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गुब्बारे की तरह चंद सांसों में ही फूल जाते है कुछ लोग : तरुण सागर
amar ujala beuro yamunanagar
Updated Mon, 05 Dec 2016 11:59 PM IST
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- फोटो : amar ujala
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क्रांतिकारी राष्ट्रीय जैन संत श्री 108 तरुण सागर महाराज के शहर आगमन पर सोमवार को विशाल शोभा यात्रा निकाली गई। मॉडल कालोनी स्थित श्री शांतिनाथ दिगंबर चैतात्य के सभागार में मुनि तरुण सागर महाराज का धूमधाम से स्वागत किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रधान सुभाष जैन और संचालन पुनीत गोल्डी जैन ने किया। सुभाष जैन ने बताया कि क्रांतिकारी मुनि श्री का शहर में आगमन हो रहा है यह हमारे लिए सौभाग्य की बात है। शोभा यात्रा जगाधरी से चल रेलवे रोड से होती हुई मधु चौक, प्यारा चौक होते हुए दिगंबर जैन मंदिर सभागार पहुंची। यहां मुनि श्री तरुण सागर महाराज का उपस्थित जन समूह ने जोरदार स्वागत किया।
मुनि सागर ने कहा कि जैन मूलमंत्र है। उन्होंने कहा कि ण्मोकार और अहंकार दो विपरीत ध्रुव है। आज के इंसान का भोजन ही तामसिक नहीं हुआ बल्कि उसकी प्रार्थना भी तामसिक हो गई है। उन्होंने कहा कि एक बार पाप और पुण्य में विवाद हो गया। पुण्य कहता है कि मैं बड़ा हूं और पाप कहता है कि मैं बड़ा हूँ। उन्होंने आगे कहा कि जब मच्छर के काटने से बुखार आ सकता है तो संत के श्रीमुख से निकली वाणी से जीवन में निखार क्यों नहीं आ सकता है। कुछ लोग गुब्बारे की तरह होते है जो चंद सांसों में ही फूल जोते है।
उन्हें जरा सी शोहरत मिलती है तो अपनी औकात भूल जाते है। बच्चा पैदा होता है तो उसका पहला कपड़ा लंगोट होता है, लंगोट में कोई जेब नहीं होती और आखरी कपड़ा कफन होता है और कफन में भी कोई जेब नहीं होती है तो इंसान पैसा कमाने के लिए इतनी कटर-फटर क्यों करता है। मुनि श्री के स्वागत समारोह में दर्शन लाल जैन, आनंद जैन, चक्रेश जैन, गौरव जैन, प्रमोद जैन, मुकेश जैन, संजीव जैन, गौतम जैन, रमेश जैन, राजेन्द्र जैन, अनिल जैन, सुशील जैन, गौरव जैन आदि मौजूद रहे।
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मुनि सागर ने कहा कि जैन मूलमंत्र है। उन्होंने कहा कि ण्मोकार और अहंकार दो विपरीत ध्रुव है। आज के इंसान का भोजन ही तामसिक नहीं हुआ बल्कि उसकी प्रार्थना भी तामसिक हो गई है। उन्होंने कहा कि एक बार पाप और पुण्य में विवाद हो गया। पुण्य कहता है कि मैं बड़ा हूं और पाप कहता है कि मैं बड़ा हूँ। उन्होंने आगे कहा कि जब मच्छर के काटने से बुखार आ सकता है तो संत के श्रीमुख से निकली वाणी से जीवन में निखार क्यों नहीं आ सकता है। कुछ लोग गुब्बारे की तरह होते है जो चंद सांसों में ही फूल जोते है।
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उन्हें जरा सी शोहरत मिलती है तो अपनी औकात भूल जाते है। बच्चा पैदा होता है तो उसका पहला कपड़ा लंगोट होता है, लंगोट में कोई जेब नहीं होती और आखरी कपड़ा कफन होता है और कफन में भी कोई जेब नहीं होती है तो इंसान पैसा कमाने के लिए इतनी कटर-फटर क्यों करता है। मुनि श्री के स्वागत समारोह में दर्शन लाल जैन, आनंद जैन, चक्रेश जैन, गौरव जैन, प्रमोद जैन, मुकेश जैन, संजीव जैन, गौतम जैन, रमेश जैन, राजेन्द्र जैन, अनिल जैन, सुशील जैन, गौरव जैन आदि मौजूद रहे।
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