{"_id":"58582c724f1c1bea7fe39412","slug":"yamuna-nagar-kash-ki-killat-jari","type":"story","status":"publish","title_hn":" दूर नहीं हुई बैंकों में कैश की किल्लत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दूर नहीं हुई बैंकों में कैश की किल्लत
amar ujala beuro yamunanagar
Updated Tue, 20 Dec 2016 12:22 AM IST
विज्ञापन
c
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बैंकों में कैश की किल्लत खत्म ही नहीं हो रही है। दिसंबर महीने के तीसरे सप्ताह की शुरुआत में भी कैश न मिलने से लोगों को परेशानियां झेलनी पड़ी। कैंप के स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में कैश ही नहीं आया, जबकि सिंडिकेट बैंक में लांच टाइम तक ही कैश खत्म हो गया। ऐसे में उपभोक्ताओं को निराश होकर लौटना पड़ा।
बैंकों में उपभोक्ता कैश लेने के लिए घंटों लाइन में लगे रहे, लेकिन उसके बाद भी उन्हें दो से छह हजार रुपये ही मिल पाए। पीएनबी का एटीएम भी चला, लेकिन तकनीकि खराबी की वजह से एक घंटे बाद ही बंद हो गया। जिस कारण एटीएम की लाइन में भी लगे उपभोक्ताओं के हाथ निराशा ही लगी।
दो घंटे लगे बैलेंस चेक करने में,: शीलावंती
कैंप निवासी शीला वंती को बैलेंस चेक करने में ही दो घंटे लग गए और उन्हें निराश होकर लौटना पड़ा। शीला वंती ने बताया कि पीएनबी बैंक में उसकी पेंशन आती हैं। सोमवार को बेटे के साथ पीएनबी में 12 बजे पहुंच गई। यहां उसे बैलेंस चेक करने में ही दो घंटे लग गए। पास बुक में एंट्री करवा कर पता चला कि उनकी पेंशन नहीं आई है। ऐसे में उन्हें परेशान होकर वापस जाना पड़ा।
विज्ञापन
कैश न आने से यूं ही लौटना पड़ा: ब्रह्म सिंह
गुलाब नगर निवासी ब्रह्म सिंह ने बताया कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में कैश लेने आए थे। यहां आकर पता चला कि बैंक में सोमवार को कैश ही नहीं आया। ऐसे में उन्होंने बैंक में बैठ कर करीब घंटाभर इंतजार किया, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। ब्रह्म सिंह ने बताया कि उसे दवाइयां व घर खर्च के लिए कैश की जरूरत है। अब फिर से मंगलवार को आना पड़ेगा।
दो घंटे कैश आने का किया इंतजार : धर्मवीर
पटेल नगर निवासी धर्मवीर ने बताया कि पेंशन निकलवाने के लिए आया था, लेकिन बैंक में कैश ही नहीं आया। वह बैंक में 12 बजे पहुंच गया था और दो बजे तक बैठा रहा। दो बजे अधिकारियों ने बताया कि अब कैश आने की संभावना भी नहीं है। जिसके बाद उसने घर लौटने का निर्णय लिया। धर्मवीर ने बताया कि उसे दवा के लिए पैसों की बहुत जरूरत है।
और यादगार के लिए नोट को लैमिनेट ही करवा लिया:
केंद्र सरकार ने पांच सौ और हजार के नोट को अमान्य करार दे दिया। जिसके बाद नोट चलन से बाहर हो गए। अब ये नोट जल्द ही इतिहास बन जाएंगे। ऐसे मेें रादौर रोड कैंप निवासी दीपक अनेजा ने पांच सौ रुपये के नोट को लेमिनेट करवा कर अपने पास संजोय लिया। दीपक ने बताया कि कुछ दिन बाद पांच सौ का नोट पूरी तरह से बंद हो जाएगा। ऐसे में आने वाली पीढ़ी को नोट दिखाएंगे कि पहले पांच सौ रुपये का ऐसा नोट चलन में थे, जोकि भाजपा सरकार ने बंद कर दिया। दुकानदार दीपक नोटबंदी के फैसले पर केंद्र सरकार का समर्थन करते हैं। वह कहते है कि नोटबंदी से भ्रष्टाचार खत्म होगा और काले धन पर भी लगाम लगेगी। हालांकि शुरू में लोगों को परेशानी हो रही है, लेकिन जल्द ही यह समस्या खत्म हो जाएगी। जिसके बाद लोगों को इस निर्णय का फायदा भी मिलेगा।
