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Yamuna Nagar News: स्वरोजगार से आर्थिक स्थिति मजबूत कर रहीं महिलाएं

Mon, 08 Jun 2026 01:34 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर Updated Mon, 08 Jun 2026 01:34 AM IST
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Women strengthening their economic status through self-employment
व्यासपुर गांव में अपने पशुओं के साथ समूह की महिलाएं। स्वयं
संवाद न्यूज एजंसी
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यमुनानगर। व्यासपुर गांव की महिलाओं ने स्वयं सहायता समूह के माध्यम से सशक्तिकरण की मिसाल कायम की है। वर्ष 2021 में गठित सोहंग स्वयं सहायता समूह आज गांव की 10 महिलाओं के लिए आजीविका का मजबूत मंच बन चुका है। समूह से जुड़ी महिलाएं सिलाई-कढ़ाई, पशुपालन, सीएससी सेंटर संचालन, मजदूरी और अन्य कार्यों के जरिए अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं।

समूह की प्रधान प्रवेश रानी हैं, जो सिलाई-कढ़ाई के साथ पशुपालन और सीएससी सेंटर का संचालन भी कर रही हैं। उन्होंने बताया कि ब्लॉक स्तर पर धर्मवीर कांबोज के सहयोग से उन्हें सीएससी सेंटर की सुविधा मिली, जिससे ग्रामीणों को विभिन्न ऑनलाइन सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। प्रवेश रानी पंचायत सदस्य होने के साथ-साथ समूह सखी की जिम्मेदारी भी निभा रही हैं।
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इसके अलावा वह गायत्री ग्राम संगठन की खजांची तथा अरमान क्लस्टर की उपप्रधान भी हैं। प्रवेश ने बताया कि प्रत्येक माह समूह की नियमित बैठक की जाती है, जबकि ग्राम संगठन की बैठक अलग से होती है। मिशन की ओर से महिलाओं के कार्य और नेतृत्व क्षमता को देखते हुए उन्हें समूह सखी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। एक समूह सखी के अंतर्गत 10 स्वयं सहायता समूहों का मार्गदर्शन किया जाता है।
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समूह की सचिव पूजा रानी सिलाई-कढ़ाई का कार्य कर रही हैं, जबकि खजांची कोमल समूह की गतिविधियों के साथ मजदूरी कर परिवार की आय बढ़ा रही हैं। समूह की अन्य सदस्य सुदेश, कौशल्या, पिंकी, बिमला, सुरेशो, मलकीत और कमलेश भी विभिन्न कार्यों के माध्यम से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। कमलेश, सुदेश और पूजा रानी सिलाई-कढ़ाई से जुड़ी हैं, जबकि बिमला और सुरेशो पशुपालन का कार्य कर रही हैं।

प्रवेश रानी ने बताया कि स्वयं सहायता समूहों को सबसे बड़ी समस्या ऋण की सीमित उपलब्धता की है। उनका कहना है कि बैंकों की ओर से पर्याप्त ऋण स्वीकृत नहीं होने से महिलाएं अपने कार्यों का विस्तार नहीं कर पा रही हैं। आर्थिक सहयोग मिले तो गांव में आटा चक्की, जूट बैग निर्माण सहित कई छोटे उद्योग शुरू किए जा सकते हैं, जिससे महिलाओं को अधिक आमदनी होगी और सशक्त बन सकेंगी।


ग्रामीण क्षेत्र की ये महिलाएं आज न केवल अपने परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं, बल्कि अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन रही हैं। समूह की महिलाओं का मानना है कि यदि परिवार का साथ मिले तो महिलाएं अन्य किसी भी काम में आगे बढ़कर समाज व आसपास का सुधार भी कर सकतीं हैं।

व्यासपुर गांव में अपने पशुओं के साथ समूह की महिलाएं। स्वयं

व्यासपुर गांव में अपने पशुओं के साथ समूह की महिलाएं। स्वयं

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