मजदूरों, गरीब लोगों व कच्चे कर्मचारियों ने खाली बर्तन बजाकर, सरकार के प्रति जताया रोष

Amarujala Local Bureauअमर उजाला लोकल ब्यूरो Updated Tue, 21 Apr 2020 04:07 PM IST
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खाली बर्तन बजाती महिलाएं।
खाली बर्तन बजाती महिलाएं। - फोटो : AMAR UJALA

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यमुनानगर जिलाभर में हजारों मजदूरों, गरीब लोगों व सरकारी विभाग के कच्चे कर्मचारियों ने राशन व आर्थिक मदद की मांग के लिए खाली बर्तन बजाकर अपने गुस्से का इजहार किया। मजदूर संगठन सीआईटीयू के देशव्यापी आह्वान पर हुई। इस कार्यवाही में भट्ठा मजदूरों, निर्माण श्रमिकों, फैक्ट्री मजदूरों, ग्रामीण सफाई कर्मचारियों, आशावर्करो, आंगनबाड़ी, मिड-डे-मील कर्मियों, रेहड़ी-पटरी मजदूरों, ग्रामीण चैकीदारों, नरेगा मजदूरों, वन मजदूरों, असंगठित क्षेत्र के मजदूरों, खेतिहर मजदूरों, गरीब किसानों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। इसमें महिलाओं की बड़ी संख्या थी। इस कार्यक्रम में जनवादी महिला समिति, खेत मजदूर यूनियन, किसान सभा, नौजवान सभा जैसे संगठनों ने भी सक्रियता से भाग लिया। सीटू जिला अध्यक्ष मतलूब हुसैन, सचिव शरबती देवी ने कहा कि लाॅकडाऊन को महीना भर होने को है। मजदूरों की बड़ी आबादी के घर का राशन खत्म होने को आया है, परन्तु अभी तक सरकार की ओर से मदद के प्रयास बेहद नाकाफी हैं। प्रवासी मजदूरों, भट्ठा मजदूरों, अपंजीकृत निर्माण मजदूरों, रेहड़ी-पटरी मजदूरों, असंगठित क्षेत्र के मजदूरों व घरेलू महिला मजदूरों की हालत दयनीय है। फैक्ट्रियों में काम करने वाले मजदूरों की हालात भी खराब है। अब केवल भाषण से काम चलने वाला नहीं है। बल्कि राशन मिले, आर्थिक मदद मिले व जो मजदूर फैक्ट्रियों में काम करते हैं। उनको पूरा वेतन मिले व किसी की नौकरी न हटे। सरकार काम के घंटे 8 से 12 करने के प्रयास बंद करे। इसलिए आज जरूरतमंद मजदूरों व गरीब लोगों ने अपने घरों की छतों, बालकोनियों, पसारों, कार्यस्थलो, जहां भी ठहरे हुए है, वहां उचित दूरी रखते हुए, लाॅकडाउन का पालन करते हुए इस आयोजन को सफल बनाया है। सीटू नेताओं ने मांग कि है कि सभी मजदूर व जरूरतमंद परिवारों को 3 महीने का सुखा राशन फ्री में दिया जाए व घर तक पंहुचाया जाए। प्रत्येक मजदूर व जरूरतमंद परिवार को जो टैक्सदाता नहीं है, उन्हें 7500 रुपये नगद राशि का भुगतान किया जाए। इसमें किसी भी प्रकार की कंडीशन न लगाई जाए। इस महामारी के दौरान जरूरी सेवाओं में लगे कच्चे कर्मचारियों जैसे आशावर्करों, स्वास्थ्य ठेका कर्मचारी, ग्रामीण सफाई कर्मचारी, आंगनबाड़ी, ग्रामीण चैकीदारों, मिड-डे-मील वर्करों आदि को पूरे सुरक्षा उपकरण उपलब्ध हों। 50 लाख बीमा कवरेज दिया जाए। महामारी के दौरान समान काम-समान वेतन या कम से कम डबल वेतन दिया जाए। स्कीम वर्कर्स व कच्चे कर्मचारियों का बकाया वेतन तुरंत जारी हो। भट्ठा मजदूरों सहित तमाम प्रवासी मजदूरों, निर्माण कल्याण बोर्ड में जो निर्माण मजदूर पंजीकृत नहीं है व तमाम असंगठित क्षेत्र के मजदूरों तक राशन व नगद रूपये देना सुनिश्चित किया जाए। फैक्ट्री मजदूरों को पूरा वेतन मिले व किसी को नौकरी से न हटाया जाए। मनरेगा के तहत काम मिले व खेती के कुछ कामों को भी इसके दायरे में लाया जाए व दिहाड़ी 600 रुपये हो। सरकार से मांग की गई कि 8 घंटे प्रतिदिन की ड्यूटी को 12 घंटे करने के केन्द्र सरकार के प्रयास तुरत बंद हो। जिला में इन आयोजनों का नेतृत्व भवन निर्माण कामगार यूनियन के नेता-मतलूब हुसैन, आशा वर्कर्स यूनियन की प्रधान नीरू बाला, आंगनबाड़ी वर्कर्स हैल्पर्स यूनियन की प्रधान रेखा सैनी, मिड डे मील वर्कर्स यूनियन की प्रधान बिमला, ग्रामीण चौकीदार सभा के धर्मपाल आदि ने किया।
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