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विकास तभी संभव, जब हम जरूरतों को करें कम: मिश्रा
amar ujala beuro yamunanagar
Updated Wed, 28 Sep 2016 11:59 PM IST
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- फोटो : yamunanagar
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डीएवी गर्ल्स कॉलेज में गांधी स्टडी सेंटर द्वारा गांधी ऑन डवेलपमेंट विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी हुई।
इसमें गांधीयन मेमोरियल म्यूजियम एंड लाइब्रेरी दिल्ली के डिप्टी डायरेक्टर प्रो. अनिल दत्त मिश्रा मुख्या वक्ता रहे। कॉलेज प्रिंसीपल डॉ. सुषमा आर्य, वुमन स्टडी सेंटर की डायरेक्टर डॉ. विश्व मोहिनी व मानवाधिकार विभागाध्यक्ष डॉ. मलकीत सिंह ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की।
डॉ. अनिल दत्त मिश्रा ने कहा कि विकास की अंधी दौड़ में तकनीक की बात तो हो रही है, लेकिन नैतिक मूल्यों की नहीं। 70 सालों में लोग कितने विकसित हुए हैं, इससे सभी भली-भांति परिचित हैं। देश में फूड प्रोडक्शन बढ़ने के साथ कुपोषण की समस्या बढ़ रही है। गांधी के मुताबिक विकास तभी संभव है, जब हम अपनी जरूरतों को कम करेंगे।
विकास नीचे से ऊपर की ओर होना चाहिए। विकास में सामाजिक न्याय बेहद जरूरी है। डॉ. मिश्रा ने गांधी के संदर्भ में विकास के प्री-मॉर्डन, मॉर्डन तथा पोस्ट मॉर्डन मॉडल का बेहद खूबसूरत तरीके से वर्णन किया। इसकी सभी ने सराहना की। गांधी के मुताबिक जब तक आखरी व्यक्ति तक विकास नहीं पहुंचेगा, तब तक सही मायने में विकास नहीं होगा।
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गांधी ने हमेशा स्वराज पर बल दिया। गांधीयन एंड पीस स्टडीज सेंटर पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ से आए प्रो. एमएल शर्मा ने कहा कि आज हम सभी उपभोक्ता बनकर रह गए हैं, लेकिन हमें जरूरत के मुताबिक ही चीजों का इस्तेमाल करना चाहिए। गांधी ने हमेशा ग्रामीण स्वराज की बात की। आज बाजार के जरिए सामान व देश पर नियंत्रण की साजिश हो रही है।
औद्योगिकरण की अंधाधुंध विकास के चलते ग्रामीण परिवेश को नष्ट किया जा रहा है। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे महात्मा गांधी को जीवन में उतारकर स्वदेशी चीजों का ज्यादा से ज्यादा प्रयोग करें। तभी गांधी के विकास का मॉडल पूरी तरह प्रासांगिक हो सकेगा।
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इसमें गांधीयन मेमोरियल म्यूजियम एंड लाइब्रेरी दिल्ली के डिप्टी डायरेक्टर प्रो. अनिल दत्त मिश्रा मुख्या वक्ता रहे। कॉलेज प्रिंसीपल डॉ. सुषमा आर्य, वुमन स्टडी सेंटर की डायरेक्टर डॉ. विश्व मोहिनी व मानवाधिकार विभागाध्यक्ष डॉ. मलकीत सिंह ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की।
डॉ. अनिल दत्त मिश्रा ने कहा कि विकास की अंधी दौड़ में तकनीक की बात तो हो रही है, लेकिन नैतिक मूल्यों की नहीं। 70 सालों में लोग कितने विकसित हुए हैं, इससे सभी भली-भांति परिचित हैं। देश में फूड प्रोडक्शन बढ़ने के साथ कुपोषण की समस्या बढ़ रही है। गांधी के मुताबिक विकास तभी संभव है, जब हम अपनी जरूरतों को कम करेंगे।
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विकास नीचे से ऊपर की ओर होना चाहिए। विकास में सामाजिक न्याय बेहद जरूरी है। डॉ. मिश्रा ने गांधी के संदर्भ में विकास के प्री-मॉर्डन, मॉर्डन तथा पोस्ट मॉर्डन मॉडल का बेहद खूबसूरत तरीके से वर्णन किया। इसकी सभी ने सराहना की। गांधी के मुताबिक जब तक आखरी व्यक्ति तक विकास नहीं पहुंचेगा, तब तक सही मायने में विकास नहीं होगा।
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गांधी ने हमेशा स्वराज पर बल दिया। गांधीयन एंड पीस स्टडीज सेंटर पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ से आए प्रो. एमएल शर्मा ने कहा कि आज हम सभी उपभोक्ता बनकर रह गए हैं, लेकिन हमें जरूरत के मुताबिक ही चीजों का इस्तेमाल करना चाहिए। गांधी ने हमेशा ग्रामीण स्वराज की बात की। आज बाजार के जरिए सामान व देश पर नियंत्रण की साजिश हो रही है।
औद्योगिकरण की अंधाधुंध विकास के चलते ग्रामीण परिवेश को नष्ट किया जा रहा है। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे महात्मा गांधी को जीवन में उतारकर स्वदेशी चीजों का ज्यादा से ज्यादा प्रयोग करें। तभी गांधी के विकास का मॉडल पूरी तरह प्रासांगिक हो सकेगा।
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