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Yamuna Nagar News: मेले के लंगरों और भंडारों में सांप्रदायिक सद्भाव की बयार
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जगाधरी। कपालमोचन मेला हिंदुओं और सिखों दोनों के लिए तीर्थ यात्रा का एक प्राचीन स्थान है। मेले में हर साल सात से आठ लाख श्रद्धालु पवित्र सरोवरों में स्नान के लिए आते हैं। इस बार इन श्रद्धालुओं के खाने पीने के लिए मेला स्थल में 50 से अधिक लंगर और भंडारे लगे हैं, जिसमें 24 घंटे निस्वार्थ भाव से भोजन छकाया जा रहा हैं।
खास बात ये हैं सिखों द्वारा लगाए गए लंगर में हिंदू श्रद्धालु भी श्रद्धा भाव से भोजन और सेवा कर रहे हैं। वहीं, हिंदुओं की ओर से लगने वाले भंडारों में सिख प्रसादा छकते और सेवा करते नजर आ रहे हैं। मेले में दुकानें लगाने वाले और पशु मेले में आने वाले मुस्लिम समाज के लोग इन्हीं लंगरों और भंडारों में भोजन कर रहे हैं।
24 घंटे भट्ठियों में चढ़े रहते हैं कड़ाहे
इन लंगरों और भंडारों में 24 घंटे श्रद्धालुओं को भोजन और जलपान कराया जा रहा है। इन लंगरों और भंडारों में दाल, सब्जी, कढ़ी, रोटी के अलावा जलेबियां, पकोड़े, ब्रेड पकोड़े, मालपुए, खीर, बर्फी, लड्डू, दूध और चाय दी जा रही है। प्रत्येक भंडारे में 24 घंटे कुछ न कुछ बन रहा है।
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लंगरों और भंडारों में सात करोड़ का खर्च
इस बार मेले में 22 नवंबर से ही लंगर और भंडारे लग गए, जो कि 27 नवंबर को मुख्य स्नान तक लगे रहेंगे। छह दिनों तक एक लंगर में औसतन 15 लाख रुपये का खर्च आने का अनुमान है। सभी लंगरों और भंडारों में करीब सात करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान हैं। मेले में लंगर और भंडारे लगाने वाले अपने साथ सिलिंडर, लकडि़यां, भटि्ठयां, डीजल, आटा, दाल, और राशन का सारा सामान साथ लेकर आए हैं। जबकि दूध और सब्जियां यहां आकर खरीद रहे हैं।
मोगा के भोरिया कलां के लंगर में मुस्लिम कर रहे सेवा
पंजाब के मोगा जिले के भोरिया कलां गांव की ओर से कपालमोचन में 40 साल से लंगर लग रहा है। लंगर कमेटी के सदस्यों दर्शन सिंह ने बताया कि इस बार 20 सिलिंडर, 400 लीटर डीजल, 70 क्विंटल लकड़ियां, 40 क्विंटल आटा, आटा गूंदने, रोटियां बनाने की मशीन और राशन का अन्य सामान ट्रकों और ट्रैक्टर ट्रालियों में साथ लेकर आए हैं। 20 सिलिंडर यहां आकर लिए हैं।
प्रतिदिन 100 लीटर दूध लेकर आ रहे हैं। लंगर में दाल, सब्जी के अलावा, बर्फी सूजी की बर्फी, लड्डू, ब्रेड पकोडे, जलेबियां और चाय बनाई जा रही है। दर्शन सिंह ने बताया कि उनके गांव के मुस्लिम समाज के अनवर खान, सिकंदर खान, राज खान, चिरागदीन और रामा लंगर में सेवा करने के लिए साथ आए हैं। लंगर में अब तक करीब 13 लाख रुपए खर्च हो चुके हैं। कुल करीब 20 लाख रुपये का खर्च का अनुमान है। लंगर की सेवा के लिए करीब 150 सेवादार साथ आए हैं।
रतिया के हलवाई 25 साल से लगा रहे भंडारा
फतेहाबाद के रतिया के श्री कपिल मुनि सेवा मंडल की ओर से मेले में 25 साल से भंडारा लगाया जा रहा है। सभी सेवादार हलवाई है। सेवादार अपने साथ 40 क्विंटल आटा, 30 क्विंटल लकडि़यां, 200 लीटर डीजल, 20 सिलेंडर और राशन का सारा सामान लेकर आए हैं। बाकी जरूरत का सामान यही से खरीद रहे हैं। इसी तरह मोगा के बाबा जुगराज सिंह 30 सालों से लंगर लगा रहे हैं। सब्जियां और अन्य जरूरी सामान यही से खरीद रहे हैं। रात दो बजे तक लंगर चलता रहता है, जबकि चाय का लंगर 24 घंटे चल रहा है।