एक घंटे में बंद हुआ एटीएम, निराश होकर लौटे उपभोक्ता
रादौर रोड पर पंजाब नेशनल बैंक के एटीएम में पौने तीन बजे कैश डाला गया। कैश वैन देखते ही एटीएम के बाहर लोगों की भीड़ लग गई। करीब तीन बजे एटीएम से कैश निकासी शुरू हो गई। एटीएम में पांच-पांच सौ रुपये के नोटों की निकासी होने लगी। मंडेबर गांव निवासी प्रदीप ने बताया कि एटीएम से पांच-पांच सौ रुपये निकाल रहे हैं और कुल निकासी 25 सौ रुपये हुई है। करीब एक घंटे बाद एटीएम में तनकीकि खराबी आ गई। जिसके बाद गार्ड ने मशीन खराब होने की जानकारी अधिकारियों को दी। मगर अधिकारियों ने बताया कि सुबह ही मशीन ठीक हो पाएगी। जिसके बाद एटीएम बंद कर दिया गया। लोगों ने बताया कि कुछ दिन पहले भी एटीएम खराब हो गया था। तब भी लोगों को परेशानी उठानी पड़ी थी।
लाइन में भी लगे, नहीं मिली पेंशन: सुभाष चंद्र
कैंप निवासी सुभाष चंद्र ने बताया कि सिंडिकेट बैंक में पेंशन आती है। करीब दो बजे बैंक पहुंचा था। एक घंटे तक बैंक की लाइन में लगे रहे। इसी बीच बैंक अधिकारियों ने बताया कि कैश खत्म हो गया, अब पेंशन का भुगतान मंगलवार सुबह किया जाएगा। जिस कारण वह घर लौटना पड़ा। जो लोग लंच से पहले बैंक में चले गए थे, उन्हें एक घंटे बाद दो-दो हजार रुपये भुगतान दिया गया।
साढ़े चार घंटे का इंतजार, मिले सिर्फ दो हजार:
रणजीत कालोनी निवासी राजेश मेहता को चार घंटे लाइन में लगना पड़ा। इतनी मशक्कत के बाद भी सिर्फ दो हजार रुपये की नगदी मिल पाई। राजेश ने बताया कि सुबह 11 बजे बैंक लाइन में लगा था। करीब दो बजे वह बैंक के अंदर पहुंच गया। इसी बीच अधिकारियों ने बताया कि कैश खत्म हो गया, जो लोग अंदर हैं, उन्हें ही कैश मिलेगा। दस बजे अधिकारी लंच के लिए चले गए और लाइन में लगे उपभोक्ताओं को इंतजार करने के लिए बोला गया। लंच के बाद अधिकारियों ने कैश बांटना शुरू किया और उसे साढ़े तीन बजे भुगतान मिला। इतनी जद्दोजहद के बाद भी उसे सिर्फ दो हजार रुपये कैश मिला, जबकि उसे कम से कम पांच हजार रुपये की जरुरत थी।
विज्ञापन
बैंकों में उपभोक्ता कैश लेने के लिए घंटों लाइन में लगे रहे, लेकिन उसके बाद भी उन्हें दो से छह हजार रुपये ही मिल पाए। पीएनबी का एटीएम भी चला, लेकिन तकनीकि खराबी की वजह से एक घंटे बाद ही बंद हो गया। जिस कारण एटीएम की लाइन में भी लगे उपभोक्ताओं के हाथ निराशा ही लगी।
विज्ञापन
दो घंटे लगे बैलेंस चेक करने में,: शीलावंती
कैंप निवासी शीला वंती को बैलेंस चेक करने में ही दो घंटे लग गए और उन्हें निराश होकर लौटना पड़ा। शीला वंती ने बताया कि पीएनबी बैंक में उसकी पेंशन आती हैं। सोमवार को बेटे के साथ पीएनबी में 12 बजे पहुंच गई। यहां उसे बैलेंस चेक करने में ही दो घंटे लग गए। पास बुक में एंट्री करवा कर पता चला कि उनकी पेंशन नहीं आई है। ऐसे में उन्हें परेशान होकर वापस जाना पड़ा।
विज्ञापन
कैश न आने से यूं ही लौटना पड़ा: ब्रह्म सिंह
गुलाब नगर निवासी ब्रह्म सिंह ने बताया कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में कैश लेने आए थे। यहां आकर पता चला कि बैंक में सोमवार को कैश ही नहीं आया। ऐसे में उन्होंने बैंक में बैठ कर करीब घंटाभर इंतजार किया, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। ब्रह्म सिंह ने बताया कि उसे दवाइयां व घर खर्च के लिए कैश की जरूरत है। अब फिर से मंगलवार को आना पड़ेगा।
