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साहित्य की सभी विधाओं में लेखन ने गति प्राप्त की
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संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। हिंदू गर्ल्स कॉलेज जगाधरी में अंग्रेजी विभाग की ओर से दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी कराई गई। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि साहित्य की सभी विधाओं में लेखन ने गति प्राप्त की है।
शेक्सपीयर एसोसिएशन इंडिया के सहयोग से आयोजित संगोष्ठी का शुभारंभ संगोष्ठी संयोजिका डॉ. उज्ज्वल शर्मा व संगोष्ठी अध्यक्ष प्रो. भीम सिंह दहिया ने किया। विज्ञान विभाग की अध्यक्षा मोनिका खुराना ने सभी बुद्धिजीवियों का स्वागत किया। र्लासिक ऑफ इंडियन राइटिंग इन इंगिलश विषय पर संगोष्ठी के उद्घाटन भाषण में इएफएलयू हैदराबाद के कुलपति प्रो. अभय मौर्य कुलपति ने कहा कि कई वर्षों पहले भारतीय अंग्रेजी कथा साहित्य में आशातीत वृद्धि हुई।
साहित्य की सभी विधाओं में लेखन ने गति प्राप्त की है। विशेष रूप से भारतीय उपन्यासकार आरके नारायण, मुल्कराज आनंद व उनके जैसे दिग्गजों ने लेखन की विधा को बढ़ावा दिया। उद्घाटन सत्र में बीच वक्तव्य संगोष्ठी के अध्यक्ष केयूके से पूर्व उपकुलपति एवं शिक्षाविद् प्रो. भीम सिंह दहिया ने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि भारतीय लेखकों ने शिक्षा के अलावा अंग्रेजी को रचनात्मक भाषा के रूप में भी अपनाया। डॉ. सुरुचि चौधरी ने सभी धन्यवाद किया।
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जगाधरी। हिंदू गर्ल्स कॉलेज जगाधरी में अंग्रेजी विभाग की ओर से दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी कराई गई। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि साहित्य की सभी विधाओं में लेखन ने गति प्राप्त की है।
शेक्सपीयर एसोसिएशन इंडिया के सहयोग से आयोजित संगोष्ठी का शुभारंभ संगोष्ठी संयोजिका डॉ. उज्ज्वल शर्मा व संगोष्ठी अध्यक्ष प्रो. भीम सिंह दहिया ने किया। विज्ञान विभाग की अध्यक्षा मोनिका खुराना ने सभी बुद्धिजीवियों का स्वागत किया। र्लासिक ऑफ इंडियन राइटिंग इन इंगिलश विषय पर संगोष्ठी के उद्घाटन भाषण में इएफएलयू हैदराबाद के कुलपति प्रो. अभय मौर्य कुलपति ने कहा कि कई वर्षों पहले भारतीय अंग्रेजी कथा साहित्य में आशातीत वृद्धि हुई।
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साहित्य की सभी विधाओं में लेखन ने गति प्राप्त की है। विशेष रूप से भारतीय उपन्यासकार आरके नारायण, मुल्कराज आनंद व उनके जैसे दिग्गजों ने लेखन की विधा को बढ़ावा दिया। उद्घाटन सत्र में बीच वक्तव्य संगोष्ठी के अध्यक्ष केयूके से पूर्व उपकुलपति एवं शिक्षाविद् प्रो. भीम सिंह दहिया ने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि भारतीय लेखकों ने शिक्षा के अलावा अंग्रेजी को रचनात्मक भाषा के रूप में भी अपनाया। डॉ. सुरुचि चौधरी ने सभी धन्यवाद किया।
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