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खास बात ये हैं सिखों द्वारा लगाए गए लंगर में हिंदू श्रद्धालु भी श्रद्धा भाव से भोजन और सेवा कर रहे हैं। वहीं, हिंदुओं की ओर से लगने वाले भंडारों में सिख प्रसादा छकते और सेवा करते नजर आ रहे हैं। मेले में दुकानें लगाने वाले और पशु मेले में आने वाले मुस्लिम समाज के लोग इन्हीं लंगरों और भंडारों में भोजन कर रहे हैं।
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24 घंटे भट्ठियों में चढ़े रहते हैं कड़ाहे
इन लंगरों और भंडारों में 24 घंटे श्रद्धालुओं को भोजन और जलपान कराया जा रहा है। इन लंगरों और भंडारों में दाल, सब्जी, कढ़ी, रोटी के अलावा जलेबियां, पकोड़े, ब्रेड पकोड़े, मालपुए, खीर, बर्फी, लड्डू, दूध और चाय दी जा रही है। प्रत्येक भंडारे में 24 घंटे कुछ न कुछ बन रहा है।
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लंगरों और भंडारों में सात करोड़ का खर्च
इस बार मेले में 22 नवंबर से ही लंगर और भंडारे लग गए, जो कि 27 नवंबर को मुख्य स्नान तक लगे रहेंगे। छह दिनों तक एक लंगर में औसतन 15 लाख रुपये का खर्च आने का अनुमान है। सभी लंगरों और भंडारों में करीब सात करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान हैं। मेले में लंगर और भंडारे लगाने वाले अपने साथ सिलिंडर, लकडि़यां, भटि्ठयां, डीजल, आटा, दाल, और राशन का सारा सामान साथ लेकर आए हैं। जबकि दूध और सब्जियां यहां आकर खरीद रहे हैं।
मोगा के भोरिया कलां के लंगर में मुस्लिम कर रहे सेवा
पंजाब के मोगा जिले के भोरिया कलां गांव की ओर से कपालमोचन में 40 साल से लंगर लग रहा है। लंगर कमेटी के सदस्यों दर्शन सिंह ने बताया कि इस बार 20 सिलिंडर, 400 लीटर डीजल, 70 क्विंटल लकड़ियां, 40 क्विंटल आटा, आटा गूंदने, रोटियां बनाने की मशीन और राशन का अन्य सामान ट्रकों और ट्रैक्टर ट्रालियों में साथ लेकर आए हैं। 20 सिलिंडर यहां आकर लिए हैं।
प्रतिदिन 100 लीटर दूध लेकर आ रहे हैं। लंगर में दाल, सब्जी के अलावा, बर्फी सूजी की बर्फी, लड्डू, ब्रेड पकोडे, जलेबियां और चाय बनाई जा रही है। दर्शन सिंह ने बताया कि उनके गांव के मुस्लिम समाज के अनवर खान, सिकंदर खान, राज खान, चिरागदीन और रामा लंगर में सेवा करने के लिए साथ आए हैं। लंगर में अब तक करीब 13 लाख रुपए खर्च हो चुके हैं। कुल करीब 20 लाख रुपये का खर्च का अनुमान है। लंगर की सेवा के लिए करीब 150 सेवादार साथ आए हैं।
रतिया के हलवाई 25 साल से लगा रहे भंडारा
फतेहाबाद के रतिया के श्री कपिल मुनि सेवा मंडल की ओर से मेले में 25 साल से भंडारा लगाया जा रहा है। सभी सेवादार हलवाई है। सेवादार अपने साथ 40 क्विंटल आटा, 30 क्विंटल लकडि़यां, 200 लीटर डीजल, 20 सिलेंडर और राशन का सारा सामान लेकर आए हैं। बाकी जरूरत का सामान यही से खरीद रहे हैं। इसी तरह मोगा के बाबा जुगराज सिंह 30 सालों से लंगर लगा रहे हैं। सब्जियां और अन्य जरूरी सामान यही से खरीद रहे हैं। रात दो बजे तक लंगर चलता रहता है, जबकि चाय का लंगर 24 घंटे चल रहा है।