दो घंटे कैश आने का किया इंतजार : धर्मवीर
पटेल नगर निवासी धर्मवीर ने बताया कि पेंशन निकलवाने के लिए आया था, लेकिन बैंक में कैश ही नहीं आया। वह बैंक में 12 बजे पहुंच गया था और दो बजे तक बैठा रहा। दो बजे अधिकारियों ने बताया कि अब कैश आने की संभावना भी नहीं है। जिसके बाद उसने घर लौटने का निर्णय लिया। धर्मवीर ने बताया कि उसे दवा के लिए पैसों की बहुत जरूरत है।
और यादगार के लिए नोट को लैमिनेट ही करवा लिया:
केंद्र सरकार ने पांच सौ और हजार के नोट को अमान्य करार दे दिया। जिसके बाद नोट चलन से बाहर हो गए। अब ये नोट जल्द ही इतिहास बन जाएंगे। ऐसे मेें रादौर रोड कैंप निवासी दीपक अनेजा ने पांच सौ रुपये के नोट को लेमिनेट करवा कर अपने पास संजोय लिया। दीपक ने बताया कि कुछ दिन बाद पांच सौ का नोट पूरी तरह से बंद हो जाएगा। ऐसे में आने वाली पीढ़ी को नोट दिखाएंगे कि पहले पांच सौ रुपये का ऐसा नोट चलन में थे, जोकि भाजपा सरकार ने बंद कर दिया। दुकानदार दीपक नोटबंदी के फैसले पर केंद्र सरकार का समर्थन करते हैं। वह कहते है कि नोटबंदी से भ्रष्टाचार खत्म होगा और काले धन पर भी लगाम लगेगी। हालांकि शुरू में लोगों को परेशानी हो रही है, लेकिन जल्द ही यह समस्या खत्म हो जाएगी। जिसके बाद लोगों को इस निर्णय का फायदा भी मिलेगा।
एक घंटे में बंद हुआ एटीएम, निराश होकर लौटे उपभोक्ता
रादौर रोड पर पंजाब नेशनल बैंक के एटीएम में पौने तीन बजे कैश डाला गया। कैश वैन देखते ही एटीएम के बाहर लोगों की भीड़ लग गई। करीब तीन बजे एटीएम से कैश निकासी शुरू हो गई। एटीएम में पांच-पांच सौ रुपये के नोटों की निकासी होने लगी। मंडेबर गांव निवासी प्रदीप ने बताया कि एटीएम से पांच-पांच सौ रुपये निकाल रहे हैं और कुल निकासी 25 सौ रुपये हुई है। करीब एक घंटे बाद एटीएम में तनकीकि खराबी आ गई। जिसके बाद गार्ड ने मशीन खराब होने की जानकारी अधिकारियों को दी। मगर अधिकारियों ने बताया कि सुबह ही मशीन ठीक हो पाएगी। जिसके बाद एटीएम बंद कर दिया गया। लोगों ने बताया कि कुछ दिन पहले भी एटीएम खराब हो गया था। तब भी लोगों को परेशानी उठानी पड़ी थी।
लाइन में भी लगे, नहीं मिली पेंशन: सुभाष चंद्र
कैंप निवासी सुभाष चंद्र ने बताया कि सिंडिकेट बैंक में पेंशन आती है। करीब दो बजे बैंक पहुंचा था। एक घंटे तक बैंक की लाइन में लगे रहे। इसी बीच बैंक अधिकारियों ने बताया कि कैश खत्म हो गया, अब पेंशन का भुगतान मंगलवार सुबह किया जाएगा। जिस कारण वह घर लौटना पड़ा। जो लोग लंच से पहले बैंक में चले गए थे, उन्हें एक घंटे बाद दो-दो हजार रुपये भुगतान दिया गया।
साढ़े चार घंटे का इंतजार, मिले सिर्फ दो हजार:
रणजीत कालोनी निवासी राजेश मेहता को चार घंटे लाइन में लगना पड़ा। इतनी मशक्कत के बाद भी सिर्फ दो हजार रुपये की नगदी मिल पाई। राजेश ने बताया कि सुबह 11 बजे बैंक लाइन में लगा था। करीब दो बजे वह बैंक के अंदर पहुंच गया। इसी बीच अधिकारियों ने बताया कि कैश खत्म हो गया, जो लोग अंदर हैं, उन्हें ही कैश मिलेगा। दस बजे अधिकारी लंच के लिए चले गए और लाइन में लगे उपभोक्ताओं को इंतजार करने के लिए बोला गया। लंच के बाद अधिकारियों ने कैश बांटना शुरू किया और उसे साढ़े तीन बजे भुगतान मिला। इतनी जद्दोजहद के बाद भी उसे सिर्फ दो हजार रुपये कैश मिला, जबकि उसे कम से कम पांच हजार रुपये की जरुरत थी।