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Yamuna Nagar News: भागवत कथा में सुनाए भगवान कपिल और माता सती के प्रसंग
Thu, 01 Oct 2026 01:56 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Thu, 01 Oct 2026 01:56 AM IST
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काली माता मंदिर में कथा सुनने पहुंचे श्रद्धालु। आयोजक
संवाद न्यूज एजेंसी
व्यासपुर। पितृ पक्ष के उपलक्ष्य में व्यासपुर स्थित काली माता मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में भगवान के विभिन्न अवतारों और सनातन धर्म से जुड़े प्रसंगों का वर्णन किया गया। कथावाचक भगतमाली राजेंद्र दास ने श्रद्धालुओं को भगवान कपिल अवतार और माता सती के चरित्र से जुड़े प्रसंग सुनाए। उन्होंने कहा कि भागवत कथा मनुष्य को जीवन में सत्य, धर्म, त्याग और भक्ति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।
कथा के दौरान भगवान के विभिन्न अवतारों का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि जब-जब धर्म की हानि और अधर्म की वृद्धि होती है, तब भगवान विभिन्न रूपों में अवतार लेकर धर्म की स्थापना और भक्तों की रक्षा करते हैं। भगवान कपिल के प्रसंग में उन्होंने बताया कि कपिल मुनि ने अपनी माता देवहूति को ज्ञान, भक्ति और आत्मकल्याण का मार्ग समझाया था। उनका दिया ज्ञान मनुष्य को मोह-माया से ऊपर उठकर परमात्मा की भक्ति और आत्मचिंतन की ओर प्रेरित करता है।
उन्होंने कहा कि मनुष्य को सांसारिक जीवन के साथ आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करने का प्रयास भी करना चाहिए। कथा में माता सती के चरित्र का भी वर्णन किया गया। उन्होंने कहा कि नियमित रूप से कथा श्रवण करने से मन में श्रद्धा, संयम और सद्भाव की भावना विकसित होती है। पितृ पक्ष में भागवत कथा का श्रवण करने को भी धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया गया।
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व्यासपुर। पितृ पक्ष के उपलक्ष्य में व्यासपुर स्थित काली माता मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में भगवान के विभिन्न अवतारों और सनातन धर्म से जुड़े प्रसंगों का वर्णन किया गया। कथावाचक भगतमाली राजेंद्र दास ने श्रद्धालुओं को भगवान कपिल अवतार और माता सती के चरित्र से जुड़े प्रसंग सुनाए। उन्होंने कहा कि भागवत कथा मनुष्य को जीवन में सत्य, धर्म, त्याग और भक्ति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।
कथा के दौरान भगवान के विभिन्न अवतारों का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि जब-जब धर्म की हानि और अधर्म की वृद्धि होती है, तब भगवान विभिन्न रूपों में अवतार लेकर धर्म की स्थापना और भक्तों की रक्षा करते हैं। भगवान कपिल के प्रसंग में उन्होंने बताया कि कपिल मुनि ने अपनी माता देवहूति को ज्ञान, भक्ति और आत्मकल्याण का मार्ग समझाया था। उनका दिया ज्ञान मनुष्य को मोह-माया से ऊपर उठकर परमात्मा की भक्ति और आत्मचिंतन की ओर प्रेरित करता है।
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उन्होंने कहा कि मनुष्य को सांसारिक जीवन के साथ आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करने का प्रयास भी करना चाहिए। कथा में माता सती के चरित्र का भी वर्णन किया गया। उन्होंने कहा कि नियमित रूप से कथा श्रवण करने से मन में श्रद्धा, संयम और सद्भाव की भावना विकसित होती है। पितृ पक्ष में भागवत कथा का श्रवण करने को भी धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया गया।
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