरीद शुरू नहीं
सरस्वती नगर। अनाज मंडी मुस्तफाबाद में धान की आवक तेज होने से मंडी की सड़कों तक पर धान बिछा पड़ा है। सरकारी खरीद एक अक्तूबर से शुरू होनी है, मगर उससे पहले करीब अढाई लाख कट्टा अनाज मंडी में पहुंच जाएगा। खरीद शुरू न होने के कारण किसान बहुत परेशान है।
क्षेत्र के किसान महिंद्र सिंह, राम कुमार, रमेश कुमार, गुरमीत का कहना कि सरकार के आदेशानुसार 15 जून से धान लगाने का समय होता है। उनके अनुसार भी अगर 90 दिन फसल की पकाई को लगते है, तो 15 सितंबर से सरकार द्वारा खरीद शुरू कर देनी चाहिए। मार्केट कमेटी के सचिव राजीव ने बताया कि अब तक करीब 60000 क्विटंल धान मंडी में पहुंच चुका है।
मंडी में मूलभूत सुविधाएं नदारद
अनाज मंडी में मूलभूत सुविधाओं की कमी भी आढ़तियों व किसानों के लिए समस्या बनी हुई है। अनाज मंडी में न तो कोई शैड है, न पक्के फड्ड और न ही चार दिवारी। किसानों के लिए कोई रेस्ट हाउस तक नही है। मुस्तफाबाद अनाज मंडी लाखों रुपये की मार्केट फीस हर वर्ष देती है। लेकिन सुविधाओं के नाम पर शून्य है। अनाज मंडी के आढ़ती मुनीष गोयल, सुरेंद्र कुमार, नरेश सैनी का कहना है कि धान की आवक को देखते हुए सरकार को शीध्र्र खरीद शुरू करनी चाहिए या धान को शैलर में भेजने की व्यवस्था करनी चाहिए। आढ़तियों का कहना है कि अनाज मंडी अभी से अटनी शुरू हो गई है। सोमवार को हुई बुंदाबांदी से किसानों को परेशानियां उठानी पड़ी। किसानों का कहना है कि बीते वर्ष 25 सितंबर को खरीद शुरू हो गई थी। इसलिए उन्हें आस थी कि इस बार 26 सितंबर से खरीद शुरू हो जाएगी।